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Jind News: अंतरराष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी मोहित दलाल उर्फ चेतन का हार्ट अटैक से निधन
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जुलाना। नंदगढ़ गांव निवासी अंतरराष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी मोहित दलाल उर्फ चेतन (27) का बुधवार दोपहर हार्ट अटैक से निधन हो गया। 10 साल की उम्र से कबड्डी की शुरुआत करने वाले इस सितारे ने दुबई, कनाडा और इंग्लैंड तक पहचान बना ली थी। उनके निधन पर खिलाड़ियों- खेल प्रेमियों ने दुख जताया है।
सामान्य किसान परिवार के मोहित दो भाई में छोटे थे। अभी मोहित की शादी भी नहीं हुई थी। बड़े भाई दीपक ने बताया कि बुधवार दोपहर करीब 3 बजे वह घर पर ही थे। मोहित गांव के स्टेडियम में रोजाना की तरह प्रैक्टिस के लिए जाने वाला था। वह रोज 4 बजे निकलता था।
इसी दौरान अचानक उसके सीने में दर्द उठा। कुछ समझ पाते कि वह अचेत हो गया। डॉक्टर के यहां ले जाने के पहले ही घर पर ही उसकी मौत हो गई। शाम को गांव में ही उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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भाई के मुताबिक, मोहित को बचपन से ही कबड्डी का शौक था। 10 वर्ष की उम्र में उसने गांव के पूर्व पहलवान प्रकाश के मार्गदर्शन में स्टेडियम में प्रैक्टिस शुरू की थी। खेल के बूते वह हरियाणा और पंजाब के बड़े कबड्डी मैदानों तक खेला। शानदार रेडिंग के कारण कई बार बेस्ट रेडर का खिताब भी पाया।
देश ही नहीं, विदेशों में भी दिखाया दमखम
प्रतिभा और मेहनत के दम पर मोहित ने हरियाणा और पंजाब की कई बड़ी कबड्डी प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन किया था। पुरस्कार भी जीते थे। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दुबई, कनाडा और इंग्लैंड में भी जलवा दिखा चुके थे। उनके कोच व पूर्व पहलवान प्रकाश ने बताया कि मोहित 10 साल का था जब मेरे पास आया था। कबड्डी की बारीकियां सीखीं। फिर, रोहतक के शीलू बल्हारा समेत दूसरे खिलाड़ियों के साथ अभ्यास करके खेल को निखारा। उसका 27 साल की उम्र में गुजर जाना बेहद दुखद है। खेल और मेहनत के दम पर उसने जो छाप छोड़ी है, वह भुलाए नहीं भूलेगी।
चोट के बाद मैदान पर लौटने की कर रहे थे तैयारी
भाई दीपक ने बताया कि करीब छह महीने पहले मोहित को चोट लग गई थी। उसका ऑपरेशन भी हुआ था। वह स्वस्थ होकर दोबारा मैदान में लौटने के लिए गांव में ही अभ्यास करने लगे थे। उनके निधन से परिवार के साथ साथी खिलाड़ी भी सदमे में हैं।
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सामान्य किसान परिवार के मोहित दो भाई में छोटे थे। अभी मोहित की शादी भी नहीं हुई थी। बड़े भाई दीपक ने बताया कि बुधवार दोपहर करीब 3 बजे वह घर पर ही थे। मोहित गांव के स्टेडियम में रोजाना की तरह प्रैक्टिस के लिए जाने वाला था। वह रोज 4 बजे निकलता था।
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इसी दौरान अचानक उसके सीने में दर्द उठा। कुछ समझ पाते कि वह अचेत हो गया। डॉक्टर के यहां ले जाने के पहले ही घर पर ही उसकी मौत हो गई। शाम को गांव में ही उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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भाई के मुताबिक, मोहित को बचपन से ही कबड्डी का शौक था। 10 वर्ष की उम्र में उसने गांव के पूर्व पहलवान प्रकाश के मार्गदर्शन में स्टेडियम में प्रैक्टिस शुरू की थी। खेल के बूते वह हरियाणा और पंजाब के बड़े कबड्डी मैदानों तक खेला। शानदार रेडिंग के कारण कई बार बेस्ट रेडर का खिताब भी पाया।
देश ही नहीं, विदेशों में भी दिखाया दमखम
प्रतिभा और मेहनत के दम पर मोहित ने हरियाणा और पंजाब की कई बड़ी कबड्डी प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन किया था। पुरस्कार भी जीते थे। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दुबई, कनाडा और इंग्लैंड में भी जलवा दिखा चुके थे। उनके कोच व पूर्व पहलवान प्रकाश ने बताया कि मोहित 10 साल का था जब मेरे पास आया था। कबड्डी की बारीकियां सीखीं। फिर, रोहतक के शीलू बल्हारा समेत दूसरे खिलाड़ियों के साथ अभ्यास करके खेल को निखारा। उसका 27 साल की उम्र में गुजर जाना बेहद दुखद है। खेल और मेहनत के दम पर उसने जो छाप छोड़ी है, वह भुलाए नहीं भूलेगी।
चोट के बाद मैदान पर लौटने की कर रहे थे तैयारी
भाई दीपक ने बताया कि करीब छह महीने पहले मोहित को चोट लग गई थी। उसका ऑपरेशन भी हुआ था। वह स्वस्थ होकर दोबारा मैदान में लौटने के लिए गांव में ही अभ्यास करने लगे थे। उनके निधन से परिवार के साथ साथी खिलाड़ी भी सदमे में हैं।