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विश्वविद्यालय को शिक्षक बहाली का अपीलीय अधिकार नहीं : हाईकोर्ट
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चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि गैर-सरकारी संबद्ध कॉलेज के शिक्षक की सेवा समाप्ति के आदेश के खिलाफ विश्वविद्यालय को अपीलीय अधिकार नहीं है। विश्वविद्यालय ऐसे आदेश को रद्द कर शिक्षक की बहाली का निर्देश नहीं दे सकता।
जस्टिस कुलदीप तिवारी ने स्वामी प्रेमानंद महाविद्यालय होशियारपुर की याचिका का निपटारा किया। उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय के 16 जुलाई 2021 के आदेश को रद्द कर दिया। इस आदेश में कॉलेज द्वारा 23 जून 2021 को की गई कर्मचारी की सेवा समाप्ति रद्द की गई थी। विश्वविद्यालय ने उस कर्मचारी को बहाल करने का निर्देश भी दिया था।
कॉलेज ने विश्वविद्यालय के इस आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया। याचिका में मुख्य सवाल विश्वविद्यालय के अपीलीय अधिकार को लेकर था। अदालत ने कहा कि संबंधित नियमों में विश्वविद्यालय को यह अधिकार नहीं दिया गया है। कॉलेज प्रबंधन के बर्खास्तगी आदेश की वैधता पर अपील के तौर पर विचार का अधिकार नहीं है।
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नियमों का प्रावधान
अदालत ने संबंधित नियमों का विस्तार से उल्लेख किया। रेगुलेशन 9.1 गैर-सरकारी कॉलेज के शासी निकाय को अधिकार देता है। यह पर्याप्त कारण होने पर स्थायी कर्मचारी की सेवा समाप्त कर सकता है। रेगुलेशन 10 के तहत कॉलेज को विश्वविद्यालय को सूचना देनी होती है। प्राचार्य या शिक्षक को बर्खास्त करने पर दो सप्ताह के भीतर कारण भेजने होते हैं।
हाईकोर्ट का निर्णय और कर्मचारी के विकल्प
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि इन प्रावधानों में अपील सुनने का अधिकार नहीं है। इसी आधार पर जस्टिस कुलदीप तिवारी ने पंजाब विश्वविद्यालय का आदेश रद्द किया। यह आदेश 16 जुलाई 2021 को जारी किया गया था। हालांकि, कर्मचारी को सेवा समाप्ति आदेश को चुनौती देने की स्वतंत्रता दी गई है। वह उचित वैधानिक उपाय अपना सकता है।
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जस्टिस कुलदीप तिवारी ने स्वामी प्रेमानंद महाविद्यालय होशियारपुर की याचिका का निपटारा किया। उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय के 16 जुलाई 2021 के आदेश को रद्द कर दिया। इस आदेश में कॉलेज द्वारा 23 जून 2021 को की गई कर्मचारी की सेवा समाप्ति रद्द की गई थी। विश्वविद्यालय ने उस कर्मचारी को बहाल करने का निर्देश भी दिया था।
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कॉलेज ने विश्वविद्यालय के इस आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया। याचिका में मुख्य सवाल विश्वविद्यालय के अपीलीय अधिकार को लेकर था। अदालत ने कहा कि संबंधित नियमों में विश्वविद्यालय को यह अधिकार नहीं दिया गया है। कॉलेज प्रबंधन के बर्खास्तगी आदेश की वैधता पर अपील के तौर पर विचार का अधिकार नहीं है।
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नियमों का प्रावधान
अदालत ने संबंधित नियमों का विस्तार से उल्लेख किया। रेगुलेशन 9.1 गैर-सरकारी कॉलेज के शासी निकाय को अधिकार देता है। यह पर्याप्त कारण होने पर स्थायी कर्मचारी की सेवा समाप्त कर सकता है। रेगुलेशन 10 के तहत कॉलेज को विश्वविद्यालय को सूचना देनी होती है। प्राचार्य या शिक्षक को बर्खास्त करने पर दो सप्ताह के भीतर कारण भेजने होते हैं।
हाईकोर्ट का निर्णय और कर्मचारी के विकल्प
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि इन प्रावधानों में अपील सुनने का अधिकार नहीं है। इसी आधार पर जस्टिस कुलदीप तिवारी ने पंजाब विश्वविद्यालय का आदेश रद्द किया। यह आदेश 16 जुलाई 2021 को जारी किया गया था। हालांकि, कर्मचारी को सेवा समाप्ति आदेश को चुनौती देने की स्वतंत्रता दी गई है। वह उचित वैधानिक उपाय अपना सकता है।