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ऑपरेशन चक्र-6: सीबीआई की बड़ी कार्रवाई, डिजिटल अरेस्ट से लूटे 42 करोड़ रुपये; तीन मामलों में पांच और गिरफ्तार
Sun, 06 Sep 2026 08:43 PM IST
देवेश त्रिपाठी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Sun, 06 Sep 2026 08:43 PM IST
सीबीआई ने डिजिटल अरेस्ट के जरिए 42 करोड़ रुपये से अधिक की कथित ठगी से जुड़े तीन मामलों में पांच और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही इन मामलों में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या आठ हो गई है। कार्रवाई देशव्यापी ‘ऑपरेशन चक्र-6’ के तहत की गई।
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42 करोड़ की डिजिटल अरेस्ट ठगी का खुलासा
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने तीन डिजिटल अरेस्ट के ठगी मामलों में पांच और लोगों को गिरफ्तार किया है। इन मामलों में पीड़ितों से कथित तौर पर 42 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की गई थी। एजेंसी ने रविवार को बताया कि इन मामलों में अब तक गिरफ्तार किए गए लोगों की संख्या आठ हो गई है।
ये गिरफ्तारियां संगठित साइबर अपराध नेटवर्क के खिलाफ सीबीआई के देशव्यापी अभियान 'ऑपरेशन चक्र-6' के तहत की गई हैं। इस अभियान का उद्देश्य डिजिटल अरेस्ट के जरिए ठगी करने वाले गिरोहों पर कार्रवाई करना है। सीबीआई ने इन तीन मामलों में 20 राज्यों में 89 ठिकानों पर तलाशी ली थी। इसके बाद पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
सीबीआई ने किन लोगों को किया गिरफ्तार?
सीबीआई की प्रवक्ता बीना यादव ने बताया कि गिरफ्तार किए गए पांच आरोपी कथित तौर पर ठगी की रकम हासिल करने, उसे अलग-अलग खातों में भेजने और आगे बांटने में शामिल थे। मध्य प्रदेश के इटारसी के रहने वाले संकेत बस्तवार और पंकज दामड़े ने कथित तौर पर एक बैंक खाता हासिल किया। इसमें डिजिटल अरेस्ट ठगी की रकम जमा कराई गई और रकम को आगे भेजने में दोनों ने भूमिका निभाई, ताकि पैसे के लेनदेन का पता लगाना मुश्किल हो सके।
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अन्य तीन आरोपियों की पहचान आरिफ उर्फ किंग भाई, नई दिल्ली के हरीश पुरुषोत्तम यादव उर्फ हैरी और उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के शशांक सिंह उर्फ रवि के रूप में हुई है। सीबीआई के मुताबिक, इन तीनों ने कथित तौर पर उस बैंक खाते की व्यवस्था की, जिसमें एक पीड़ित से ठगी की रकम जमा कराई गई। इसके बाद रकम को कई बैंक खातों के जरिए भेजा गया।
कैसे देते थे ठगी को अंजाम?
जांच एजेंसी ने कहा कि तीनों आरोपियों ने खाताधारक के मोबाइल फोन में एक खतरनाक एपीके फाइल भी इंस्टॉल की थी। इस सॉफ्टवेयर की मदद से वे बैंक से आने वाले एसएमएस संदेशों को हासिल कर सकते थे और गुप्त रूप से खाते का संचालन कर सकते थे।
सीबीआई ने कहा, ''जांच में अब उस विस्तृत संगठित नेटवर्क का पता चल रहा है, जिसका ये लोग हिस्सा थे और यह भी सामने आ रहा है कि नेटवर्क ने रकम को किस तरह पूरी तरह इधर-उधर किया।'' तीनों मामलों में बीआईटीएस पिलानी, गुजरात और कर्नाटक के पीड़ित शामिल हैं। आरोप है कि ठगों ने पुलिस अधिकारी बनकर उन्हें लंबे समय तक डिजिटल अरेस्ट में रखा।
डिजिटल अरेस्ट के किन मामलों में हुई कार्रवाई?
बीआईटीएस पिलानी मामले में पीड़ित को कथित तौर पर तीन महीने तक डिजिटल अरेस्ट में रखा गया और उससे 7.67 करोड़ रुपये की ठगी की गई। गुजरात के मामले में एक अन्य पीड़ित को भी कथित तौर पर तीन महीने तक इसी तरह डिजिटल अरेस्ट में रखा गया और उससे 19.24 करोड़ रुपये ठग लिए गए।
कर्नाटक के मामले में पीड़ित को कथित तौर पर एक महीने तक डिजिटल अरेस्ट में रखा गया और उससे 15.45 करोड़ रुपये की ठगी की गई। सीबीआई ने इन मामलों में तलाशी के दौरान पहले ही तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। हरियाणा के आकाश ने कथित तौर पर अपने द्वारा खोले गए एक खाते में 1.95 करोड़ रुपये हासिल किए और उसी दिन यह रकम दूसरे खातों में भेज दी।
कोलकाता के राजा कर्मकार ने कथित तौर पर अपनी फर्म के खाते में ठगी की 1.5 करोड़ रुपये की रकम हासिल की। वहीं, ज्योति रानी ने कथित तौर पर अपने खाते में जमा रकम के एक हिस्से को नकद निकाल लिया और बाकी रकम दूसरे खातों में भेज दी।
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ये गिरफ्तारियां संगठित साइबर अपराध नेटवर्क के खिलाफ सीबीआई के देशव्यापी अभियान 'ऑपरेशन चक्र-6' के तहत की गई हैं। इस अभियान का उद्देश्य डिजिटल अरेस्ट के जरिए ठगी करने वाले गिरोहों पर कार्रवाई करना है। सीबीआई ने इन तीन मामलों में 20 राज्यों में 89 ठिकानों पर तलाशी ली थी। इसके बाद पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
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सीबीआई ने किन लोगों को किया गिरफ्तार?
सीबीआई की प्रवक्ता बीना यादव ने बताया कि गिरफ्तार किए गए पांच आरोपी कथित तौर पर ठगी की रकम हासिल करने, उसे अलग-अलग खातों में भेजने और आगे बांटने में शामिल थे। मध्य प्रदेश के इटारसी के रहने वाले संकेत बस्तवार और पंकज दामड़े ने कथित तौर पर एक बैंक खाता हासिल किया। इसमें डिजिटल अरेस्ट ठगी की रकम जमा कराई गई और रकम को आगे भेजने में दोनों ने भूमिका निभाई, ताकि पैसे के लेनदेन का पता लगाना मुश्किल हो सके।
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अन्य तीन आरोपियों की पहचान आरिफ उर्फ किंग भाई, नई दिल्ली के हरीश पुरुषोत्तम यादव उर्फ हैरी और उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के शशांक सिंह उर्फ रवि के रूप में हुई है। सीबीआई के मुताबिक, इन तीनों ने कथित तौर पर उस बैंक खाते की व्यवस्था की, जिसमें एक पीड़ित से ठगी की रकम जमा कराई गई। इसके बाद रकम को कई बैंक खातों के जरिए भेजा गया।
कैसे देते थे ठगी को अंजाम?
जांच एजेंसी ने कहा कि तीनों आरोपियों ने खाताधारक के मोबाइल फोन में एक खतरनाक एपीके फाइल भी इंस्टॉल की थी। इस सॉफ्टवेयर की मदद से वे बैंक से आने वाले एसएमएस संदेशों को हासिल कर सकते थे और गुप्त रूप से खाते का संचालन कर सकते थे।
सीबीआई ने कहा, ''जांच में अब उस विस्तृत संगठित नेटवर्क का पता चल रहा है, जिसका ये लोग हिस्सा थे और यह भी सामने आ रहा है कि नेटवर्क ने रकम को किस तरह पूरी तरह इधर-उधर किया।'' तीनों मामलों में बीआईटीएस पिलानी, गुजरात और कर्नाटक के पीड़ित शामिल हैं। आरोप है कि ठगों ने पुलिस अधिकारी बनकर उन्हें लंबे समय तक डिजिटल अरेस्ट में रखा।
डिजिटल अरेस्ट के किन मामलों में हुई कार्रवाई?
बीआईटीएस पिलानी मामले में पीड़ित को कथित तौर पर तीन महीने तक डिजिटल अरेस्ट में रखा गया और उससे 7.67 करोड़ रुपये की ठगी की गई। गुजरात के मामले में एक अन्य पीड़ित को भी कथित तौर पर तीन महीने तक इसी तरह डिजिटल अरेस्ट में रखा गया और उससे 19.24 करोड़ रुपये ठग लिए गए।
कर्नाटक के मामले में पीड़ित को कथित तौर पर एक महीने तक डिजिटल अरेस्ट में रखा गया और उससे 15.45 करोड़ रुपये की ठगी की गई। सीबीआई ने इन मामलों में तलाशी के दौरान पहले ही तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। हरियाणा के आकाश ने कथित तौर पर अपने द्वारा खोले गए एक खाते में 1.95 करोड़ रुपये हासिल किए और उसी दिन यह रकम दूसरे खातों में भेज दी।
कोलकाता के राजा कर्मकार ने कथित तौर पर अपनी फर्म के खाते में ठगी की 1.5 करोड़ रुपये की रकम हासिल की। वहीं, ज्योति रानी ने कथित तौर पर अपने खाते में जमा रकम के एक हिस्से को नकद निकाल लिया और बाकी रकम दूसरे खातों में भेज दी।