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दिल्ली: आईटीओ में 17.5 एकड़ में बनेगा नया सचिवालय, भूमिगत पार्किंग से लेकर एसटीपी तक होगी ये सुविधाएं
Wed, 26 Aug 2026 10:01 AM IST
Vijay Singh Pundir
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: Vijay Singh Pundir
Updated Wed, 26 Aug 2026 10:01 AM IST
पीडब्ल्यूडी के मुताबिक, परियोजना के लिए चिन्हित जमीन करीब 17.5 एकड़ यानी 72,700 वर्गमीटर है। यहां मौजूदा सरकारी परिसरों और कार्यालय भवनों को ध्यान में रखते हुए नए परिसर की योजना तैयार की जाएगी।
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सीएम रेखा गुप्ता
- फोटो : @gupta_rekha (सोशल मीडिया)
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विस्तार
दिल्ली सरकार आईटीओ में 17.5 एकड़ जमीन पर नया सचिवालय परिसर विकसित करने की तैयारी में है। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने इसके मास्टर प्लान, वास्तु डिजाइन, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) और निर्माण के लिए कंसल्टेंट नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रस्तावित परिसर में हाईराइज इमारतें बनाई जाएंगी। परियोजना के तहत दिल्ली सरकार के विभिन्न विभागों के लिए सचिवालय परिसर के साथ अन्य कार्यालय भवन भी विकसित किए जाएंगे।
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पीडब्ल्यूडी के मुताबिक, परियोजना के लिए चिन्हित जमीन करीब 17.5 एकड़ यानी 72,700 वर्गमीटर है। यहां मौजूदा सरकारी परिसरों और कार्यालय भवनों को ध्यान में रखते हुए नए परिसर की योजना तैयार की जाएगी। इंद्रप्रस्थ मार्ग के दोनों तरफ वर्तमान में विकास भवन-1, डूसिब भवन, सेंट्रल रेवेन्यू बिल्डिंग, एमएसओ भवन, पीडब्ल्यूडी मुख्यालय, जीएसटी भवन और पार्किंग जैसी सुविधाएं मौजूद हैं। इनमें सेंट्रल रेवेन्यू बिल्डिंग केंद्र सरकार की संपत्ति है, जबकि बाकी संपत्तियां दिल्ली सरकार की हैं। नए परिसर की हाईराइज इमारतों के डिजाइन में बेस आइसोलेशन तकनीक को शामिल किया जाएगा।
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कंसल्टेंट को कम से कम 35 मीटर ऊंची ऐसी इमारत की डिजाइन का अनुभव होना भी अनिवार्य किया गया है। इसी तरह समान परियोजनाओं के लिए कम से कम 45 मीटर ऊंची इमारत वाले बड़े कार्यालय या संस्थागत परिसर का अनुभव मांगा गया है।
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भूमिगत पार्किंग से लेकर एसटीपी तक
पीडब्ल्यूडी ने कंसल्टेंट के लिए 160 दिन की समयसीमा तय की है। इस अवधि में डीपीआर और निर्माण के लिए ईपीसी मोड-1 के तहत दस्तावेज तैयार करने होंगे। इसके बाद ईपीसी ठेकेदार की ओर से तैयार किए जाने वाले विस्तृत वास्तु चित्रों की जांच के लिए 30 दिन का अतिरिक्त समय दिया गया है। परिसर में केवल कार्यालय भवन ही नहीं होंगे। योजना में भूमिगत पार्किंग, सड़क, जलापूर्ति, सीवर, वर्षाजल संचयन, एसटीपी, हरित क्षेत्र, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य बाहरी सेवाएं भी शामिल हैं। मेट्रो, रेल, सड़क, बिजली, पानी और सीवर जैसी मौजूदा सेवाओं के साथ नए परिसर की सेवाओं को जोड़ने की योजना भी तैयार की जाएगी।