बंगाल में राष्ट्रपति का अपमान?: पीएम बोले- TMC ने सारी हदें पार कर दीं, CM ममता का आरोप- राजनीति कर रही भाजपा
पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री की तरफ से राष्ट्रपति मुर्मू का स्वागत नहीं किया गया। वहीं एक कार्यक्रम में राष्ट्रपति ने इसका जिक्र भी किया, जिसके बाद राज्य में राजनीति चरम पर है। इस घटनाक्रम पर प्रधानमंत्री निराशा जाहिर की और कहा कि राज्य सत्ताधारी दल ने सारी हदें पार कर दी है। इससे पहले सीएम ममता बनर्जी ने भाजपा राष्ट्रपति के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाया है।
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विस्तार
This is shameful and unprecedented. Everyone who believes in democracy and the empowerment of tribal communities is disheartened.
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The pain and anguish expressed by Rashtrapati Ji, who herself hails from a tribal community, has caused immense sadness in the minds of the people… https://t.co/XGzwMCMFrTविज्ञापन विज्ञापन— Narendra Modi (@narendramodi) March 7, 2026
पीएम मोदी ने अपने पोस्ट में आगे लिखा- पश्चिम बंगाल की टीएमसी सरकार ने सारी हदें पार कर दी हैं। राष्ट्रपति के इस अपमान के लिए उनका प्रशासन जिम्मेदार है। यह भी उतना ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि पश्चिम बंगाल सरकार संथाल संस्कृति जैसे महत्वपूर्ण विषय को इतनी लापरवाही से ले रही है। राष्ट्रपति का पद राजनीति से ऊपर है और इस पद की गरिमा का हमेशा सम्मान किया जाना चाहिए। आशा है कि पश्चिम बंगाल सरकार और टीएमसी में सुधरने की भावना जागृत होगी।
ममता बनर्जी ने भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप
इससे पहले पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा राजनीति के लिए राष्ट्रपति के पद का इस्तेमाल कर रही है। कोलकाता में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्होंने कहा कि भाजपा इतनी नीचे गिर गई है कि वह राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का नाम लेकर पश्चिम बंगाल को बदनाम करने की कोशिश कर रही है।
राष्ट्रपति को राजनीतिक विवादों से दूर रहना चाहिए- ममता बनर्जी
इस दौरान सीएम ममता बनर्जी ने कहा कि वे राष्ट्रपति का पूरा सम्मान करती हैं, लेकिन चुनाव के समय भाजपा के कहने पर राजनीति में शामिल नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति देश का संवैधानिक पद है और उन्हें राजनीतिक विवादों से दूर रहना चाहिए।
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'आदिवासियों के मुद्दे पर भाजपा दोहरा रवैया अपनाती है'
मुख्यमंत्री ने यह भी सवाल उठाया कि जब मणिपुर और अन्य भाजपा शासित राज्यों में आदिवासी समुदाय के लोगों पर अत्याचार हुए, तब राष्ट्रपति ने उस पर कोई प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि आदिवासियों के मुद्दे पर भाजपा दोहरा रवैया अपनाती है। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति को शायद पश्चिम बंगाल में आदिवासी समुदाय के लिए किए गए विकास कार्यों की सही जानकारी नहीं है। सीएम ममता बनर्जी के अनुसार उनकी सरकार ने राज्य में आदिवासियों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक योजनाओं के तहत कई महत्वपूर्ण काम किए हैं।
राष्ट्रपति के कार्यक्रम में खामियां दुर्भाग्यपूर्ण- उपराष्ट्रपति
उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कार्यक्रम में खामियों को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि सर्वोच्च सांविधानिक पद को हमेशा वह गरिमा मिलनी चाहिए जिसके वह हकदार हैं। राधाकृष्णन ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, माननीय राष्ट्रपति का पद हमारे गणतंत्र का सर्वोच्च सांविधानिक पद है और इसे हमेशा वह गरिमा, प्रोटोकॉल और सम्मान मिलना चाहिए जिसके वह हकदार हैं। उपराष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्रपति पद की पवित्रता को हमेशा बनाए रखा जाना चाहिए।
गृह मंत्री अमित शाह ने साधा निशाना
पश्चिम बंगाल की तृणमूल सरकार ने आज अपने अराजक आचरण से और भी निम्न स्तर को छू लिया है। प्रोटोकॉल की घोर अवहेलना करते हुए उन्होंने भारत के राष्ट्रपति का अपमान किया है। इस घटना ने तृणमूल सरकार के भीतर की गहरी खामी को उजागर कर दिया है। जो सरकार मनमाने ढंग से नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करती है, वह देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद- राष्ट्रपति -का अपमान करने से भी नहीं हिचकिचाती। हमारे आदिवासी भाइयों और बहनों द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में राष्ट्रपति का यह अपमान हमारे राष्ट्र और हमारे संवैधानिक लोकतंत्र के मूल्यों पर एक धब्बा है। आज लोकतंत्र में विश्वास रखने वाला प्रत्येक नागरिक अत्यंत आहत और व्यथित है।
इस कड़ी में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक्स पर एक पोस्ट में टीएमसी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने लिखा- संथाल समुदाय को उनके अपने अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन से दूर रखने वाली व्यवस्थाओं का चयन करके, टीएमसी सरकार ने न केवल आदिवासी समाज की भावनाओं की अवहेलना की है, बल्कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद की गरिमा को भी ठेस पहुंचाई है। भारत के राष्ट्रपति के प्रति सम्मान केवल औपचारिक शिष्टाचार नहीं है, बल्कि यह संविधान और उसके द्वारा प्रतिनिधित्व की जाने वाली जनता के प्रति हमारे सामूहिक सम्मान को दर्शाता है। भारत की जनता, विशेष रूप से हमारे आदिवासी भाई-बहन, इस असंवेदनशील आचरण और अपनी संस्कृति और राष्ट्रपति पद के इस अनावश्यक अपमान के लिए जवाब के हकदार हैं।
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