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अमेरिका-चीन बैठक: जिनपिंग ने ट्रंप के सामने उठाया ताइवान का मुद्दा, एआई सहयोग पर क्या सहमति बनी?

Fri, 25 Sep 2026 11:44 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन

सार

व्हाइट हाउस में ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात में ताइवान और एआई अहम मुद्दे रहे। शी ने अमेरिका से ताइवान की आजादी का विरोध करने और इस मुद्दे को सावधानी से संभालने की अपील की। साथ ही उन्होंने एआई के क्षेत्र में दोनों देशों के सहयोग की बात कही। ट्रंप ने भी एआई और व्यापार पर संवाद जारी रखने पर जोर दिया। आखिर ताइवान पर चीन की मांग क्या है? एआई पर दोनों साथ कैसे आएंगे? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
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क्या एआई पर साथ आएंगे अमेरिका और चीन? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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अमेरिका और चीन के बीच रिश्तों में व्यापार और तकनीक को लेकर चल रही खींचतान के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने व्हाइट हाउस में मुलाकात की। इस बातचीत में ताइवान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई जैसे अहम मुद्दे सामने आए। चीन के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, शी ने अमेरिका से ‘ताइवान की आजादी’ का विरोध करने और ताइवान के मुद्दे को सावधानी से संभालने की अपील की। साथ ही उन्होंने दोनों देशों से एआई के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा के साथ सहयोग बढ़ाने को कहा।

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शी जिनपिंग ने ट्रंप से ताइवान को लेकर क्या कहा?
शी ने कहा कि चीन की राष्ट्रीय एकता और क्षेत्रीय अखंडता को लेकर उसका रुख स्पष्ट है। उन्होंने अमेरिका से ‘ताइवान की आजादी’ का विरोध करने और ताइवान के सवाल को सावधानी से संभालने की अपील की। चीन ताइवान को अपने क्षेत्र का हिस्सा मानता है और राष्ट्रीय एकीकरण की बात करता है। वहीं, ताइवान खुद को स्वशासित लोकतांत्रिक व्यवस्था के रूप में चलाता है। इसी वजह से ताइवान का मुद्दा अमेरिका और चीन के रिश्तों में सबसे संवेदनशील विषयों में शामिल है।

एआई पर चीन और अमेरिका के बीच साथ काम करने की बात क्यों हुई?
शी ने कहा कि चीन और अमेरिका दोनों के पास एआई के क्षेत्र में मजबूत क्षमताएं हैं। उनके मुताबिक, दोनों देशों को एक-दूसरे से बचने के बजाय अपनी-अपनी ताकत का इस्तेमाल साथ मिलकर करना चाहिए। उन्होंने एआई से जुड़े जोखिम और फायदे पर लगातार बातचीत करने तथा इसके गलत इस्तेमाल और दुरुपयोग को रोकने के लिए मिलकर काम करने का प्रस्ताव रखा। शी ने यह भी कहा कि एआई पर इंसानों का नियंत्रण बना रहना चाहिए और इसका विकास लोगों के हित में होना चाहिए।
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ट्रंप ने चीन के साथ व्यापार और एआई को लेकर क्या कहा?

  • ट्रंप ने शी की यात्रा को शानदार बताया और दोनों देशों के बीच आर्थिक तथा व्यापारिक बातचीत जारी रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों को बातचीत जारी रखकर बेहतर व्यापार समझौते की दिशा में काम करना चाहिए।
  • एआई को लेकर भी ट्रंप ने दोनों देशों के बीच संवाद और सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। उन्होंने एआई को मानवता के भविष्य से जुड़ी तकनीक बताया। इस तरह दोनों नेताओं की बातचीत में प्रतिस्पर्धा के साथ सहयोग बनाए रखने पर जोर दिखाई दिया।


दोनों देशों के रिश्तों में स्थिरता को लेकर शी ने क्या कहा?
शी ने कहा कि चीन और अमेरिका को एक रचनात्मक और रणनीतिक रूप से स्थिर संबंध बनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने दोनों देशों के बीच सहयोग को मुख्य आधार बनाने, प्रतिस्पर्धा को उचित सीमा में रखने और मतभेदों को संभालने की बात कही। उन्होंने हाल की आर्थिक और व्यापारिक बातचीत का भी जिक्र किया और कहा कि सहयोग के क्षेत्रों को बढ़ाने तथा विवाद के मुद्दों को कम करने की जरूरत है। शी के मुताबिक, समानता, एक-दूसरे के सम्मान और पारस्परिक लाभ की भावना से मतभेदों का समाधान तलाशा जा सकता है।

ट्रंप-शी ने किन दूसरे अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बात की?
दोनों नेताओं ने ताइवान और एआई के अलावा मध्य पूर्व की स्थिति, यूक्रेन संकट और कोरियाई प्रायद्वीप के घटनाक्रम पर भी विचार साझा किए। दोनों ने 2026 में होने वाली एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग यानी एपीईसी की आर्थिक नेताओं की बैठक और जी20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी के दौरान एक-दूसरे का समर्थन करने पर सहमति जताई। शी की यह यात्रा तीन दिन की है और दोनों देशों के बीच व्यापार, तकनीक तथा दूसरे रणनीतिक मुद्दों पर बातचीत के बीच हुई है।

ताइवान और एआई पर चर्चा से अमेरिका-चीन रिश्तों का क्या संकेत मिलता है?
ट्रंप और शी की बातचीत में एक तरफ ताइवान जैसे संवेदनशील मुद्दे पर चीन की स्पष्ट मांग सामने आई, वहीं दूसरी तरफ एआई जैसे नए क्षेत्र में सहयोग की बात भी हुई। इसका मतलब यह है कि दोनों देशों के बीच कई बड़े मतभेद बने रहने के बावजूद संवाद के रास्ते खुले हैं। व्यापार और तकनीक पर बातचीत जारी रखने के साथ दोनों पक्ष अपने रणनीतिक हितों को भी सामने रख रहे हैं। ऐसे में ट्रंप-शी वार्ता में ताइवान, एआई और व्यापार तीनों मुद्दे अमेरिका-चीन संबंधों की दिशा के लिए अहम बने हुए हैं।

ट्रंप के साथ नेशनल आर्काइव्स गए जिनपिंग

  • ट्रंप शुक्रवार को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को वॉशिंगटन स्थित नेशनल आर्काइव्स ले गए। यह तीन दिवसीय अमेरिकी दौरे का अंतिम कार्यक्रम है। यहां अमेरिका की स्वतंत्रता की घोषणा, संविधान और बिल ऑफ राइट्स जैसे ऐतिहासिक दस्तावेज सुरक्षित रखे गए हैं। ट्रंप ने कहा कि वह शी को अमेरिका के इतिहास के कुछ सबसे महत्वपूर्ण खजाने दिखाना चाहते हैं।
  • शी की यात्रा ऐसे समय हुई है, जब अमेरिका अपनी स्थापना की 250वीं वर्षगांठ मना रहा है। नेशनल आर्काइव्स में 'द अमेरिकन स्टोरी' नाम से विशेष प्रदर्शनी लगाई गई है, जिसमें अमेरिका की उपलब्धियों के साथ उसके इतिहास के कठिन दौर को भी दिखाया गया है। ट्रंप ने गुरुवार को ओवल ऑफिस में रखी स्वतंत्रता की घोषणा की एक प्रति भी शी को दिखाई थी।
  • इससे पहले ट्रंप और शी ने करीब 90 मिनट तक बंद कमरे में बातचीत की। चीनी सरकार के अनुसार दोनों नेताओं ने मध्य पूर्व, यूक्रेन और कोरियाई प्रायद्वीप जैसे मुद्दों पर चर्चा की। हालांकि, व्यापार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर कोई बड़ा समझौता सामने नहीं आया। गुरुवार रात दोनों नेताओं के सम्मान में व्हाइट हाउस में राजकीय रात्रिभोज भी आयोजित किया गया था।
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