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Sonipat News: 2500 इकाइयों तक पहुंची जांच की आंच, समिति आठ सप्ताह में देगी रिपोर्ट
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बहादुरगढ़। एचएसआईआईडीसी के औद्योगिक क्षेत्र में पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन को लेकर दायर मामला अब आठ इकाइयों से बढ़कर करीब 2500 औद्योगिक इकाइयों की जांच तक पहुंच गया है। एनजीटी ने क्षेत्र की सभी औद्योगिक इकाइयों की पर्यावरणीय अनुपालन जांच के लिए चार सदस्यीय संयुक्त समिति गठित की है। झज्जर के जिला उपायुक्त को समिति का नोडल अधिकारी बनाया गया है। समिति को सभी इकाइयों का निरीक्षण कर आठ सप्ताह में रिपोर्ट एनजीटी के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी। मामले की अगली सुनवाई 26 अक्टूबर 2026 को होगी।
एनजीटी में हरिंद्र कुमार की ओर से दायर मामले में आरोप लगाया गया है कि एचएसआईआईडीसी औद्योगिक क्षेत्र में संचालित करीब 2500 इकाइयों में कई इकाइयां पर्यावरणीय नियमों का पालन नहीं कर रही हैं। आवेदक ने इनमें से आठ इकाइयों के संबंध में दस्तावेज और साक्ष्य एकत्र कर उन्हें मामले में प्रतिवादी बनाया था। सुनवाई के दौरान तस्वीरों का हवाला देते हुए कुछ इकाइयों से काला धुआं निकलने, खुले में औद्योगिक कचरा डालने और कचरा जलाने के आरोप लगाए गए।
आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ इकाइयां रात के समय संचालन करती हैं वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने निर्देशों का पालन न होने की बात कही थी। जैव ईंधन आधारित बॉयलरों से होने वाले सूक्ष्म कण उत्सर्जन के निर्धारित मानकों के पालन पर भी सवाल उठाए थे।
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एनजीटी की ओर से गठित संयुक्त समिति में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी), पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय, चंडीगढ़ और झज्जर के जिला उपायुक्त के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
समिति को जांच आठ सप्ताह में पूरी कर अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले रिपोर्ट एनजीटी में दाखिल करनी होगी। एनजीटी ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने के निर्देश भी दिए हैं।
ये हैं मामले में प्रतिवादी
एनजीटी में दायर केस में एमएसवी यूनिकोटर्स प्राइवेट लिमिटेड, हरियाणा सरकार, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जिला उपायुक्त झज्जर, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम), हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड (एचएसआईआईडीसी), नगर परिषद, भारत संघ, एमएस कोलेंस इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड, एमएस कैंटाबिल रिटेल इंडिया लिमिटेड, एमएस लक्ष्मी पॉलीकोट्स, एमएस सेवब्रो प्लास्टिक्स, एमएस शिवालिक फोम्स एंड फैब्रिक्स प्राइवेट लिमिटेड, एमएस एक्लेम इंडस्ट्रीज तथा एमएस एमएनवी फैशन प्राइवेट लिमिटेड को प्रतिवादी बनाया गया है।
फोटो-51:
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एनजीटी में हरिंद्र कुमार की ओर से दायर मामले में आरोप लगाया गया है कि एचएसआईआईडीसी औद्योगिक क्षेत्र में संचालित करीब 2500 इकाइयों में कई इकाइयां पर्यावरणीय नियमों का पालन नहीं कर रही हैं। आवेदक ने इनमें से आठ इकाइयों के संबंध में दस्तावेज और साक्ष्य एकत्र कर उन्हें मामले में प्रतिवादी बनाया था। सुनवाई के दौरान तस्वीरों का हवाला देते हुए कुछ इकाइयों से काला धुआं निकलने, खुले में औद्योगिक कचरा डालने और कचरा जलाने के आरोप लगाए गए।
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आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ इकाइयां रात के समय संचालन करती हैं वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने निर्देशों का पालन न होने की बात कही थी। जैव ईंधन आधारित बॉयलरों से होने वाले सूक्ष्म कण उत्सर्जन के निर्धारित मानकों के पालन पर भी सवाल उठाए थे।
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एनजीटी की ओर से गठित संयुक्त समिति में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी), पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय, चंडीगढ़ और झज्जर के जिला उपायुक्त के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
समिति को जांच आठ सप्ताह में पूरी कर अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले रिपोर्ट एनजीटी में दाखिल करनी होगी। एनजीटी ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने के निर्देश भी दिए हैं।
ये हैं मामले में प्रतिवादी
एनजीटी में दायर केस में एमएसवी यूनिकोटर्स प्राइवेट लिमिटेड, हरियाणा सरकार, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जिला उपायुक्त झज्जर, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम), हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड (एचएसआईआईडीसी), नगर परिषद, भारत संघ, एमएस कोलेंस इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड, एमएस कैंटाबिल रिटेल इंडिया लिमिटेड, एमएस लक्ष्मी पॉलीकोट्स, एमएस सेवब्रो प्लास्टिक्स, एमएस शिवालिक फोम्स एंड फैब्रिक्स प्राइवेट लिमिटेड, एमएस एक्लेम इंडस्ट्रीज तथा एमएस एमएनवी फैशन प्राइवेट लिमिटेड को प्रतिवादी बनाया गया है।
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