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कैबिनेट के फैसले: गन्ना और कपास किसानों को बड़ी सौगात, दो नई सेमीकंडक्टर इकाइयों को मंजूरी

Tue, 05 May 2026 07:05 PM IST
Kumar Vivek बिजनेस न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Kumar Vivek Updated Tue, 05 May 2026 07:05 PM IST
सार
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केंद्र सरकार ने विमानन, एमएसएमई, कृषि और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को बड़ा बूस्टर डोज देते हुए कई अहम फैसलों को मंजूरी दी है। गन्ने के नए लाभकारी मूल्य, कपास मिशन और आपातकालीन ऋण से जुड़ी पूरी न्यूज स्टोरी पढ़ें और जानें इसके आर्थिक मायने।

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Cabinet Decisions: Cabinet approves Rs 18,100-crore emergency credit guarantee scheme for aviation
कैबिनेट के फैसले - फोटो : amarujala.com

विस्तार

भारतीय अर्थव्यवस्था को नई गति देने और प्रमुख औद्योगिक व कृषि क्षेत्रों को मजबूती प्रदान करने के उद्देश्य से, केंद्र सरकार ने कई महत्वपूर्ण आर्थिक फैसलों पर मुहर लगाई है। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट की बैठक के बाद इन महत्वपूर्ण फैसलों की जानकारी दी। इन फैसलों में मुख्य रूप से विमानन क्षेत्र, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई), कृषि नीतियां और समुद्री बुनियादी ढांचा (इंफ्रास्ट्रक्चर) शामिल हैं, जो देश के समग्र विकास और रोजगार सृजन को रफ्तार देने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

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1.52 लाख करोड़ रुपये के खर्च को मंजूरी

केंद्र सरकार की कैबिनेट ने हालिया बैठक में कई अहम फैसलों को मंजूरी दी है, जिन पर कुल लगभग 1.52 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। कपास उत्पादन बढ़ाने के लिए ‘कपास कांती मिशन’ पर 5,659 करोड़ रुपये खर्च होंगे, वहीं 2026-27 सीजन के लिए गन्ने के उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) से जुड़ा फैसला भी लिया गया है। आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिए ECLGS-5 योजना पर 18,100 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

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इंफ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर वडिनार में शिप रिपेयर सुविधा (1,570 करोड़ रुपये) और कई रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी मिली है, जिनमें नागदा-मथुरा, गुंटकल-वाडी और बुरहवाल-सीतापुर रेल लाइनों के विस्तार पर हजारों करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके अलावा सेमीकंडक्टर सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए क्रिस्टल मैट्रिक्स लिमिटेड और सुची सेमिकॉन प्राइवेट लिमिटेड की यूनिट्स पर भी निवेश किया जाएगा। वहीं सुप्रीम कोर्ट को मजबूत करने से जुड़ा एक नीतिगत निर्णय भी शामिल है। इन फैसलों से कृषि, उद्योग और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में व्यापक असर देखने को मिल सकता है।

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'कपास क्रांति' से बदलेगी 32 लाख किसानों की किस्मत

देश के 32 लाख कपास किसानों को सीधा फायदा पहुंचाने के लिए कैबिनेट ने 'कपास क्रांति' नाम से एक ऐतिहासिक पहल को मंजूरी दी है। मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, भारत वर्तमान में 297 लाख गांठ उत्पादन के साथ दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कपास उत्पादक देश है। हालांकि, 2030-31 तक कपास की यह मांग बढ़कर 450 लाख गांठ तक पहुंचने का अनुमान है। 


इस बढ़ती मांग को पूरा करने और क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए सरकार ने 5,669 करोड़ रुपये की एक विस्तृत परियोजना को मंजूरी दी है। यह फंड मुख्य रूप से अनुसंधान, उत्पादन तकनीकों को बढ़ाने और किसानों को नए जमाने के फाइबर अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने पर खर्च किया जाएगा।

सेमीकंडक्टर यूनिट्स और वडीनार में जहाज मरम्मत सुविधा

तकनीकी और समुद्री इंफ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर भी सरकार ने बड़े कदम उठाए हैं। कैबिनेट ने 3,936 करोड़ रुपये की कुल परियोजना लागत के साथ 'क्रिस्टल' और 'सूचि' नामक दो नई सेमीकंडक्टर इकाइयों को स्थापित करने की मंजूरी दी है। 

इसके साथ ही, समुद्री बुनियादी ढांचे को विश्वस्तरीय बनाने के लिए गुजरात के वडीनार  में एक नई जहाज मरम्मत सुविधा स्थापित करने का भी फैसला लिया गया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार इसके लिए 1,570 करोड़ रुपये का परिव्यय निर्धारित किया गया है, जो भारत की समुद्री मरम्मत क्षमताओं को और मजबूत करेगा।

पश्चिम एशिया के तनाव के बीच आपातकालीन ऋण योजना

भू-राजनीतिक उथल-पुथल का संज्ञान लेते हुए सरकार ने घरेलू उद्योगों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने का भी निर्णय लिया है। अश्विनी वैष्णव ने बताया कि पश्चिम एशिया में चल रहे मौजूदा संघर्ष के मद्देनजर एक महत्वपूर्ण 'आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना' को स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। इससे वैश्विक संकट के समय में उद्योगों को नकदी की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा और उनका संचालन सुचारू रूप से चलता रहेगा।

सेक्टर के अनुसार प्रभाव

  • कृषि (कपास): 5,669 करोड़ रुपये के निवेश से उत्पादन तकनीक और अनुसंधान में वृद्धि होगी, जिससे भारत 2030-31 तक 450 लाख गांठ कपास की मांग पूरी करने में सक्षम होगा।
  • तकनीक (सेमीकंडक्टर): 3,936 करोड़ रुपये से बनने वाले 'क्रिस्टल' और 'सूचि' प्रोजेक्ट्स से भारत सेमीकंडक्टर हब बनने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ेगा।
  • समुद्री इंफ्रास्ट्रक्चर: वडीनार में जहाज मरम्मत सुविधा से भारत के बंदरगाहों की क्षमता बढ़ेगी और विदेशी डॉकयार्ड पर निर्भरता कम होगी।

सरकार के ये रणनीतिक फैसले कृषि, तकनीक और इंफ्रास्ट्रक्चर में आत्मनिर्भरता  हासिल करने की एक स्पष्ट दिशा तय करते हैं। 'कपास क्रांति' के जरिए किसानों की आय बढ़ाने से लेकर सेमीकंडक्टर मिशन और वडीनार इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट तक, ये कदम न केवल भविष्य की घरेलू मांग को पूरा करेंगे, बल्कि वैश्विक पटल पर भारत को एक मजबूत और प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था के रूप में भी स्थापित करेंगे।

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