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बिहार टेंडर घोटाले में ईडी का शिकंजा: आईएएस धर्मेंद्र कुमार से पूछताछ; इन अफसरों से भी हुए सवाल-जवाब
Wed, 28 Oct 2026 03:00 PM IST
तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
Updated Wed, 28 Oct 2026 03:00 PM IST
बिहार में टेंडर घोटाले से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जांच तेज कर दी है। आईएएस अधिकारी धर्मेंद्र कुमार बुधवार को पटना स्थित ईडी कार्यालय पहुंचे, जहां टेंडर प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और आरोपी रिशु श्री से संबंधों को लेकर उनसे पूछताछ की जा रही है।
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ED ने कसा शिकंजा।
विस्तार
टेंडर घोटाले से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने जांच तेज कर दी है। भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी धर्मेंद्र कुमार बुधवार को बिहार की राजधानी स्थित प्रवर्तन निदेशालय के कार्यालय पहुंचे। एजेंसी के अधिकारियों ने टेंडर प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और आरोपी रिशु श्री से संबंधों के बाबत उनसे सवाल-जवाब की प्रक्रिया शुरू की। धर्मेंद्र कुमार से पहले सोमवार को भारतीय प्रशासनिक सेवा की अधिकारी अभिलाषा कुमारी शर्मा और मंगलवार को अधिकारी सुनील यादव से पूछताछ हुई थी। जांच टीम ने सुनील यादव से लगभग सात घंटे तीस मिनट तक पूछताछ की थी।
अधिकारियों को समन और अदालत का रुख
प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में राज्य के छह वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को समन जारी किया था। इनमें आनंद किशोर, संतोष कुमार मल्ल, धर्मेंद्र कुमार, योगेश कुमार सागर, अभिलाषा कुमारी शर्मा और सुनील यादव के नाम शामिल हैं। योगेश कुमार ने एजेंसी से अगले सप्ताह उपस्थित होने के लिए समय मांगा है, जबकि आनंद किशोर सहित अन्य अधिकारियों को 30 अक्तूबर तक अपना पक्ष रखने का निर्देश मिला था।
मामले ने उस समय नया मोड़ लिया जब आरोपी रिशु श्री की जमानत याचिका विशेष निगरानी अदालत से खारिज होने के बाद उच्च न्यायालय पहुंची। उच्च न्यायालय ने 15 अक्तूबर को सुनवाई के दौरान कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि रिशु श्री इस पूरे मामले में महज छोटा मोहरा है। अदालत ने वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ अब तक की गई कार्रवाई पर सवाल उठाए थे। इस टिप्पणी के उपरांत ही केंद्रीय जांच एजेंसी ने वरिष्ठ अधिकारियों को समन भेजकर कार्रवाई को गति दी।
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निविदा प्रक्रिया और अवैध लेन-देन
मूल रूप से सारण जिले का निवासी रिशु श्री वरिष्ठ अधिकारी संजीव हंस तथा अन्य अधिकारियों से जुड़े भ्रष्टाचार और धन शोधन मामले में प्रमुख आरोपी है। विशेष निगरानी इकाई ने उसके विरुद्ध मामला दर्ज किया था। जांच एजेंसी के अनुसार आरोपी सरकारी तंत्र के अधिकारियों को अनुचित लाभ पहुंचाकर निविदा जारी होने से पूर्व ही शर्तों की गोपनीय जानकारी हासिल कर लेता था।
वह अधिकारियों की मिलीभगत से टेंडर के नियमों में अपनी सुविधानुसार बदलाव करवाता था और अपने पसंदीदा ठेकेदारों को काम आवंटित कराता था। इस अवैध प्रक्रिया के बदले मिलने वाले कमीशन का बड़ा हिस्सा संबंधित अधिकारियों तक पहुंचने का संदेह है। यही नहीं, अपनी योजनाओं को सुचारु रूप से चलाने के लिए वह मनपसंद अधिकारियों की तैनाती करवाने की कोशिश भी करता था। जांच में मुमुक्षु चौधरी के बयान का भी उल्लेख है, जिसके अनुसार सीतामढ़ी में नगर आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार दिलाने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को 25 लाख रुपये दिए गए थे।
विदेश यात्राएं और संपत्तियों का ब्योरा
प्रवर्तन निदेशालय बुडको के तत्कालीन प्रबंध निदेशक योगेश कुमार सागर, अभिलाषा कुमारी शर्मा और बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन लिमिटेड के तत्कालीन प्रबंध निदेशक धर्मेंद्र कुमार की विदेश यात्राओं की पड़ताल कर रहा है। आरोप है कि रिशु श्री ने योगेश कुमार सागर के परिवार के छह सदस्यों की जून. 2024 की ऑस्ट्रिया यात्रा का व्यय वहन किया था। इसके अतिरिक्त अभिलाषा कुमारी शर्मा और उनके परिजनों की विदेश यात्रा पर लगभग 19 लाख रुपये खर्च किए जाने के प्रमाण मिले हैं।
ये भी पढ़ें- Bihar MLC Result LIVE: पटना शिक्षक निर्वाचन सीट पर जीते राजद के संजीव कुमार सिंह, मतगणना के दौरान हुआ हंगामा
जांच टीम इन वित्तीय लेन-देन, विदेश यात्राओं और रिशु श्री से जुड़ी संस्थाओं को आवंटित हुए सरकारी ठेकों के बीच सीधे संबंधों को खंगाल रही है। मामले में 265.73 करोड़ रुपये की संपत्ति भी जांच के दायरे में है। इससे पूर्व 10 सितंबर 2025 को एजेंसी ने पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर सूचित किया था कि आरोपी जांच से बचने के लिए फर्जी चिकित्सकीय प्रमाण पत्र लगा रहा है तथा तकनीकी माध्यमों से अधिकारियों को आत्महत्या की धमकी दे रहा है।
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अधिकारियों को समन और अदालत का रुख
प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में राज्य के छह वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को समन जारी किया था। इनमें आनंद किशोर, संतोष कुमार मल्ल, धर्मेंद्र कुमार, योगेश कुमार सागर, अभिलाषा कुमारी शर्मा और सुनील यादव के नाम शामिल हैं। योगेश कुमार ने एजेंसी से अगले सप्ताह उपस्थित होने के लिए समय मांगा है, जबकि आनंद किशोर सहित अन्य अधिकारियों को 30 अक्तूबर तक अपना पक्ष रखने का निर्देश मिला था।
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मामले ने उस समय नया मोड़ लिया जब आरोपी रिशु श्री की जमानत याचिका विशेष निगरानी अदालत से खारिज होने के बाद उच्च न्यायालय पहुंची। उच्च न्यायालय ने 15 अक्तूबर को सुनवाई के दौरान कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि रिशु श्री इस पूरे मामले में महज छोटा मोहरा है। अदालत ने वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ अब तक की गई कार्रवाई पर सवाल उठाए थे। इस टिप्पणी के उपरांत ही केंद्रीय जांच एजेंसी ने वरिष्ठ अधिकारियों को समन भेजकर कार्रवाई को गति दी।
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निविदा प्रक्रिया और अवैध लेन-देन
मूल रूप से सारण जिले का निवासी रिशु श्री वरिष्ठ अधिकारी संजीव हंस तथा अन्य अधिकारियों से जुड़े भ्रष्टाचार और धन शोधन मामले में प्रमुख आरोपी है। विशेष निगरानी इकाई ने उसके विरुद्ध मामला दर्ज किया था। जांच एजेंसी के अनुसार आरोपी सरकारी तंत्र के अधिकारियों को अनुचित लाभ पहुंचाकर निविदा जारी होने से पूर्व ही शर्तों की गोपनीय जानकारी हासिल कर लेता था।
वह अधिकारियों की मिलीभगत से टेंडर के नियमों में अपनी सुविधानुसार बदलाव करवाता था और अपने पसंदीदा ठेकेदारों को काम आवंटित कराता था। इस अवैध प्रक्रिया के बदले मिलने वाले कमीशन का बड़ा हिस्सा संबंधित अधिकारियों तक पहुंचने का संदेह है। यही नहीं, अपनी योजनाओं को सुचारु रूप से चलाने के लिए वह मनपसंद अधिकारियों की तैनाती करवाने की कोशिश भी करता था। जांच में मुमुक्षु चौधरी के बयान का भी उल्लेख है, जिसके अनुसार सीतामढ़ी में नगर आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार दिलाने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को 25 लाख रुपये दिए गए थे।
विदेश यात्राएं और संपत्तियों का ब्योरा
प्रवर्तन निदेशालय बुडको के तत्कालीन प्रबंध निदेशक योगेश कुमार सागर, अभिलाषा कुमारी शर्मा और बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन लिमिटेड के तत्कालीन प्रबंध निदेशक धर्मेंद्र कुमार की विदेश यात्राओं की पड़ताल कर रहा है। आरोप है कि रिशु श्री ने योगेश कुमार सागर के परिवार के छह सदस्यों की जून. 2024 की ऑस्ट्रिया यात्रा का व्यय वहन किया था। इसके अतिरिक्त अभिलाषा कुमारी शर्मा और उनके परिजनों की विदेश यात्रा पर लगभग 19 लाख रुपये खर्च किए जाने के प्रमाण मिले हैं।
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जांच टीम इन वित्तीय लेन-देन, विदेश यात्राओं और रिशु श्री से जुड़ी संस्थाओं को आवंटित हुए सरकारी ठेकों के बीच सीधे संबंधों को खंगाल रही है। मामले में 265.73 करोड़ रुपये की संपत्ति भी जांच के दायरे में है। इससे पूर्व 10 सितंबर 2025 को एजेंसी ने पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर सूचित किया था कि आरोपी जांच से बचने के लिए फर्जी चिकित्सकीय प्रमाण पत्र लगा रहा है तथा तकनीकी माध्यमों से अधिकारियों को आत्महत्या की धमकी दे रहा है।