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Diesel Cars Fuel Efficiency: क्यों डीजल कारें पेट्रोल वाहनों से ज्यादा माइलेज देती हैं, जानें क्या है खासियत
Fri, 07 Nov 2025 03:57 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Fri, 07 Nov 2025 03:57 PM IST
क्या आपको पता है डीजल पेट्रोल से अधिक कुशल क्यों है? यानि डीजल कारें पेट्रोल वाहनों से ज्यादा माइलेज कैसे देती हैं? यहां जानें इसकी पूरी डिटेल्स।
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Car Driving
- फोटो : FREEPIK
विस्तार
भारत के बदलते ऑटोमोबाइल बाजार में, जहां एक तरफ इलेक्ट्रिक गाड़ियां तेजी से बढ़ रही हैं और पेट्रोल कारें अब भी लोकप्रिय हैं, वहीं डीजल इंजन अपनी खास पहचान बनाए हुए हैं। सख्त नियमों और नए विकल्पों के बावजूद, बहुत से ड्राइवर अब भी डीजल कारों को पसंद करते हैं, क्योंकि इनका माइलेज सबसे बेहतरीन होता है।
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डीजल का एनर्जी पावर
डीजल और पेट्रोल के बीच असली फर्क इनके रासायनिक स्वरूप में है। डीजल ज्यादा घना होता है और उसमें पेट्रोल से लगभग 10-15 प्रतिशत ज्यादा ऊर्जा होती है। यानी हर लीटर डीजल में ज्यादा पावर छिपी होती है। यही वजह है कि डीजल इंजन कम ईंधन में ज्यादा किलोमीटर तय कर लेते हैं।
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डीजल और पेट्रोल के बीच असली फर्क इनके रासायनिक स्वरूप में है। डीजल ज्यादा घना होता है और उसमें पेट्रोल से लगभग 10-15 प्रतिशत ज्यादा ऊर्जा होती है। यानी हर लीटर डीजल में ज्यादा पावर छिपी होती है। यही वजह है कि डीजल इंजन कम ईंधन में ज्यादा किलोमीटर तय कर लेते हैं।
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इंजन की खास बनावट
डीजल इंजन की दूसरी बड़ी ताकत इसकी मैकेनिकल डिजाइन में है। पेट्रोल इंजन में ईंधन को जलाने के लिए स्पार्क प्लग का इस्तेमाल होता है, जबकि डीजल इंजन ईंधन को दबाव और गर्मी से जलाता है। इसी वजह से डीजल इंजन का "कंप्रेशन रेशियो" बहुत ज्यादा होता है, जो कि 14:1 से 25:1 तक होता है। जबकि पेट्रोल इंजन में यह सिर्फ 9:1 से 12:1 तक होता है।
इस ज्यादा दबाव से ईंधन पूरी तरह जलता है और ज्यादा ऊर्जा निकलती है, जिससे इंजन की थर्मल एफिशिएंसी बेहतर होती है। साथ ही, डीजल इंजन में "पंपिंग लॉस" नहीं होता, जो पेट्रोल इंजन में हवा को नियंत्रित करने से होता है। इसका मतलब है कि डीजल इंजन लंबी दूरी या स्थिर रफ्तार पर ज्यादा माइलेज देते हैं।
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डीजल इंजन की दूसरी बड़ी ताकत इसकी मैकेनिकल डिजाइन में है। पेट्रोल इंजन में ईंधन को जलाने के लिए स्पार्क प्लग का इस्तेमाल होता है, जबकि डीजल इंजन ईंधन को दबाव और गर्मी से जलाता है। इसी वजह से डीजल इंजन का "कंप्रेशन रेशियो" बहुत ज्यादा होता है, जो कि 14:1 से 25:1 तक होता है। जबकि पेट्रोल इंजन में यह सिर्फ 9:1 से 12:1 तक होता है।
इस ज्यादा दबाव से ईंधन पूरी तरह जलता है और ज्यादा ऊर्जा निकलती है, जिससे इंजन की थर्मल एफिशिएंसी बेहतर होती है। साथ ही, डीजल इंजन में "पंपिंग लॉस" नहीं होता, जो पेट्रोल इंजन में हवा को नियंत्रित करने से होता है। इसका मतलब है कि डीजल इंजन लंबी दूरी या स्थिर रफ्तार पर ज्यादा माइलेज देते हैं।
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टॉर्क और ड्राइविंग का फर्क
डीजल इंजन का एक और फायदा है उसका टॉर्क यानी खींचने की ताकत। ये इंजन कम आरपीएम पर ही ज्यादा टॉर्क देते हैं, जिससे गियर जल्दी बदले जा सकते हैं और इंजन पर ज्यादा जोर नहीं पड़ता। इसका असर यह होता है कि जहां एक ओर ईंधन की बचत होती, वहीं दूसरी ओर स्मूद ड्राइविंग मिलती है। यही वजह है कि हाईवे या लंबी यात्राओं में डीजल कारें ज्यादा लोकप्रिय हैं।
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डीजल इंजन का एक और फायदा है उसका टॉर्क यानी खींचने की ताकत। ये इंजन कम आरपीएम पर ही ज्यादा टॉर्क देते हैं, जिससे गियर जल्दी बदले जा सकते हैं और इंजन पर ज्यादा जोर नहीं पड़ता। इसका असर यह होता है कि जहां एक ओर ईंधन की बचत होती, वहीं दूसरी ओर स्मूद ड्राइविंग मिलती है। यही वजह है कि हाईवे या लंबी यात्राओं में डीजल कारें ज्यादा लोकप्रिय हैं।
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डीजल इंजन की मांग
सीधी बात ये है कि डीजल में ज्यादा ऊर्जा होती है और इसका इंजन उसे बेहतर ढंग से इस्तेमाल करता है। इसी वजह से डीजल कारें कम खर्च में ज्यादा दूरी तय करती हैं। भले ही अब हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक गाड़ियां मार्केट में बढ़ रही हों। लेकिन जो लोग माइलेज और बचत को अहमियत देते हैं, उनके लिए डीजल अब भी पहली पसंद है।
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सीधी बात ये है कि डीजल में ज्यादा ऊर्जा होती है और इसका इंजन उसे बेहतर ढंग से इस्तेमाल करता है। इसी वजह से डीजल कारें कम खर्च में ज्यादा दूरी तय करती हैं। भले ही अब हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक गाड़ियां मार्केट में बढ़ रही हों। लेकिन जो लोग माइलेज और बचत को अहमियत देते हैं, उनके लिए डीजल अब भी पहली पसंद है।
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