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Kangra News: एससी-एसटी विकास निधि कानून के लिए कल प्रदेशभर में होंगे प्रदर्शन
Sun, 23 Aug 2026 07:13 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Sun, 23 Aug 2026 07:13 AM IST
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धर्मशाला। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति विकास निधि कानून बनाने की मांग को लेकर राज्य गठबंधन 24 अगस्त को प्रदेशभर में प्रदर्शन करेगा। गठबंधन के आह्वान पर सभी एसडीएम और जिलाधीश कार्यालय परिसरों में सुबह 11:00 से दोपहर 1:00 बजे तक धरना दिया जाएगा। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
ज्ञापन में एससी-एसटी की आबादी के अनुपात में बजट आवंटित करने और इसके प्रभावी व पारदर्शी इस्तेमाल के लिए कड़ा कानून बनाने की मांग की जाएगी। गठबंधन ने आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और राजस्थान की तर्ज पर हिमाचल प्रदेश में भी विकास निधि कानून लागू करने की आवाज उठाई है।
गठबंधन के सदस्य धर्मपाल चंद्रा और सुखदेव विश्वप्रेमी ने बताया कि प्रदेश की कुल आबादी में करीब 33 फीसदी एससी और 8 फीसदी एसटी वर्ग के लोग हैं। इसके बावजूद बीते पांच वर्षों में इनके विकास के लिए बजटीय आवंटन महज पांच फीसदी तक सीमित रहा है। आरोप है कि यह आवंटित राशि भी पूरी तरह निर्धारित उद्देश्यों पर खर्च नहीं हो रही।
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उन्होंने बताया कि भूमिहीन परिवारों को आवासीय और कृषि योग्य भूमि उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई जाएगी। नेताओं ने कहा कि पिछले साढ़े तीन वर्षों में मुख्यमंत्री, मंत्रियों और विधायकों से इस मुद्दे पर वार्ता की गई है, जिसमें 17 में से 15 विधायकों के समर्थन का दावा है। इससे पूर्व 11 फरवरी 2024 को मुख्यमंत्री कार्यालय को प्रस्तावित कानून का मसौदा भी सौंपा जा चुका है।
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ज्ञापन में एससी-एसटी की आबादी के अनुपात में बजट आवंटित करने और इसके प्रभावी व पारदर्शी इस्तेमाल के लिए कड़ा कानून बनाने की मांग की जाएगी। गठबंधन ने आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और राजस्थान की तर्ज पर हिमाचल प्रदेश में भी विकास निधि कानून लागू करने की आवाज उठाई है।
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गठबंधन के सदस्य धर्मपाल चंद्रा और सुखदेव विश्वप्रेमी ने बताया कि प्रदेश की कुल आबादी में करीब 33 फीसदी एससी और 8 फीसदी एसटी वर्ग के लोग हैं। इसके बावजूद बीते पांच वर्षों में इनके विकास के लिए बजटीय आवंटन महज पांच फीसदी तक सीमित रहा है। आरोप है कि यह आवंटित राशि भी पूरी तरह निर्धारित उद्देश्यों पर खर्च नहीं हो रही।
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उन्होंने बताया कि भूमिहीन परिवारों को आवासीय और कृषि योग्य भूमि उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई जाएगी। नेताओं ने कहा कि पिछले साढ़े तीन वर्षों में मुख्यमंत्री, मंत्रियों और विधायकों से इस मुद्दे पर वार्ता की गई है, जिसमें 17 में से 15 विधायकों के समर्थन का दावा है। इससे पूर्व 11 फरवरी 2024 को मुख्यमंत्री कार्यालय को प्रस्तावित कानून का मसौदा भी सौंपा जा चुका है।