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सस्ता होगा इंडक्शन: चूल्हा सब्सिडी की तैयारी में सरकार, किस राष्ट्रीय योजना की पहल, प्रस्ताव में क्या खास?
Tue, 25 Aug 2026 04:49 AM IST
द बोनस
द बोनस डेस्क, नई दिल्ली।
द बोनस डेस्क, नई दिल्ली।
Published by: द बोनस
Updated Tue, 25 Aug 2026 04:49 AM IST
ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के बीच केंद्र सरकार एलपीजी सिलिंडरों पर 34 करोड़ उपभोक्ताओं की निर्भरता घटाने के लिए इंडक्शन चूल्हे पर सबि्सडी देने की तैयारी में है। आयातित कुकिंग गैस पर निर्भरता को लेकर नए सिरे से पैदा चिंता के बीच उठाया गया है।
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इंडक्शन को लेकर सरकार का बड़ा अपडेट
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में लगातार अस्थिरता के बीच केंद्र सरकार रसोई गैस के भारी-भरकम आयात और बढ़ते सब्सिडी बोझ से निपटने के लिए बड़ा नीतिगत कदम उठाने जा रही है। एलपीजी सिलेंडरों पर देश के 34 करोड़ उपभोक्ताओं की निर्भरता घटाने के लिए इलेक्ट्रिक इंडक्शन चूल्हे को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय योजना की तैयारी चल रही है। इसके तहत इंडक्शन चूल्हों पर प्रत्यक्ष सब्सिडी, प्रमुख उपकरणों पर आयात शुल्क में कटौती और बिजली वितरण नेटवर्क के बुनियादी ढांचे को उन्नत बनाने का प्रस्ताव है।
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सूत्रों के मुताबिक, सरकार का यह कदम पश्चिम एशिया संघर्ष के बाद आयातित कुकिंग गैस पर भारत की निर्भरता को लेकर नए सिरे से पैदा हुई चिंताओं के बीच उठाया गया है। भारत तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा आयातक है। देश की कुल 3.3 करोड़ टन की वार्षिक मांग का लगभग 65 फीसदी हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा किया जाता है, जिसमें से करीब 90 फीसदी आपूर्ति पश्चिम एशिया से आती है।
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नीति आयोग, विद्युत मंत्रालय, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, डीपीआईआईटी और बिजली कंपनियों के बीच हाल ही में हुई बैठक में इस बदलाव को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी है। योजना के हितधारकों के साथ विचार-विमर्श अभी शुरुआती चरण में है।
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1 लाख करोड़ का सब्सिडी बोझ
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में आई तेजी ने केंद्र सरकार और तेल विपणन कंपनियों के वित्तीय गणित को पूरी तरह बिगाड़ दिया है। पीएल कैपिटल की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर अंडर-रिकवरी लगभग 490 रुपये प्रति सिलेंडर पर पहुंच गया है। वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में पेट्रोलियम/एलपीजी सब्सिडी के लिए लगभग 30,000 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया था। मौजूदा दरों पर यह खर्च एक लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर सकता है, जिससे राजकोषीय घाटे पर अतिरिक्त दबाव बन रहा है।
इंडक्शन का खर्च एलपीजी से एक-तिहाई कम
नीति निर्माता इंडक्शन चूल्हे को 34 करोड़ उपभोक्ताओं के लिए वैश्विक एलपीजी आपूर्ति व्यवधानों के जोखिम को कम करने के एक प्रभावी साधन के रूप में देख रहे हैं। आकलनों के अनुसार, पारंपरिक एलपीजी चूल्हे के मुकाबले इंडक्शन चूल्हे पर खाना पकाना लगभग एक-तिहाई (33 फीसदी) सस्ता पड़ता है।