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अमेरिकी जेन-जी ज्यादा आक्रामक: भाषण पसंद न आने पर वक्ता को जबरन रोकने के समर्थक, हिंसा से भी परहेज नहीं

Mon, 24 Aug 2026 09:37 AM IST
ज्योति भास्कर एजेंसी, वाशिंगटन।

सार

एक अध्ययन के मुताबिक अमेरिकी जेन-जी ज्यादा आक्रामक है। ये युवा भाषण पसंद न आने पर वक्ता को जबरन रोकने के समर्थक हैं। इन्हें हिंसा से भी परहेज नहीं है। पुरानी पीढ़ी की तुलना में राजनीतिक सहनशीलता घट रही है। अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर कोई भी बयानबाजी बर्दाश्त नहीं है।
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अमेरिका की जेन-जी में सहनशीलता घटी - फोटो : अमर उजाला प्रिंट-एजेंसी
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विस्तार
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लोकतंत्र का बुनियादी नियम यही माना जाता है कि असहमति का जवाब बहस से दिया जाए, न कि जबर्दस्ती या हिंसा से। लेकिन अमेरिका में यह सोच अब धूमिल पड़ती नजर आ रही है। एक नए शोध में सामने आया है कि पुरानी पीढ़ी की तुलना में जेन-जी में राजनीतिक सहनशीलता घट रही है।

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नई पीढ़ी सार्वजनिक मंच पर किसी वक्ता का भाषण पसंद न आने पर उसे रोकने के लिए चीखने-चिल्लाने, नारेबाजी करने और यहां तक कि हिंसा का सहारा लेने को भी गलत नहीं मानती। पॉलिटिकल साइंस एंड पॉलिटिक्स प्रकाशित केविन जे वॉलस्टेन का यह अध्ययन बताता है कि अभिव्यक्ति की आजादी पर अमेरिकी युवाओं का नजरिया तेजी से बदल रहा है। नतीजे बताते हैं कि युवा पीढ़ी अभिव्यक्ति की आजादी का समर्थन तो करती है, लेकिन जब बात उनके विचारों के विपरीत या आपत्तिजनक मुद्दों की आती है तो सहनशीलता दिखाने के बजाय सामने वाले को चुप कराने में विश्वास रखते हैं।

सबसे बड़ी बात यह है कि सामान्य मुद्दों पर उदारवादी और रुढ़िवादी दोनों के विचारों में थोड़ा-बहुत अंतर पाया गया। लेकिन नस्ली भेदभाव या आपत्तिजनक बयान देने वालों को जबरन रोकने पर दोनों समान रूप से सहमत दिखे। अध्ययन के दौरान यूनिवर्सिटी जाने वाले और कम पढ़े-लिखे युवाओं की राय भी समान रही। ऐसे में इस अध्ययन को नजरिये में पीढ़ीगत बदलाव का संकेत माना जा रहा है।
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युवा उदारवादियों ने उग्र तरीकों का सबसे अधिक साथ दिया
शोध के दौरान जब बिना कोई खास मुद्दा बताए सामान्य सवाल पूछा गया तो जेन-जी पुरानी पीढ़ियों की तुलना में नारेबाजी करने, रास्ता रोकने और हिंसा का उपयोग करने के प्रति अधिक सहज और सहमत दिखे।

  • मुद्दा स्पष्ट तय न होने पर युवा उदारवादियों ने रूढ़िवादियों की तुलना में वक्ताओं को रोकने के लिए उग्र तरीकों का ज्यादा समर्थन किया।

दो अलग स्थितियों के आधार पर जानी गई राय
राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधि सर्वेक्षण में सटीक नतीजे पाने के लिए प्रतिभागियों के समूह के सामने दो अलग-अलग स्थितियों को रखकर उनकी राय जानने की कोशिश की गई। पहले समूह से सामान्य तौर पर पूछा गया कि क्या वक्ताओं को रोकना या हिंसा सही है? वहीं, दूसरे समूह से पहले उनका सबसे नापसंद विचार चुनने को कहा गया और फिर उस विचार का प्रचार करने वाले वक्ता को रोकने के तरीकों पर राय मांगी गई। इसमें विरोध के तीन मुख्य तरीकों-हंगामा करके आवाज दबाने, रास्ता रोकने और हिंसा का सहारा लेने पर लोगों की स्वीकृति का स्तर मापा गया।

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