ईरान और अमेरिका के बीच रिश्ते एक बार फिर तल्ख होने की आशंका है। परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत के बारे में ईरान के सर्वोच्च नेता खामनेई ने कहा कि उनकी अमेरिकी प्रशासन के साथ सीधी बातचीत करने में कोई दिलचस्पी नहीं है। खास बात ये है कि उनकी टिप्पणी 80वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के बीच आई है। जानिए खामनेई ने क्या कहा?
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामनेई ने अमेरिका के साथ वार्ता से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा है कि उनका देश परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका से सीधे तौर पर कोई बातचीत नहीं करेगा। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब अगामी रविवार से तेहरान पर संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध फिर से लागू होने वाले हैं। यह भी दिलचस्प है कि ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन इस समय संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की 80वीं बैठक में भाग लेने के लिए न्यूयॉर्क में हैं।
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अमेरिका से परमाणु वार्ता से ईरान का इन्कार
80वीं यूएनजीए की बैठक के बीच खामेनेई के बयान ने उन संभावनाओं को भी लगभग खत्म कर दिया है, जिसके तहत पेजेश्कियन और अमेरिकी पदाधिकारियों के बीच संपर्क के कयास लगाए जा रहे थे। खामेनेई ने कहा, अमेरिका पहले ही वार्ता का नतीजा घोषित कर चुका है। उनका नतीजा है, परमाणु गतिविधियों और संवर्धन का अंत। यह बातचीत नहीं, बल्कि थोपना है।
फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन के राजनयिकों से मिले ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची
ईरान के सर्वोच्च नेता ने ये भी कहा कि अमेरिका से वार्ता करना एक बंद रास्ते में जाना है। इस बीच, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन के राजनयिकों से मुलाकात की। ये तीन देश संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों की वापसी की तैयारियों पर चर्चा कर रहे हैं।
जुलाई में ईरान के विदेश मंत्री ने दिए थे सकारात्मक संकेत
यह भी दिलचस्प है कि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने विगत जुलाई में कहा था कि उनका देश अमेरिका के साथ परमाणु वार्ता फिर शुरू करने को तैयार है, अगर यह गारंटी दी जाए कि उन पर फिर से कोई हमला नहीं किया जाएगा। सरकारी मीडिया ने यह जानकारी दी। अराघची ने तेहरान में विदेशी राजदूतों को संबोधित करते हुए कहा कि ईरान हमेशा अपने परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत के लिए तैयार रहा है और भविष्य में भी रहेगा। लेकिन यह भरोसा मिलना चाहिए कि उस प्रक्रिया से किसी भी तरह की स्थिति नहीं बनेगी।
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अमेरिका और अन्य देश ईरान के साथ वार्ता करना चाहते हैं, तो गारंटी...
अराघची ने इस्राइल के साथ 12 दिन चले संघर्ष और 22 जून को अमेरिका की ओर से किए गए हवाई हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि अगर अमेरिका और अन्य देश ईरान के साथ वार्ता करना चाहते हैं, तो सबसे पहले यह गारंटी मिलनी चाहिए कि इस तरह के हमले दोबारा नहीं होंगे।