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ग्राउंड रिपोर्ट: आम लोगों को नसीहत पर सरकारी परियोजनाओं को छूट, निर्माण स्थल पर धूल नियंत्रण के इंतजाम नाकाफी
Fri, 06 Nov 2026 09:20 AM IST
अनुज कुमार
ज्योति सिंह, अमर उजाला, नई दिल्ली
ज्योति सिंह, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अनुज कुमार
Updated Fri, 06 Nov 2026 09:20 AM IST
दिल्ली में ग्रेप-2 लागू होने के बाद भी सरकारी परियोजनाएं प्रदूषण फैला रही हैं। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय विस्टा जैसे निर्माण स्थलों से धूल उड़ रही है, जो सरकारी एजेंसियों की लापरवाही दर्शाती है।
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इंडिया गेट पर धुंध
- फोटो : ANI
विस्तार
हवा खराब होते ही दिल्ली-एनसीआर में बेशक ग्रेप-2 लागू है, निर्माण स्थलों की निगरानी बढ़ाने, धूल रोकने और नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई के निर्देश भी हैं, लेकिन इन निर्देशों का पालन कराने की जिम्मेदारी जिन सरकारी एजेंसियों पर है, उनकी अपनी परियोजनाओं की तस्वीर कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। इंडिया गेट और कर्तव्य पथ के आसपास केंद्रीय विस्टा परियोजना के निर्माण स्थल से उठती धूल लोगों की सांसों में घुल रही है। अमर उजाला की ग्राउंड रिपोर्ट में यहां विकास की रफ्तार तो दिखाई दी, लेकिन प्रदूषण रोकने के इंतजाम इसके साथ कदमताल करते नजर नहीं आए।
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कर्तव्य पथ पर धूल का पहरा
इंडिया गेट की बाउंड्री के ठीक बगल में पहुंचते ही सबसे पहले मिट्टी और सीमेंट के खुले ढेर नजर आते हैं। निर्माण स्थल पर धूल को उड़ने से रोकने के लिए पर्याप्त इंतजाम दिखाई नहीं देते। हवा चलने के साथ निर्माण स्थल की धूल आसपास फैलती है और सड़कों तक पहुंच जाती है। इसका असर सड़क किनारे बनी हरियाली पर भी साफ दिखता है। इंडिया गेट के पार्क को घेरने वाली हरियाली पर धूल की मोटी परत जम गई है। इससे उनकी हरियाली पीली पड़ती नजर आती है। यह इलाका वीआईपी है, इसलिए यहां समय-समय पर पानी का छिड़काव जरूर होता है। लेकिन इसका असर भी सीमित दिखाई देता है। सड़क के बीच का हिस्सा पानी पड़ने से साफ हो जाता है, जबकि दोनों किनारों पर मिट्टी की परत बनी रहती है। जैसे ही वाहन गुजरते हैं, पहियों के साथ धूल दोबारा हवा में उड़ने लगती है। नतीजा यह है कि सड़क पर चलने वाले लोगों और पर्यटकों को धूल और धुंध के बीच से गुजरना पड़ता है।
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हरी चादर की आड़ में धूल का खेल
निर्माण स्थल के चारों ओर हरे रंग का कपड़ा लगाकर घेराबंदी की गई है। पहली नजर में यह प्रदूषण नियंत्रण के इंतजाम जैसा दिखाई देता है, लेकिन करीब से देखने पर इसकी हकीकत सामने आ जाती है। कपड़ा बेहद पतला और पारदर्शी है। कई जगह से यह बीच में हट चुका है। ऐसे में निर्माण स्थल से उठने वाली धूल को रोकने में यह घेराबंदी कितनी कारगर होगी, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
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धूल में गुम हो रही पर्यटकों की तस्वीरें
इंडिया गेट दिल्ली के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है। रोजाना बड़ी संख्या में लोग यहां घूमने और यादगार तस्वीरें लेने पहुंचते हैं लेकिन इन दिनों आसपास फैली धूल और धुंध के कारण पर्यटकों को भी परेशानी हो रही है। दूरदराज से इंडिया गेट देखने आए लोग जब कैमरे में इसकी तस्वीर कैद करने की कोशिश करते हैं, तो साफ तस्वीर के बजाय स्मॉग का असर दिखाई देता है। जिस स्मारक की खूबसूरती देखने लोग आते हैं, उसके आसपास का वातावरण ही उनकी तस्वीरों को धुंधला कर रहा है। इंडिया गेट घूमने आए समीर कहते हैं कि केंद्रीय विस्टा का निर्माण विकास से जुड़ी परियोजना है, लेकिन विकास के नाम पर आसपास के लोगों और राहगीरों को धूल झेलनी पड़ रही है। जब सरकार खुद प्रदूषण नियंत्रण के लिए नियम और निर्देश जारी कर रही है, तो उसकी अपनी परियोजनाओं में भी उनका सख्ती से पालन होना चाहिए। वहीं, अपनी सवारी लेने आए कैब संचालक रवि का कहना है कि दिल्ली में प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में सरकार को अपनी परियोजनाओं के निर्माण कार्य कुछ महीनों के लिए रोकने पर विचार करना चाहिए।