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होमवर्क, लंच और बस: हर काम का अलग ऐप; अमेरिकी स्कूलों में डिजिटल जाल से माता-पिता बेहाल

Fri, 18 Sep 2026 04:57 AM IST
राकेश कुमार एजेंसी, मियामी/शिकागो/न्यूयॉर्क।

सार

अमेरिकी के-12 स्कूलों में पढ़ाई और अभिभावकों से संवाद के लिए डिजिटल ऐप्स की संख्या तेजी से बढ़ी है। औसतन एक स्कूल डिस्ट्रिक्ट के पास 3,000 से अधिक डिजिटल टूल्स और ऐप्स का एक्सेस है। होमवर्क, ग्रेड, बस ट्रैकिंग, खेल, चैट और लंच भुगतान के लिए अलग-अलग ऐप होने से माता-पिता को कई पासवर्ड और लगातार नोटिफिकेशन संभालने पड़ रहे हैं। स्कूलों में एआई आधारित ईमेल और बच्चों की गतिविधियों की डिजिटल निगरानी भी बढ़ी है।
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अमेरिकी के-12 स्कूलों में पढ़ाई और अभिभावकों से संवाद के लिए डिजिटल ऐप्स की संख्या तेजी से बढ़ी - फोटो : @अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
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स्कूल से मिला परमिशन स्लिप खो जाने का डर खत्म हो चुका है, डायरी में टीचर का नोट छूट जाने की चिंता भी नहीं रही। लेकिन इसकी जगह जिस डिजिटल सहूलियत ने ली है, उसने अमेरिकी अभिभावकों के दिमाग की नसें तान दी हैं। किंडरगार्टन और दूसरी कक्षा में पढ़ने वाले दो बच्चों की मां एली डोमिनिकिस बताती हैं कि उनके फोन में स्कूल के लिए ऐप्स का पूरा जंगल खड़ा हो चुका है। व्यवहार और संवाद के लिए क्लास डोजो, ग्रेड और होमवर्क के लिए स्कूल पोर्टल, लंच पेमेंट के लिए अलग ऐप, बस ट्रैकिंग का अलग टूल और ऊपर से सामान्य ईमेल्स। इसके बाद शुरू होते हैं व्हाट्सऐप ग्रुप्स।
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हर क्लास का ऑफिशियल ग्रुप, फुटबॉल टीम का अलग ग्रुप, मांओं का अनऑफिशियल ग्रुप और फिर उस ग्रुप का एक और सब-ग्रुप जिसमें उस एक महिला को नहीं रखा जाता जिसे कोई पसंद नहीं करता। डोमिनिकिस कहती है-एक संदेश आता है कि स्कूल में बच्चों के सिर में जुएं फैल गई हैं, और दूसरा संदेश आता है कि फैंसी ड्रेस बुधवार के लिए अजीब टोपी पहनकर आएं, ये दोनों नोटिफिकेशन मेरे नर्वस सिस्टम को ठीक एक जैसा झटका देते हैं। हालत यह है कि डिजिटल सूचनाओं के इस भारी दबाव में उन्हें पैनिक अटैक तक आ चुका है। 

याद करने पड़ते हैं दर्जनों पासवर्ड, माता-पिता बन गए हैं स्कूली सॉफ्टवेयर मैनेजर
एडटेक कंपनी इंस्ट्रक्चर के अनुसार, अमेरिका के के-12 स्कूल डिस्ट्रिक्ट्स के पास औसतन 3,000 से अधिक डिजिटल टूल्स और ऐप्स का एक्सेस है। हर नया शैक्षणिक सत्र आते ही माता-पिता को पुराने दर्जनों पासवर्ड याद करने और 4-5 नए ऐप्स डाउनलोड करने का सिरदर्द झेलना पड़ता है।
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ऐप्स पर क्या हो रहा ?
  • होमवर्क और असाइनमेंट, गूगल क्लासरूम या रिमाइंड।
  • ग्रेडबुक और परीक्षा स्कोर एस्पेन या स्कूल डिस्ट्रिक्ट पोर्टल।
  • स्कूल बस की लाइव लोकेशन  अलग जीपीएस ट्रैकिंग ऐप।
  • खेल व एक्स्ट्रा करिकुलर टीम रीच, किक्स या स्लैक।
  • कम्युनिटी और चैट ग्रुप्स  ग्रुप मी और व्हाट्सऐप।
  • लंच व स्कूल यूनिफॉर्म फीस: अलग पेमेंट गेटवे।

जब शिक्षक का एआई मेल पहुंचे, तो मां भी एआई से ही जवाब देती है
स्कूल और घर के बीच संवाद का स्तर अब मशीनों की बेजान बातचीत बन चुका है। डोमिनिकिस बताती हैं कि शिक्षकों ने अब मामूली मुद्दों पर भी लंबे-चौड़े एआई जनरेटेड ईमेल भेजने शुरू कर दिए हैं। वे कहती हैं-जब मुझे किसी छूटे हुए असाइनमेंट पर एआई से लिखा भारी-भरकम ईमेल मिलता है, तो मैं भी एआई (जैसे क्लॉड) से ही उसका ड्राफ्ट तैयार कराकर जवाब भेज देती हूं। 

24 घंटे जासूसी
पिज्जा का एक बाइट और मां का डर...इस तकनीकी अति-पारदर्शिता ने माता-पिता और बच्चों के स्वाभाविक रिश्ते को भी असहज कर दिया है। स्कूल के पहले ही हफ्ते में किंडरगार्टन के टीचर ने डोमिनिकिस को पिज्जा के एक स्लाइस की फोटो भेजी, जिसमें से बच्चे ने केवल एक बाइट लिया था, यह बताने के लिए कि उसने खाना नहीं खाया।
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