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अब भाजपा संसदीय बोर्ड में बदलाव की चर्चा: योगी और फडणवीस की एंट्री संभव; कौन-कौन हो सकता है बाहर?
भाजपा के नए अध्यक्ष की टीम के बाद अब संसदीय बोर्ड में भी बड़े बदलाव की तैयारी है। योगी आदित्यनाथ, देवेंद्र फडणवीस, स्मृति ईरानी और किरेन रिजिजू समेत कम से कम छह नए चेहरों को जगह मिल सकती है। भाजपा की नई रणनीति क्या होगी?
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भाजपा संसदीय बोर्ड में बदलाव की तैयारी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई (फाइल)
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विस्तार
भाजपा में अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम के बाद अब पार्टी की सबसे ताकतवर इकाई संसदीय बोर्ड में भी बड़े बदलाव की चर्चा है। बोर्ड में भी जेन-जी और जेन-मिलेनियल को संदेश देने के साथ क्षेत्रीय व जातिगत समीकरण साधने पर मंथन हो रहा है। 11 सदस्यीय संसदीय बोर्ड में उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ, महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस, हाल ही में महासचिव बनाई गईं स्मृति ईरानी, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू समेत कम से कम छह नए चेहरे होंगे।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक नई टीम से बीएस येदियुरप्पा, सर्बानंद सोनोवाल, डॉ. के लक्ष्मण, इकबाल सिंह लालपुरा, सुधा यादव, सत्यनारायण जटिया की छुट्टी तय है। पार्टी संविधान के मुताबिक प्रधानमंत्री अध्यक्ष, निवर्तमान अध्यक्ष, संगठन महासचिव इसके स्वाभाविक सदस्य होते हैं। बोर्ड में बदलाव का कारण जेन-जी और जेन-मिलेनियल को संदेश देने की है। भले ही इस उम्र वर्ग के नेता न हों, मगर पार्टी इस उम्र वर्ग के आसपास के लोगों को शामिल करना चाहती है। उक्त सूत्र के मुताबिक वैसे भी पीएम मोदी की राजनीति समय के आगे या साथ चलने की रही है। ऐसे में इस बार का संसदीय बोर्ड ऐतिहासिक रूप से सबसे युवा हो सकता है।
पहली बार दो महिलाओं को मिल सकता है मौका : संसदीय बोर्ड में पहली बार दो महिलाओं को भी मौका मिल सकता है। योगी व फडणवीस दोनों संघ और प्रधानमंत्री की पसंद माने जाते हैं। इनकी वर्तमान उम्र 54 व 56 वर्ष है। स्मृति 50 वर्ष तो किरेन रिजिजू 54 वर्ष के हैं। स्मृति पारसी समुदाय तो रिजिजू बौद्ध समुदाय से हैं। ऐसे में संसदीय बोर्ड में स्मृति महिला-अल्पसंख्यक दोनों वहीं, रिजिजू अल्पसंख्यक कोटा को पूरा करने में सक्षम हैं।
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इनकी छुट्टी तय
येदियुरप्पा, सर्बानंद सोनोवाल, डॉ. के लक्ष्मण, इकबाल सिंह लालपुरा, सुधा यादव, सत्यनारायण जटिया की हो सकती है छुट्टी
ये भी पढ़ें: एक्सप्लेनर: परंदूर एयरपोर्ट परियोजना को सीएम विजय ने क्यों किया रद्द, क्या था पूरा प्लान और अब आगे क्या?
बोर्ड के जरिये संतुलन साधने की रणनीति
मौजूदा केंद्रीय चुनाव समिति में संसदीय बोर्ड के सभी 11 और तीन अतिरिक्त सदस्य हैं। अतिरिक्त तीन सदस्यों में बदलाव लाकर जातीय, क्षेत्रीय और चुनावी राज्यों के समीकरण साधे जा सकते हैं। पार्टी संविधान के मुताबिक बोर्ड के सभी सदस्य अनिवार्य रूप से सीईसी के भी सदस्य होते हैं। हालांकि सीईसी में बोर्ड के मुकाबले तीन अतिरिक्त सदस्य होते हैं। पिछली बार अतिरिक्त सदस्य के रूप में फडणवीस, भूपेंद्र यादव और वनति श्रीनिवासन को शामिल किया गया था।
चुनावी राज्यों व क्षेत्रीय समीकरण पर ध्यान
बोर्ड के गठन पर मंथन में चुनावी राज्यों, जातीय समीकरण और क्षेत्रीय संतुलन का भी ध्यान रखा जा रहा है। इस क्रम में जटिया की जगह नए दलित चेहरे, इकबाल की जगह पंजाब के खांचे में फिट बैठने वाले सिख या अन्य चेहरे, डॉ के लक्ष्मण, सुधा यादव की जगह नए ओबीसी चेहरे पर भी मंथन का दौर जारी है। नए संसदीय बोर्ड और नई केंद्रीय चुनाव समिति की घोषणा संभवत: प्रधानमंत्री के मध्य एशिया की यात्रा से लौटने के बाद की जाएगी।
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पार्टी सूत्रों के मुताबिक नई टीम से बीएस येदियुरप्पा, सर्बानंद सोनोवाल, डॉ. के लक्ष्मण, इकबाल सिंह लालपुरा, सुधा यादव, सत्यनारायण जटिया की छुट्टी तय है। पार्टी संविधान के मुताबिक प्रधानमंत्री अध्यक्ष, निवर्तमान अध्यक्ष, संगठन महासचिव इसके स्वाभाविक सदस्य होते हैं। बोर्ड में बदलाव का कारण जेन-जी और जेन-मिलेनियल को संदेश देने की है। भले ही इस उम्र वर्ग के नेता न हों, मगर पार्टी इस उम्र वर्ग के आसपास के लोगों को शामिल करना चाहती है। उक्त सूत्र के मुताबिक वैसे भी पीएम मोदी की राजनीति समय के आगे या साथ चलने की रही है। ऐसे में इस बार का संसदीय बोर्ड ऐतिहासिक रूप से सबसे युवा हो सकता है।
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पहली बार दो महिलाओं को मिल सकता है मौका : संसदीय बोर्ड में पहली बार दो महिलाओं को भी मौका मिल सकता है। योगी व फडणवीस दोनों संघ और प्रधानमंत्री की पसंद माने जाते हैं। इनकी वर्तमान उम्र 54 व 56 वर्ष है। स्मृति 50 वर्ष तो किरेन रिजिजू 54 वर्ष के हैं। स्मृति पारसी समुदाय तो रिजिजू बौद्ध समुदाय से हैं। ऐसे में संसदीय बोर्ड में स्मृति महिला-अल्पसंख्यक दोनों वहीं, रिजिजू अल्पसंख्यक कोटा को पूरा करने में सक्षम हैं।
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इनकी छुट्टी तय
येदियुरप्पा, सर्बानंद सोनोवाल, डॉ. के लक्ष्मण, इकबाल सिंह लालपुरा, सुधा यादव, सत्यनारायण जटिया की हो सकती है छुट्टी
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बोर्ड के जरिये संतुलन साधने की रणनीति
मौजूदा केंद्रीय चुनाव समिति में संसदीय बोर्ड के सभी 11 और तीन अतिरिक्त सदस्य हैं। अतिरिक्त तीन सदस्यों में बदलाव लाकर जातीय, क्षेत्रीय और चुनावी राज्यों के समीकरण साधे जा सकते हैं। पार्टी संविधान के मुताबिक बोर्ड के सभी सदस्य अनिवार्य रूप से सीईसी के भी सदस्य होते हैं। हालांकि सीईसी में बोर्ड के मुकाबले तीन अतिरिक्त सदस्य होते हैं। पिछली बार अतिरिक्त सदस्य के रूप में फडणवीस, भूपेंद्र यादव और वनति श्रीनिवासन को शामिल किया गया था।
चुनावी राज्यों व क्षेत्रीय समीकरण पर ध्यान
बोर्ड के गठन पर मंथन में चुनावी राज्यों, जातीय समीकरण और क्षेत्रीय संतुलन का भी ध्यान रखा जा रहा है। इस क्रम में जटिया की जगह नए दलित चेहरे, इकबाल की जगह पंजाब के खांचे में फिट बैठने वाले सिख या अन्य चेहरे, डॉ के लक्ष्मण, सुधा यादव की जगह नए ओबीसी चेहरे पर भी मंथन का दौर जारी है। नए संसदीय बोर्ड और नई केंद्रीय चुनाव समिति की घोषणा संभवत: प्रधानमंत्री के मध्य एशिया की यात्रा से लौटने के बाद की जाएगी।