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नेपाल में जलप्रलय, ग्राउंड रिपोर्ट: सैलाब ने छीन लीं सांसें और सपने, पल भर में उजड़ गई बस्ती और बाजार

Sun, 30 Aug 2026 03:30 AM IST
Vijay Singh Pundir राजन राय, अमर उजाला नेटवर्क, नुवाकोट गल्छी (नोपाल)
राजन राय, अमर उजाला नेटवर्क, नुवाकोट गल्छी (नोपाल) Published by: Vijay Singh Pundir Updated Sun, 30 Aug 2026 03:30 AM IST
सार
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नोवाकोट में बाढ़ अपने साथ सिर्फ सामान ही बचाकर नहीं ले गई बल्कि लोगों के सपने भी बह गए। कमरों में कीचड़ और मलबा भरा है। कहीं टूटी चारपाइयां पड़ी हैं तो कहीं बिखरे बर्तन और कपड़ों के बीच लोग अपने सामान को तलाश रहे हैं। 

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Nepal Flash Flood, Ground report from Nuwakot and Galchhi
Nepal Flash Flood - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नेपाल-तिब्बत सीमा से करीब 45 किमी दूर है नुवाकोट और इसके बाद गल्छी बाजार। कभी यह इलाका पयर्टन का एक अहम केंद्र था। जलप्रलय ने यहां की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। जिस बाजार में कभी लोगों की आवाजाही, दुकानों की रौनक और घरों में परिवारों की हंसी गूंजती थी, वहां अब चारों तरफ मलबा, कीचड़ और तबाही का मंजर है। किसी की दुकान बह गई, किसी का घर मलबे में दब गया। किसी मां की आंखें अपने बेटे को तलाश रही हैं तो किसी बच्चे के सामने अपने परिवार के बिछड़ने का सदमा है। बाढ़ का पानी उतर गया लेकिन लोगों के दिलों में जमा डर और दर्द अभी कम नहीं हुआ है।

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Nepal Flash Flood, Ground report from Nuwakot and Galchhi
Nepal Flood - फोटो : अमर उजाला

तिनका-तिनका जोड़कर लोगों ने जिस आशियाने को खड़ा किया वह पलक झपकते ही बाढ़ के आगोश में समा गया। गल्छी बाजार के रहने वाले कृष्ण प्रसाद अधिकारी बेहद भावुक नजर आए। अपनी बेटी को पानी लाकर देने के बाद कहते हैं कुछ खा लो...अब तो जाे होना था हो गया। कृष्ण प्रसाद ने बताया कि 26 अगस्त की सुबह सवा दस बजे के करीब पानी बड़ी तेजी से बढ़ा। कुछ समझ पाते कि बाढ़ का पानी रौद्र रूप लेकर बाजार की ओर बढ़ा लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। देखते ही देखते पानी दुकानों और मकानों में घुस गया। किसी तरह हम लोग सुरक्षित निकले। दुकान का सामान सब बह गया। घर में मलबा भर गया। तेज बहाव अपने साथ सामान, अनाज, कपड़े, बर्तन और रोजमर्रा की जरूरत की चीजें बहाकर ले गया। गांव से पांच लोग लापता हैं, बचे हैं या नहीं...कुछ पता नहीं लगा।

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Nepal Flash Flood, Ground report from Nuwakot and Galchhi
Nepal Flood - फोटो : अमर उजाला

यहीं के विकास श्रेष्ठ दर्द भरी दास्तान सुनाते हुए सुबकने लगते हैं। बोले, कर्ज लेकर दुकान में सामान भरा था। अपनी आंखों के सामने जमा-पूंजी को पानी में बहता देखते रह गए। पड़ोसी घर के एक युवक को बहते देखा पर कुछ न कर सके। लहरें इतनी तेज थीं कि कोई रास्ता नहीं था। इससे बड़ा दुभार्ग्य मेरे लिए क्या होगा?

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Nepal Flash Flood, Ground report from Nuwakot and Galchhi
Nepal Flood - फोटो : अमर उजाला

घरों में कुछ बचा ही नहीं...बस जिंदा हैं यादें
नोवाकोट में बाढ़ अपने साथ सिर्फ सामान ही बचाकर नहीं ले गई बल्कि लोगों के सपने भी बह गए। कमरों में कीचड़ और मलबा भरा है। कहीं टूटी चारपाइयां पड़ी हैं तो कहीं बिखरे बर्तन और कपड़ों के बीच लोग अपने सामान को तलाश रहे हैं। जिन घरों को बनाने में परिवारों ने वर्षों की कमाई लगा दी, वे कुछ ही घंटों में रहने लायक नहीं रह गए। यहां के सुर्दशन मलबे के बीच खड़े होकर अपने घर की ओर देखते हैं तो उनकी आंखें नम हो जाती हैं। उनके सामने वर्षों की मेहनत का घर अब पहचान में नहीं आ रहा। बच्चों के कपड़े, किताबें, बर्तन और घर का सामान सब कीचड़ में दब चुका है। सवाल एक ही है, अब जिंदगी दोबारा कहां से शुरू होगी?

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Nepal Flood - फोटो : अमर उजाला

रोजी-रोटी की चिंता...अपनों को गंवाने का गम
त्रासदी में लोगों ने अपनों को खो दिया। गल्छी बाजार में करीब 70 परिवार की बस्ती भी है। यहां रोजी-रोटी की चिंता है और अपनों को गंवाने का गम। अभी तक शव नहीं मिले। यहां के राखू बताते हैं, जब पानी तेज से बढ़ रहा था तो भतीजा सामान निकालने चला गया। उसे मना किया पर बोला, कुछ सामान तो निकाल लें। बहाव इतना तेज था कि सामान के साथ वह बह गया। अब वह कहां है, जिंदा है या नहीं, हमें कुछ पता नहीं। यह कहते हुए वे सुबकने लगे। बोले-अगर इस दुनिया में नहीं है, यह पता चल जाता तो हिंदू रीति रिवाज के अनुसार अंतिम संस्कार कर देते।

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Nepal Flood - फोटो : अमर उजाला

पानी उतरने के बाद असली तबाही सामने आई। लोग अपने घरों और दुकानों के आसपास जमा मलबा हटाने में जुटे हैं। कोई टूटा हुआ सामान निकाल रहा है तो कोई मलबे के नीचे दबे जरूरी कागजात और सामान को तलाश रहा है। चेहरों पर थकान है और आंखों में भविष्य को लेकर चिंता भी। रात होते ही प्रभावित परिवारों की चिंता और बढ़ जाती है। जिन घरों की छतें बची हैं, वे भी सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे। बच्चों को लेकर अभिभावक परेशान हैं। खाने-पीने की सामग्री, साफ पानी और सुरक्षित ठिकाने की जरूरत सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।

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Nepal Flood - फोटो : अमर उजाला

अब राहत के साथ पुनर्वास की दरकार
जल प्रलय के बाद प्रभावित इलाकों में तत्काल राहत के साथ लंबे समय तक चलने वाले पुनर्वास की जरूरत है। हालांकि, नगर पालिका की ओर से लोगों को भोजन, पानी, दवाइयों और सुरक्षित आश्रय की सुविधाएं मुहैया कराई गई है।

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Nepal Flood - फोटो : अमर उजाला

पुल टूटा तो रिश्ते, रोजगार और रोटी...सब हुए दूर
जलप्रलय के बाद उतराई त्रिशूली नदी का बहाव शनिवार को कुछ कम हो गया है। कई परिवार घरों की ओर लौटने लगे हैं पर आगे की राह आसान नहीं है। बाढ़ के पीछे छूटी तबाही ने जिंदगी को फिर एक नई मुश्किल में डाल दिया है। घरों में कीचड़ भरा है, सामान बह चुका है। जरेखेत बरगापुल, गजुरी, फुर्के खोला सहित 12 पुल बह गए हैं। इसके चलते रिश्ते, रोजगार और रोटी सब दूर हो गए हैं। जिंदगी की असली जंग अब शुरू हुई है और वह है दो जून की रोटी का जुगाड़।

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Nepal Flood - फोटो : अमर उजाला

कहीं चूल्हा नहीं है तो कहीं राशन नहीं है। बाढ़ के दौरान लोगों ने किसी तरह अपने परिवार और बच्चों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया। अब जब पानी कम हुआ है तो सामने भूख का संकट खड़ा दिख रहा है। गजुरी के एमनाथ भंडारी ने दर्द बयां करते हुए कहा कि बाढ़ के समय तो लगा था कि पानी उतरते ही सब ठीक हो जाएगा लेकिन पुल बह जाने से अब बाजार जाना भी मुश्किल है। घर में जो थोड़ा-बहुत अनाज था, वह खत्म होने के कगार पर है। बच्चों के लिए खाना जुटाना सबसे बड़ी चिंता है।

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Nepal Flood - फोटो : अमर उजाला

एक-दूसरे तक पहुंचना मुश्किल
पुल टूटने के कारण जरूरत पर एक-दूसरे तक पहुंचना भी मुश्किल हो गया है। बीमार और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी है। किसी को इलाज की जरूरत पड़ जाए तो उसे सुरक्षित तरीके से दूसरी तरफ ले जाना चुनौती बन गया है। कुबूत की सिनी मेहताना ने बताया कि घर में कुछ खाने को नहीं बचा है। झूले वाले पुल से आई हूं और केला खरीद कर ले जा रही हूं। सुना है कि नगर पालिका की ओर से राशन बंटने वाला है। मिल जाए तो घर का चूल्हा जल जाएगा। बड़े तो किसी तरह बर्दाश्त कर लेंगे पर बच्चों को क्या कहकर बहलाएं।

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Nepal Flood - फोटो : अमर उजाला

स्कूल कैसे जाएंगे, खाना कहां खाएंगे
बच्चे खाली घरों और टूटे रास्तों को देखकर सवाल कर रहे हैं कि अब स्कूल कैसे जाएंगे और खाना कहां से आएगा। महिलाओं के सामने परिवार के लिए भोजन जुटाने की चिंता है। बुजुर्गों को आने-जाने की चिंता सता रही है। दुकानदारों की दुकानें बंद हैं और रोज कमाकर खाने वाले लोगों के सामने रोजगार का संकट है।

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