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सीट का समीकरण: सपा के इस गढ़ में 30 साल पहले जीती थी भाजपा, इस बार अमरोहा किसे चुनेगी अपना 'महबूब'?
Fri, 21 Aug 2026 06:03 AM IST
अमन तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नोएडा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नोएडा
Published by: अमन तिवारी
Updated Fri, 21 Aug 2026 06:03 AM IST
अमरोहा विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के महबूब अली का लंबे समय से दबदबा रहा है। 2007 से 2022 तक वे लगातार चार चुनाव जीत चुके हैं। 2027 के चुनाव में भाजपा और अन्य दलों के सामने सपा के इस गढ़ को भेदना बड़ी चुनौती होगी।आइए जानते हैं इस सीट का पूरा चुनावी इतिहास...
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अमरोहा विधानसभा सीट का समीकरण
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव में अभी समय जरूर है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। जहां एक तरफ भाजपा के सामने सत्ता बचाने की चुनौती है, वहीं समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, बसपा और अन्य दल अपनी पकड़ मजबूत करने में जुट गए हैं। चुनावी सरगर्मी के बीच, हम आपको हमारी खास सीरीज 'सीट का समीकरण' में उत्तर प्रदेश की हर विधानसभा सीट के इतिहास, सामाजिक ताने-बाने और उसके राजनीतिक परिदृश्य के बारे में विस्तार से बता रहे हैं। इसी कड़ी में आज बात अमरोहा (Amroha) विधानसभा सीट की। आइए, जानते हैं इस सीट का पूरा सियासी गणित और इसका अब तक का इतिहास क्या रहा है।
पहले जानते हैं अमरोहा सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं, जिनमें कुल 403 विधानसभा सीटें हैं। इन्हीं में से एक जिला अमरोहा है। जिले में कुल चार विधानसभा सीटें हैं- धनौरा, नौगावां सादात, अमरोहा और हसनपुर। 'सीट का समीकरण' की आज कड़ी में हम अमरोहा विधानसभा सीट की बात करेंगे। 1951 के पहले विधानसभा चुनाव के समय अमरोहा (पूर्व) और अमरोहा (पश्चिम) नाम की दो विधानसभा सीटें थीं। अमरोहा (पूर्व) के पहले विधायक खियाली राम, तो वहीं अमरोहा (पश्चिम) के पहले विधायक मोहम्मद तकी हादी बने। इन दोनों ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए जीत हासिल की थी।
2022: पिछले चुनाव में कैसा रहा नतीजा?
2022 के विधानसभा चुनाव में अमरोहा सीट पर समाजवादी पार्टी (सपा) ने जीत दर्ज की थी। इस चुनाव में सपा के महबूब अली ने भाजपा के राम सिंह को हराया था। इस चुनाव में सपा के महबूब अली को 1,28,735 वोट मिले थे, जबकि भाजपा के राम सिंह को 57,699 वोटों से संतोष करना पड़ा। इस चुनाव में सपा के महबूब अली ने 70000 हजार से ज्यादा वोटों से जीत हासिल की। इससे पहले 2017, 2012 और 2007 में भी सपा उम्मीदवार महबूब अली ने इस सीट से जीत हासिल की थी। ये महबूब अली की लगातार पांचवी और सपा की लगातार चौथी जीत थी। भाजपा यहां आखिरी बार 30 साल पहले 1996 में जीती थी।
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पहले जानते हैं अमरोहा सीट के बारे में
उत्तर प्रदेश में कुल 75 जिले हैं, जिनमें कुल 403 विधानसभा सीटें हैं। इन्हीं में से एक जिला अमरोहा है। जिले में कुल चार विधानसभा सीटें हैं- धनौरा, नौगावां सादात, अमरोहा और हसनपुर। 'सीट का समीकरण' की आज कड़ी में हम अमरोहा विधानसभा सीट की बात करेंगे। 1951 के पहले विधानसभा चुनाव के समय अमरोहा (पूर्व) और अमरोहा (पश्चिम) नाम की दो विधानसभा सीटें थीं। अमरोहा (पूर्व) के पहले विधायक खियाली राम, तो वहीं अमरोहा (पश्चिम) के पहले विधायक मोहम्मद तकी हादी बने। इन दोनों ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए जीत हासिल की थी।
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2022: पिछले चुनाव में कैसा रहा नतीजा?
2022 के विधानसभा चुनाव में अमरोहा सीट पर समाजवादी पार्टी (सपा) ने जीत दर्ज की थी। इस चुनाव में सपा के महबूब अली ने भाजपा के राम सिंह को हराया था। इस चुनाव में सपा के महबूब अली को 1,28,735 वोट मिले थे, जबकि भाजपा के राम सिंह को 57,699 वोटों से संतोष करना पड़ा। इस चुनाव में सपा के महबूब अली ने 70000 हजार से ज्यादा वोटों से जीत हासिल की। इससे पहले 2017, 2012 और 2007 में भी सपा उम्मीदवार महबूब अली ने इस सीट से जीत हासिल की थी। ये महबूब अली की लगातार पांचवी और सपा की लगातार चौथी जीत थी। भाजपा यहां आखिरी बार 30 साल पहले 1996 में जीती थी।
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2022 का नतीजा
- फोटो : अमर उजाला
अमरोहा विधानसभा सीट का जातीय समीकरण
अमरोहा विधानसभा सीट के जातिगत समीकरण की बात करें तो कुल मतदाताओं में मुस्लिम, चौहान और अनुसूचित जाति (SC) आबादी सबसे निर्णायक भूमिका निभाती है। क्षेत्र में सर्वाधिक आबादी मुस्लिम मतदाताओं की है, जो लगभग 58% हैं। इसके बाद अनुसूचित जाति की हिस्सेदारी करीब 7%, सैनी मतदाताओं की करीब 5% और जाट मतदाताओं की करीब 4% है, जबकि गुर्जर व वैश्य मतदाता क्रमशः लगभग 3% और 2.5% हैं। वहीं, बाकी अन्य जातियों के मतदाता हैं। इस क्षेत्र में मुस्लिम मतदाता सबसे प्रभावशाली माने जाते हैं, क्योंकि उनकी संख्या अधिक है।
अमरोहा विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास
अमरोहा विधानसभा सीट के चुनावी इतिहास की बात करें तो शुरुआती समय में अमरोहा सीट पर कांग्रेस की पकड़ रही। 1952 के समय अमरोहा (पूर्व) और अमरोहा (पश्चिम) नाम की दो विधानसभा सीटें थीं। अमरोहा (पूर्व) के पहले विधायक खियाली राम, तो वहीं अमरोहा (पश्चिम) के पहले विधायक मोहम्मद तकी हादी बने। इन दोनों ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए जीत हासिल की थी।
1962 के चुनाव में अमरोहा विधानसभा सीट से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के शराफत हुसैन रिजवी विजयी हुए। उन्हें कुल 13,570 वोट मिले। उन्होंने भारतीय जनसंघ के उम्मीदवार शाहजादे लाल को पराजित किया, जिन्हें कुल 10,397 वोट मिले। शराफत हुसैन रिजवी ने यह चुनाव 3,173 मतों के अंतर से जीता।
अमरोहा विधानसभा सीट के जातिगत समीकरण की बात करें तो कुल मतदाताओं में मुस्लिम, चौहान और अनुसूचित जाति (SC) आबादी सबसे निर्णायक भूमिका निभाती है। क्षेत्र में सर्वाधिक आबादी मुस्लिम मतदाताओं की है, जो लगभग 58% हैं। इसके बाद अनुसूचित जाति की हिस्सेदारी करीब 7%, सैनी मतदाताओं की करीब 5% और जाट मतदाताओं की करीब 4% है, जबकि गुर्जर व वैश्य मतदाता क्रमशः लगभग 3% और 2.5% हैं। वहीं, बाकी अन्य जातियों के मतदाता हैं। इस क्षेत्र में मुस्लिम मतदाता सबसे प्रभावशाली माने जाते हैं, क्योंकि उनकी संख्या अधिक है।
अमरोहा विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास
अमरोहा विधानसभा सीट के चुनावी इतिहास की बात करें तो शुरुआती समय में अमरोहा सीट पर कांग्रेस की पकड़ रही। 1952 के समय अमरोहा (पूर्व) और अमरोहा (पश्चिम) नाम की दो विधानसभा सीटें थीं। अमरोहा (पूर्व) के पहले विधायक खियाली राम, तो वहीं अमरोहा (पश्चिम) के पहले विधायक मोहम्मद तकी हादी बने। इन दोनों ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए जीत हासिल की थी।
1962 के चुनाव में अमरोहा विधानसभा सीट से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के शराफत हुसैन रिजवी विजयी हुए। उन्हें कुल 13,570 वोट मिले। उन्होंने भारतीय जनसंघ के उम्मीदवार शाहजादे लाल को पराजित किया, जिन्हें कुल 10,397 वोट मिले। शराफत हुसैन रिजवी ने यह चुनाव 3,173 मतों के अंतर से जीता।
1967: लगातार दूसरी बार जीते शराफत हुसैन
इस चुनाव में अमरोहा विधानसभा सीट से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) CPI(M) के शराफत हुसैन विजयी हुए। उन्हें 25,497 वोट मिले। उन्होंने कांग्रेस की एस. डब्ल्यू. देवी को पराजित किया, जिन्हें 20,254 वोट मिले। शराफत हुसैन ने यह चुनाव 5,243 वोटों के अंतर से जीता।
1969 के विधानसभा चुनाव में अमरोहा विधानसभा सीट पर भारतीय क्रांति दल (बीकेडी) ने जीत दर्ज की थी। इन चुनावों में बीकेडी की सौभाग्यवती ने जीत हासिल की। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के मोहम्मद यासीन हाजी को 15,098 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में सौभाग्यवती को 35,339 वोट मिले, जबकि मोहम्मद यासीन हाजी को 20,241 वोट मिले।
1974: खत्म हुआ कांग्रेस का इंतजार
1974 के विधानसभा चुनाव में अमरोहा विधानसभा सीट से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के मोहम्मद हयात विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनसंघ (बीजेएस) के यशपाल को 8,640 वोटों के अंतर से हराया। इस चुनाव में कांग्रेस के मोहम्मद हयात को 22,934 वोट मिले, जबकि भारतीय जनसंघ के यशपाल को 14,294 वोट मिले। चुनाव में भारतीय क्रांति दल (बीकेडी) के लीलापत सिंह 13,242 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
आपातकाल का समय
1974 के चुनावों के बाद देश में आपातकाल लगा दिया गया, जो 21 महीनों तक चला। मार्च 1977 में आपातकाल हटा और आम चुनाव हुए। इन चुनावों में कांग्रेस की हार हुई और मोरारजी देसाई के नेतृत्व में पहली गैर-कांग्रेसी 'जनता पार्टी' की सरकार बनी। इसके बाद जनता पार्टी की नई केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि कांग्रेस पार्टी देश की जनता का विश्वास खो चुकी है। इस आधार पर केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश सहित कांग्रेस शासित 9 राज्यों की विधानसभाओं को समय से पहले भंग कर दिया और राष्ट्रपति शासन लगा दिया। इसके बाद राज्य में 1977 में दोबारा चुनाव हुए, जिसमें जनता पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला और राम नरेश यादव उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने। हालांकि यह सरकार भी ज्यादा दिनों तक सत्ता में नहीं रह सकी।
इस चुनाव में अमरोहा विधानसभा सीट से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) CPI(M) के शराफत हुसैन विजयी हुए। उन्हें 25,497 वोट मिले। उन्होंने कांग्रेस की एस. डब्ल्यू. देवी को पराजित किया, जिन्हें 20,254 वोट मिले। शराफत हुसैन ने यह चुनाव 5,243 वोटों के अंतर से जीता।
1969 के विधानसभा चुनाव में अमरोहा विधानसभा सीट पर भारतीय क्रांति दल (बीकेडी) ने जीत दर्ज की थी। इन चुनावों में बीकेडी की सौभाग्यवती ने जीत हासिल की। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के मोहम्मद यासीन हाजी को 15,098 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में सौभाग्यवती को 35,339 वोट मिले, जबकि मोहम्मद यासीन हाजी को 20,241 वोट मिले।
1974: खत्म हुआ कांग्रेस का इंतजार
1974 के विधानसभा चुनाव में अमरोहा विधानसभा सीट से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के मोहम्मद हयात विजयी हुए। उन्होंने भारतीय जनसंघ (बीजेएस) के यशपाल को 8,640 वोटों के अंतर से हराया। इस चुनाव में कांग्रेस के मोहम्मद हयात को 22,934 वोट मिले, जबकि भारतीय जनसंघ के यशपाल को 14,294 वोट मिले। चुनाव में भारतीय क्रांति दल (बीकेडी) के लीलापत सिंह 13,242 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
आपातकाल का समय
1974 के चुनावों के बाद देश में आपातकाल लगा दिया गया, जो 21 महीनों तक चला। मार्च 1977 में आपातकाल हटा और आम चुनाव हुए। इन चुनावों में कांग्रेस की हार हुई और मोरारजी देसाई के नेतृत्व में पहली गैर-कांग्रेसी 'जनता पार्टी' की सरकार बनी। इसके बाद जनता पार्टी की नई केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि कांग्रेस पार्टी देश की जनता का विश्वास खो चुकी है। इस आधार पर केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश सहित कांग्रेस शासित 9 राज्यों की विधानसभाओं को समय से पहले भंग कर दिया और राष्ट्रपति शासन लगा दिया। इसके बाद राज्य में 1977 में दोबारा चुनाव हुए, जिसमें जनता पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला और राम नरेश यादव उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने। हालांकि यह सरकार भी ज्यादा दिनों तक सत्ता में नहीं रह सकी।
इन पार्टियों को मिली एक से ज्यादा बार जीत
- फोटो : अमर उजाला
1977: जनता लहर में जीते लीलावत
1977 के विधानसभा चुनाव में अमरोहा विधानसभा सीट पर जनता पार्टी (जेएनपी) ने जीत दर्ज की थी। इन चुनावों में जनता पार्टी के लीलावत सिंह विजयी हुए। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के खुर्शीद अहमद को 5,467 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में लीलावत सिंह को 26,449 वोट मिले, जबकि खुर्शीद अहमद को 20,982 वोट मिले।
हालांकि उत्तर प्रदेश में 1977 के बाद 1980 में फिर से विधानसभा चुनाव हुए, क्योंकि केंद्र में जनता पार्टी की सरकार 1980 आते-आते अंदरूनी कलह के कारण बिखर गई। पार्टी के विघटन के बाद जनवरी 1980 में लोकसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में इंदिरा गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस ने प्रचंड बहुमत के साथ केंद्र की सत्ता में जोरदार वापसी की। सत्ता में आते ही इंदिरा सरकार ने तर्क दिया कि हालिया लोकसभा चुनावों में जनता पार्टी को राज्यों में बुरी तरह हार मिली है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य सरकारों ने जनता का विश्वास खो दिया है। इसके बाद उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों की विधानसभाओं को फिर भंग कर दिया गया।
विधानसभा भंग होने के बाद उत्तर प्रदेश में मई 1980 में दोबारा चुनाव कराए गए। इस चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारी बहुमत हासिल किया और विश्वनाथ प्रताप सिंह (वी.पी. सिंह) उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने।
1980: खुर्शीद अहमद को मिली जीत
1980 के विधानसभा चुनाव में अमरोहा विधानसभा सीट पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आई) ने जीत दर्ज की थी। इन चुनावों में कांग्रेस (आई) के खुर्शीद अहमद विजयी हुए। उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार यशपाल को 12,380 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में खुर्शीद अहमद को 26,715 वोट मिले, जबकि यशपाल को 14,335 वोट मिले। चुनाव में जनता पार्टी के लीलावत सिंह 11,191 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
1977 के विधानसभा चुनाव में अमरोहा विधानसभा सीट पर जनता पार्टी (जेएनपी) ने जीत दर्ज की थी। इन चुनावों में जनता पार्टी के लीलावत सिंह विजयी हुए। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के खुर्शीद अहमद को 5,467 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में लीलावत सिंह को 26,449 वोट मिले, जबकि खुर्शीद अहमद को 20,982 वोट मिले।
हालांकि उत्तर प्रदेश में 1977 के बाद 1980 में फिर से विधानसभा चुनाव हुए, क्योंकि केंद्र में जनता पार्टी की सरकार 1980 आते-आते अंदरूनी कलह के कारण बिखर गई। पार्टी के विघटन के बाद जनवरी 1980 में लोकसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में इंदिरा गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस ने प्रचंड बहुमत के साथ केंद्र की सत्ता में जोरदार वापसी की। सत्ता में आते ही इंदिरा सरकार ने तर्क दिया कि हालिया लोकसभा चुनावों में जनता पार्टी को राज्यों में बुरी तरह हार मिली है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य सरकारों ने जनता का विश्वास खो दिया है। इसके बाद उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों की विधानसभाओं को फिर भंग कर दिया गया।
विधानसभा भंग होने के बाद उत्तर प्रदेश में मई 1980 में दोबारा चुनाव कराए गए। इस चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारी बहुमत हासिल किया और विश्वनाथ प्रताप सिंह (वी.पी. सिंह) उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बने।
1980: खुर्शीद अहमद को मिली जीत
1980 के विधानसभा चुनाव में अमरोहा विधानसभा सीट पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आई) ने जीत दर्ज की थी। इन चुनावों में कांग्रेस (आई) के खुर्शीद अहमद विजयी हुए। उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार यशपाल को 12,380 वोटों के अंतर से हराया। चुनाव में खुर्शीद अहमद को 26,715 वोट मिले, जबकि यशपाल को 14,335 वोट मिले। चुनाव में जनता पार्टी के लीलावत सिंह 11,191 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
1985: 11 साल बाद फिर जीते हयात
1980 के बाद राज्य में 1985 में विधानसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में अमरोहा विधानसभा सीट पर लोकदल (एलकेडी) ने जीत दर्ज की थी। इस चुनाव में लोकदल के मोहम्मद हयात विजयी हुए। उन्हें कुल 18,514 वोट मिले। उन्होंने कांग्रेस की नसीम बेगम को महज 180 वोटों के बेहद करीबी अंतर से हराया। नसीम बेगम को 18,334 वोट मिले। चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार मंगल सिंह 12,438 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। हयात इससे पहले 1974 में भी यहां से जीते थे।
1989 में अमरोहा विधानसभा सीट पर जनता दल (जेडी) ने जीत दर्ज की। इस चुनाव में जनता दल के मोहम्मद हयात विजयी हुए। उन्हें 33,712 वोट मिले। उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार अफसर खान को 11,289 वोटों के अंतर से हराया। अफसर खान को 22,423 वोट मिले। इस तरह मोहम्मद हयात लगातार दूसरी बार अमरोहा विधानसभा सीट से विधायक निर्वाचित हुए।
1989 के बाद राजनीतिक अस्थिरता के कारण राज्य में 1991, 1993 और 1996 में चुनाव हुए। इन चुनावों में अमरोहा विधानसभा सीट का समीकरण भी बदलता रहा।
1991: भाजपा का अमरोहा में खुला खाता
1991 के चुनाव में इस सीट पर भाजपा ने जीत हासिल की। इस चुनाव में भाजपा के प्रताप सिंह ने जनता दल के मोहम्मद हयात को 14,716 वोटों के भारी अंतर से हराया। उस चुनाव में भाजपा के प्रताप सिंह को 44,923 वोट मिले, जबकि मोहम्मद हयात को 30,207 वोट मिले।
1980 के बाद राज्य में 1985 में विधानसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में अमरोहा विधानसभा सीट पर लोकदल (एलकेडी) ने जीत दर्ज की थी। इस चुनाव में लोकदल के मोहम्मद हयात विजयी हुए। उन्हें कुल 18,514 वोट मिले। उन्होंने कांग्रेस की नसीम बेगम को महज 180 वोटों के बेहद करीबी अंतर से हराया। नसीम बेगम को 18,334 वोट मिले। चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार मंगल सिंह 12,438 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। हयात इससे पहले 1974 में भी यहां से जीते थे।
1989 में अमरोहा विधानसभा सीट पर जनता दल (जेडी) ने जीत दर्ज की। इस चुनाव में जनता दल के मोहम्मद हयात विजयी हुए। उन्हें 33,712 वोट मिले। उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार अफसर खान को 11,289 वोटों के अंतर से हराया। अफसर खान को 22,423 वोट मिले। इस तरह मोहम्मद हयात लगातार दूसरी बार अमरोहा विधानसभा सीट से विधायक निर्वाचित हुए।
1989 के बाद राजनीतिक अस्थिरता के कारण राज्य में 1991, 1993 और 1996 में चुनाव हुए। इन चुनावों में अमरोहा विधानसभा सीट का समीकरण भी बदलता रहा।
1991: भाजपा का अमरोहा में खुला खाता
1991 के चुनाव में इस सीट पर भाजपा ने जीत हासिल की। इस चुनाव में भाजपा के प्रताप सिंह ने जनता दल के मोहम्मद हयात को 14,716 वोटों के भारी अंतर से हराया। उस चुनाव में भाजपा के प्रताप सिंह को 44,923 वोट मिले, जबकि मोहम्मद हयात को 30,207 वोट मिले।
इन चेहरों को मिली एक से ज्यादा बार जीत
- फोटो : अमर उजाला
1993: चौथी बार जीते मोहम्मद हयात
1993 के चुनाव में अमरोहा विधानसभा सीट से जनता दल के हाजी मोहम्मद हयात विजयी हुए। चुनाव में उन्हें कुल 52,175 वोट मिले। उन्होंने भाजपा के मंगल सिंह सैनी को पराजित किया, जिन्हें 49,579 वोट मिले। मोहम्मद हयात ने यह चुनाव महज 2,596 वोटों के अंतर से जीता। इस चुनाव में सपा के इसरत अली 16,392 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे।
1996: दूसरी बार जीती भाजपा
1996 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अमरोहा विधानसभा सीट से भाजपा के मंगल सिंह विजयी हुए। चुनाव में उन्हें कुल 67,526 वोट मिले। उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) के उम्मीदवार महबूब अली को हराया, जिन्हें कुल 66,618 वोट मिले। मंगल सिंह ने यह चुनाव महज 908 वोटों के अंतर से जीता।
2002: महबूब अली के दबदबे की शुरुआत
1996 के बाद राज्य में 2002 में विधानसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में अमरोहा विधानसभा सीट पर राष्ट्रीय परिवर्तन दल (आरपीडी) ने जीत दर्ज की। इस चुनाव में महबूब अली विजयी हुए। उन्हें 59,314 वोट मिले। उन्होंने राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के डॉ. हरि सिंह ढिल्लों को 9,272 वोटों के अंतर से हराया। डॉ. हरि सिंह ढिल्लों को 50,042 वोट मिले। चुनाव में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के खुर्शीद अनवर 13,507 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
महबूब अली और सपा का गढ़ बनी अमरोहा
2007, 2012, 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों की बात करें तो अमरोहा विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी (सपा) का दबदबा रहा। इन चारों चुनावों में सपा के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए महबूब अली लगातार चार बार विधायक चुने गए।
1993 के चुनाव में अमरोहा विधानसभा सीट से जनता दल के हाजी मोहम्मद हयात विजयी हुए। चुनाव में उन्हें कुल 52,175 वोट मिले। उन्होंने भाजपा के मंगल सिंह सैनी को पराजित किया, जिन्हें 49,579 वोट मिले। मोहम्मद हयात ने यह चुनाव महज 2,596 वोटों के अंतर से जीता। इस चुनाव में सपा के इसरत अली 16,392 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे।
1996: दूसरी बार जीती भाजपा
1996 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अमरोहा विधानसभा सीट से भाजपा के मंगल सिंह विजयी हुए। चुनाव में उन्हें कुल 67,526 वोट मिले। उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) के उम्मीदवार महबूब अली को हराया, जिन्हें कुल 66,618 वोट मिले। मंगल सिंह ने यह चुनाव महज 908 वोटों के अंतर से जीता।
2002: महबूब अली के दबदबे की शुरुआत
1996 के बाद राज्य में 2002 में विधानसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में अमरोहा विधानसभा सीट पर राष्ट्रीय परिवर्तन दल (आरपीडी) ने जीत दर्ज की। इस चुनाव में महबूब अली विजयी हुए। उन्हें 59,314 वोट मिले। उन्होंने राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के डॉ. हरि सिंह ढिल्लों को 9,272 वोटों के अंतर से हराया। डॉ. हरि सिंह ढिल्लों को 50,042 वोट मिले। चुनाव में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के खुर्शीद अनवर 13,507 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
महबूब अली और सपा का गढ़ बनी अमरोहा
2007, 2012, 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों की बात करें तो अमरोहा विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी (सपा) का दबदबा रहा। इन चारों चुनावों में सपा के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए महबूब अली लगातार चार बार विधायक चुने गए।