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शिक्षक दिवस: जहां से शुरू हुई थी जिंदगी की जंग, वहीं से निकली कामयाबी की राह; कोई शिक्षक बना तो कोई अकाउंटेंट

Sat, 05 Sep 2026 11:22 AM IST
शाहीन परवीन सोनम प्रतिहस्त
सोनम प्रतिहस्त Published by: शाहीन परवीन Updated Sat, 05 Sep 2026 11:22 AM IST
सार
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शिक्षक दिवस पर उन विद्यार्थियों की कहानी, जिन्होंने मुश्किल हालात के बावजूद शिक्षा के जरिए अपनी जिंदगी बदली। समिति से जुड़े कई बच्चे आज शिक्षक, सेंटर हेड और अकाउंटेंट बनकर दूसरों का भविष्य संवार रहे हैं।

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Teachers’ Day 2026: From a Child Found Near a Garbage Bin to Building a Brighter Future
शिक्षक दिवस - फोटो : AI

विस्तार

शिक्षक दिवस पर उन शिक्षकों और संस्थाओं की कहानियां सामने आती हैं, जो शिक्षा के जरिये विद्यार्थियों की जिंदगी बदलने में जुटे हैं। पुनर्जागरण समिति की शुरुआत भी एक ऐसे ही प्रयास से हुई। वर्ष 2012 में कनॉट प्लेस स्थित शिवाजी स्टेडियम के पास बस का इंतजार करते समय बाबूलाल सिंह ने एक बच्चे को कूड़ेदान से खाना निकालकर खाते देखा।

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इस दृश्य ने उन्हें झकझोर दिया। उन्होंने जरूरतमंद बच्चों के लिए काम करने का फैसला लिया। एक बच्चे को पढ़ाने से शुरू हुआ यह सफर आज छह राज्यों में 74 केंद्रों तक पहुंच चुका है, जहां करीब 6530 विद्यार्थी और लाभार्थी जुड़े हैं।

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Teachers’ Day 2026: From a Child Found Near a Garbage Bin to Building a Brighter Future
संजय - फोटो : अमर उजाला

केंद्र से जुड़े, बढ़ा आत्मविश्वास

बांदा के संजय प्रयागराज से स्नातक के बाद सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए दिल्ली आए थे। अंग्रेजी कमजोर होने के कारण उन्हें परेशानी होती थी। समिति के अंग्रेजी बोलचाल केंद्र से जुड़ने के बाद उनका आत्मविश्वास बढ़ा। बाद में उन्होंने इसी केंद्र में बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। आज वह दिल्ली सरकार के विद्यालय में शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं।

पढ़ाने पर समझ आई जिम्मेदारी

आदित्य ने आरके पुरम के बाल संस्कार केंद्र से पढ़ाई शुरू की। आर्थिक परेशानियों के बावजूद उन्होंने दसवीं और बारहवीं की पढ़ाई पूरी कर स्नातक किया। बच्चों को पढ़ाने के दौरान उनमें आत्मविश्वास, जिम्मेदारी और नेतृत्व क्षमता विकसित हुई। आज वह एक निजी कंपनी में अकाउंटेंट के पद पर कार्यरत हैं।

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सामाजिक मुद्दे पर करतीं हैं बात

शिक्षिका आरती कानूंगो पिछले 24 वर्षों से शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वह दिल्ली सरकार के सर्वोदय कन्या विद्यालय में अंग्रेजी भाषा शिक्षिका हैं। कक्षा से बाहर भी वह विद्यार्थियों के साथ विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर काम करती हैं। उनके कार्यों के लिए उन्हें राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार समेत कई सम्मान मिले हैं। वर्ष 2026 में उन्हें आर्ट ऑफ लिविंग की ओर से श्री श्री पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।

संस्थान से सीखा अनुशासन

शुभम सिंह ने भी अपनी शिक्षा की शुरुआत पुनर्जागरण समिति के बांदा केंद्र से की थी। संस्था से उन्हें अनुशासन, आत्मविश्वास, नेतृत्व और सामाजिक जिम्मेदारी की सीख मिली। मेहनत और लगन से आगे बढ़ते हुए आज शुभम समिति में सेंटर हेड की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। 

रटाने नहीं, समझाने पर जोर

रोहिणी सेक्टर-15 स्थित राजकीय सहशिक्षा विद्यालय के पीजीटी अंग्रेजी शिक्षक जय राम भी अभिनव तरीके से बच्चों को पढ़ाने पर जोर देते हैं। उन्होंने करीब 22 वर्षों तक टीजीटी प्राकृतिक विज्ञान के रूप में अध्यापन किया है। अंग्रेजी पढ़ाते हुए उनका जोर केवल भाषा पर नहीं, बल्कि बच्चों में आलोचनात्मक सोच, समस्या समाधान की क्षमता विकसित करने पर रहता है।

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