हिमाचल प्रदेश: पंचतत्व में विलीन हुए पूर्व मंत्री मेजर विजय सिंह मनकोटिया, बेटे ने दी मुखाग्नि
कांगड़ा के दिग्गज नेता, पांच बार के विधायक और दो बार मंत्री रहे मेजर विजय सिंह मनकोटिया को बुधवार को अंतिम विदाई दी गई। उनका अंतिम संस्कार विधानसभा क्षेत्र कांगड़ा के तियारा स्थित उनके पैतृक गांव में पूरे सैन्य और धार्मिक सम्मान के साथ किया गया। 87 वर्षीय मेजर मनकोटिया का बीते मंगलवार को सुबह करीब 8ः30 बजे तबीयत बिगड़ने के बाद अस्पताल ले जाते समय निधन हो गया था।
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हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा के दिग्गज नेता, पांच बार के विधायक और दो बार मंत्री रहे मेजर विजय सिंह मनकोटिया को बुधवार को अंतिम विदाई दी गई। उनका अंतिम संस्कार विधानसभा क्षेत्र कांगड़ा के तियारा स्थित उनके पैतृक गांव में पूरे सैन्य और धार्मिक सम्मान के साथ किया गया। 87 वर्षीय मेजर मनकोटिया का बीते मंगलवार को सुबह करीब 8ः30 बजे तबीयत बिगड़ने के बाद अस्पताल ले जाते समय निधन हो गया था। उनके पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए तब तक रखा गया, जब तक कि उनका बेटा विदेश से भारत नहीं पहुंचा। मेजर मनकोटिया के बेटे सूर्यवीर अबूधाबी में रहते हैं और वह बुधवार सुबह लगभग 10 बजे तियारा पहुंचे। वहीं, मुंबई में रहने वाली उनकी बेटी संयुक्ता कुमारी तड़के तीन बजे पैतृक गांव पहुंच गई थीं।
अंतिम यात्रा बैंड-बाजे और नारों के साथ निकाली
दोपहर लगभग 12 बजे तियारा स्थित उनके ओएम महल से मेजर की अंतिम यात्रा बैंड-बाजे और नारों के साथ निकाली गई। इस दौरान तियारा और शाहपुर क्षेत्र के लोगों की आंखें नम हो गईं और अंतिम यात्रा में हजारों की संख्या में लोग मौजूद रहे। श्मशानघाट पर सभी धार्मिक रीति-रिवाजों को पूरा करने के बाद बेटे सूर्यवीर ने मुखाग्नि दी। राजनीति में आने से पहले मेजर मनकोटिया भारतीय सेना की गोरखा रेजिमेंट में मेजर के पद पर देश सेवा कर चुके थे। उन्होंने 1962, 1965 और 1971 के युद्धों में सक्रिय भूमिका निभाई थी। सेना की विशेष सशस्त्र टुकड़ी ने उन्हें गौरवमयी अंतिम विदाई दी। भूटान में भारतीय सैन्य दफ्तर के प्रभारी रहने के कारण उनका वहां से गहरा ऐतिहासिक नाता रहा था और वे बौद्ध भिक्षुओं व स्थानीय लामाओं के बीच काफी लोकप्रिय थे। इस दौरान पारंपरिक बौद्ध लामाओं ने धर्मग्रंथों के अनुसार विशेष मंत्रों का पाठ किया।
सुधीर बोले, राजकीय सम्मान न देना दुर्भाग्यपूर्ण
अंतिम संस्कार में धर्मशाला के भाजपा विधायक सुधीर शर्मा, कांगड़ा के विधायक पवन काजल, नूरपुर के विधायक रणबीर सिंह निक्का सहित भाजपा और कांग्रेस के कई स्थानीय नेता व जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। व्यवस्था संभालने और श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए जिला प्रशासन व पुलिस विभाग के आला अधिकारी भी पहुंचे। इसके अलावा कांगड़ा और धर्मशाला क्षेत्र की बौद्ध संस्कृति व तिब्बती समुदाय के लोग भी उपस्थित रहे। उधर, विधायक सुधीर शर्मा ने कहा कि जिस शख्स ने देश की रक्षा के लिए सेना में सेवाएं दीं और प्रदेश के विकास में दो बार कैबिनेट मंत्री व पांच बार विधायक के रूप में अमूल्य योगदान दिया, उन्हें राजकीय सम्मान न देना दुर्भाग्यपूर्ण है और यह कांगड़ा के कद्दावर नेता का अपमान है।