यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की शुक्रवार को अपनी पहली आधिकारिक यात्रा पर सर्बिया पहुंचे। सर्बिया उन चुनिंदा यूरोपीय देशों में शामिल है, जिनके रूस के साथ अब भी दोस्ताना संबंध हैं, जबकि रूस ने 2022 में यूक्रेन पर हमला किया था।
जेलेंस्की के मुताबिक, दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को विस्तार देने, यूरोपीय संघ के साथ संबंधों और उन क्षेत्रों पर चर्चा होगी, जहां दोनों देशों के लोगों के हित में व्यावहारिक अवसर तलाशे जा सकते हैं। इसके अलावा सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी बातचीत का हिस्सा होंगे।
जेलेंस्की की यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब वुसिच रूस के साथ सर्बिया के पारंपरिक संबंधों और यूरोपीय संघ के साथ अपनी विदेश नीति को करीब लाने के दबाव के बीच संतुलन साधने की कोशिश कर रहे हैं। वुसिच ने यूक्रेन के मुद्दे पर रूस के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों में शामिल होने से इनकार किया है। उन्होंने इसके लिए दोनों स्लाव देशों के बीच ऐतिहासिक संबंधों का हवाला दिया है।
सर्बिया यूरोपीय संघ में शामिल होने की प्रक्रिया में है, लेकिन मॉस्को के प्रति बेलग्रेड की नीतियों के कारण यह प्रक्रिया आंशिक रूप से अटकी हुई है। सर्बिया अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए लगभग पूरी तरह रूस पर निर्भर है। हालांकि बेलग्रेड ने रूस पर प्रतिबंध लगाने से इनकार किया है, लेकिन उसने यूक्रेन को सहायता दी है और हाल के समय में कीव के साथ संपर्क भी बढ़ाया है।
यात्रा से पहले वुसिच ने कहा था कि वह और जेलेंस्की विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग तथा दोनों देशों के यूरोपीय संघ में शामिल होने की राह पर चर्चा करेंगे। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि सर्बिया रूस पर प्रतिबंधों को लेकर अपना रुख बदलने का इरादा नहीं रखता। वुसिच ने शुक्रवार को कहा कि प्रतिबंधों के मामले में सर्बिया ने अपनी नीति तय कर ली है। उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल देश का रुख नहीं बदला है और आगे भी यही बना रहेगा।
जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन हमेशा रचनात्मक तरीके से, आपसी लाभ और एक-दूसरे के सम्मान के आधार पर काम करने के लिए तैयार है। रूस को 2022 में यूक्रेन पर हमला शुरू करने के बाद से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निंदा और प्रतिबंधों का सामना करना पड़ रहा है। बेलग्रेड की स्वतंत्र समाचार एजेंसी फोनेट के वरिष्ठ संपादक जॉर्जे व्लाजिक का मानना है कि वुसिच और जेलेंस्की दोनों बेलग्रेड यात्रा से राजनीतिक लाभ हासिल करना चाहते हैं।
व्लाजिक के अनुसार, जेलेंस्की रूस को यह संदेश देना चाहते हैं कि वह बाल्कन में उसके प्रमुख सहयोगियों के साथ संबंध बढ़ा रहे हैं। वहीं वुसिच यूरोपीय संघ के साथ संबंधों को बनाए रखना चाहते हैं और ब्रसेल्स को यह संकेत देना चाहते हैं कि युद्ध के मुद्दे पर वह यूरोपीय संघ के रुख के करीब हैं।
सर्बिया को चेतावनी दी गई है कि मॉस्को के साथ उसके संबंधों और वुसिच के शासन में लोकतांत्रिक स्थिति में गिरावट के कारण उसे यूरोपीय संघ के फंड तक पहुंच गंवानी पड़ सकती है और उसकी सदस्यता प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाएगी। वुसिच को नवंबर 2024 में एक रेलवे स्टेशन पर हुई घटना में 16 लोगों की मौत के बाद एक साल से युवाओं के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों का सामना करना पड़ रहा है।
रूस के यूक्रेन पर हमले की शुरुआत के बाद से वुसिच और जेलेंस्की कई बार मुलाकात कर चुके हैं। वुसिच यूक्रेन के समर्थन और रूसी आक्रामकता के खिलाफ यूरोपीय सहयोग मजबूत करने से जुड़े शिखर सम्मेलनों में शामिल होने के लिए दो बार यूक्रेन भी गए। हालांकि, दोनों ही मौकों पर उन्होंने मॉस्को के खिलाफ कड़े प्रतिबंधों की मांग करने वाली संयुक्त घोषणा पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था।