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Delhi Lakshmi Yojana: लक्ष्मी योजना में MP-MLA की सिफारिश अनिवार्य क्यों? दिल्ली HC सख्त, जानें और क्या कहा

Mon, 24 Aug 2026 09:02 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: अनुज कुमार Updated Mon, 24 Aug 2026 09:02 PM IST
सार
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Delhi Lakshmi Yojana Update: दिल्ली लक्ष्मी योजना में सांसद-विधायक की सिफारिश की अनिवार्यता पर हाईकोर्ट सख्त नजर आया। कोर्ट ने पूर्व कांग्रेस पार्षद अभिषेक दत्त और वर्तमान पार्षद वेदपाल सिंह चौधरी द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सरकार से जवाब मांगा है।

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Delhi High Court gets tough on Lakshmi Yojana seeks written response from rekha govt
दिल्ली हाईकोर्ट ने लक्ष्मी योजना पर सरकार से मांगा जवाब - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को भाजपा के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार से ‘दिल्ली लक्ष्मी योजना’ के तहत महिलाओं को 2,500 रुपये मासिक सहायता देने के लिए स्थानीय सांसद या विधायक की अनुशंसा अनिवार्य करने के पीछे के तर्क को स्पष्ट करने को कहा है। न्यायालय ने पूछा कि इस अनिवार्य शर्त के माध्यम से सरकार क्या उद्देश्य हासिल करना चाहती है।

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मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने कहा कि यदि यह शर्त आवेदकों के लिए उपलब्ध विकल्पों में से एक होती, तो ठीक था, लेकिन समस्या यह है कि यह एकमात्र विकल्प है। पीठ ने कहा, नीति या योजना बिना किसी तर्क के मनमानी है। न्यायालय ने इस मामले में पूर्व कांग्रेस पार्षद अभिषेक दत्त और वर्तमान पार्षद वेदपाल सिंह चौधरी की जनहित याचिका (पीआईएल) पर दिल्ली सरकार को 10 दिनों के भीतर एक संक्षिप्त हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।

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राज्य के जनहितकारी अधिकार को बना रहे राजनीतिक संरक्षण का साधन
याचिका में कहा गया है कि योजना के तहत स्थानीय सांसद या विधायक की अनिवार्य अनुशंसा निर्वाचित प्रतिनिधियों को असीमित विवेकाधिकार प्रदान करती है और राज्य के कल्याणकारी अधिकार को राजनीतिक संरक्षण का साधन बनाती है। याचिका में यह भी कहा गया कि इस अनुशंसा को जारी करने के लिए न तो कोई समय-सीमा निर्धारित है और न ही अनुशंसा न मिलने पर कोई शिकायत निवारण तंत्र मौजूद है । इससे पहले पीठ ने अवलोकन दिया था कि पात्रता का निर्धारण आय प्रमाण पत्र और निवास प्रमाण जैसे दस्तावेजों के माध्यम से किया जा सकता है। मामले की अगली सुनवाई 17 अक्टूबर को होगी।
 

याचिकाकर्ता बोले- यह शर्त शोषण का कारण बनेगी
याचिकाकर्ता और आयानगर से पार्षद वेद पाल शीतल चौधरी ने कहा कि हम दिल्ली में पहले भी राशन कार्ड के नाम पर शोषण और वसूली जैसी घटनाएं देख चुके हैं। ऐसे में यह शर्त राजनीतिक दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं के जरिए महिलाओं के सम्मान पर चोट पहुंचेगी। राज्य की किसी लोक हितकारी योजना को राजनीतिक दलों के संरक्षण की जरूरत नहीं होनी चाहिए। अदालत ने भी हमारी बात को स्वीकार करते हुए कहा है कि इसे इस रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता है।

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यह है योजना की पात्रता
‘दिल्ली लक्ष्मी योजना’ के तहत 21 से 60 वर्ष की आयु वाली ऐसी महिलाएं पात्र हैं, जिनके परिवार की वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये तक है। योजना के तहत सरकारी कर्मचारी, आयकरदाता, चार पहिया वाहन के मालिक, तीन से अधिक जीवित बच्चों वाले परिवार, या जिनके परिवार का कोई सदस्य सरकारी सेवा में है, वे पात्र नहीं होंगे।
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