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छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का फैसला: लंबे समय तक अलग रहने से नहीं मिलेगा तलाक, पति को आरोपों के ठोस सबूत देने जरूरी

Sun, 18 Oct 2026 11:06 AM IST
आशुतोष प्रताप सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला,बिलासपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,बिलासपुर Published by: आशुतोष प्रताप सिंह Updated Sun, 18 Oct 2026 11:06 AM IST
सार
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छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने वैवाहिक विवाद से जुड़े एक मामले में स्पष्ट किया है कि पति-पत्नी का लंबे समय तक अलग रहना अपने आप में तलाक का पर्याप्त कानूनी आधार नहीं है।

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chhattisgarh high court divorce ruling long separation not ground for divorce
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पति-पत्नी का लंबे समय तक अलग रहना अपने आप में तलाक का पर्याप्त कानूनी आधार नहीं है। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने वैवाहिक विवाद से जुड़े एक मामले में यह स्पष्ट करते हुए पति की अपील खारिज कर दी है। अदालत ने पारिवारिक न्यायालय के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें पति की विवाह-विच्छेद याचिका निरस्त कर दी गई थी। हाई कोर्ट ने कहा कि तलाक के लिए कानून में निर्धारित आधारों, जैसे क्रूरता या परित्याग, को ठोस साक्ष्यों के जरिए साबित करना जरूरी है। केवल लंबे समय तक अलग रहने या वैवाहिक संबंधों में दरार आने से विवाह-विच्छेद की अनुमति नहीं दी जा सकती।

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पति मानसिक प्रताड़ना और परित्याग के आरोप साबित नहीं कर सका

न्यायमूर्ति पार्थ प्रतीम साहू और न्यायमूर्ति सुषमा सावंत की खंडपीठ ने राजनांदगांव निवासी रोहित रजक की ओर से दायर अपील पर सुनवाई करते हुए यह निर्णय दिया। अदालत ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद पाया कि पति अपनी पत्नी के खिलाफ मानसिक प्रताड़ना और परित्याग के आरोपों को साबित करने में नाकाम रहा। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल लंबे समय तक पति-पत्नी का अलग रहना या वैवाहिक संबंधों का टूट जाना तलाक देने के लिए पर्याप्त नहीं है। विवाह-विच्छेद के लिए संबंधित कानूनी आधारों को प्रमाणित करना आवश्यक है। अदालत ने इसी आधार पर पारिवारिक न्यायालय के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

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18 जून 1998 को हुई थी शादी, पत्नी के मायके जाने का किया था दावा

मामले के अनुसार, रोहित रजक और संतोषी रजक का विवाह 18 जून 1998 को भिलाई में हुआ था। पति ने अदालत में दावा किया था कि उसकी पत्नी 25 अक्तूबर 2010 को सरकारी आवास छोड़कर अपने मायके चली गई थी। उसने आरोप लगाया कि पत्नी जाते समय नकदी, जेवर और दो भूखंडों से जुड़े दस्तावेज भी अपने साथ ले गई थी। पति ने पत्नी पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और उस पर दूसरी शादी करने के बेबुनियाद आरोप लगाने का भी दावा किया था। इन्हीं आरोपों के आधार पर उसने विवाह-विच्छेद की मांग की थी।

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पत्नी ने कहा- बांझ कहकर प्रताड़ित करते थे पति

वहीं, पत्नी संतोषी रजक ने पति के आरोपों का विरोध करते हुए अपना पक्ष रखा। उसने कहा कि पति उसे बांझ कहकर प्रताड़ित करता था और उसी ने उसे घर से बाहर निकाला था। पत्नी ने यह भी आरोप लगाया कि पति भरण-पोषण की राशि देने से बचने के उद्देश्य से तलाक लेना चाहता है। इस तरह दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे पर आरोप लगाए गए, लेकिन अदालत ने फैसला उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी आधारों के परीक्षण के बाद सुनाया।

पत्नी को वापस लाने के प्रयासों का भी नहीं मिला ठोस प्रमाण

हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि पति ने स्वयं स्वीकार किया था कि शादी के शुरुआती 10 से 12 वर्षों तक दोनों के बीच किसी तरह का विवाद नहीं था। इसके अलावा, वह यह स्पष्ट नहीं कर सका कि उसकी पत्नी अचानक मायके क्यों चली गई थी। अदालत के सामने ऐसा कोई ठोस प्रमाण भी पेश नहीं किया गया, जिससे यह साबित हो सके कि पति ने पत्नी को वापस लाने के लिए गंभीर प्रयास किए थे। इसी तरह, पत्नी पर नकदी, जेवर और दो भूखंडों के दस्तावेज अपने साथ ले जाने के आरोपों के समर्थन में भी मजबूत साक्ष्य नहीं मिले।

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