भारत ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में सुधारों को लेकर वैश्विक निकाय को नसीहत दे दी है। भारत ने कहा, परिषद में कोई भी सुधार, यदि वीटो शक्ति वाले स्थायी सदस्यों की श्रेणी में विस्तार के साथ नहीं किया जाता है, तो संयुक्त राष्ट्र की इस इकाई में मौजूदा असंतुलन और असमानताएं बनी रहेंगी। हरीश ने कहा, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की तत्काल आवश्यकता पर व्यापक सहमति है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पर्वतनेनी हरीश ने सुरक्षा परिषद सुधारों पर अंतर-सरकारी वार्ता (आईजीएन) बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि वीटो के साथ या उसके बिना एक नई श्रेणी पर विचार करने से व्यापक विचारों वाली पहले से जारी चर्चा जटिल हो जाएगी। वह बोले, दो मूलभूत कारण हैं, जिनकी वजह से संरचना असंतुलित बनती है और परिषद की वैधता व प्रतिनिधित्व पर सवाल उठते हैं-ये हैं सदस्यता और वीटो अधिकार। हरीश ने जोर देते हुए कहा, 80 साल से अधिक पहले बनी इसकी संरचना आज की बदलती वैश्विक-राजनीतिक परिस्थितियों के अनुरूप नहीं है। एजेंसी
भारतीय राजदूत ने दीं ये दलीलें
भारतीय राजदूत ने याद किया कि 1960 के दशक में परिषद में किए गए उस एकमात्र सुधार से वीटो का अधिकार रखने वाले देशों की ताकत और बढ़ गई जिसके तहत केवल अस्थायी श्रेणी में विस्तार किया गया था। तुलनात्मक रूप से देखें तो पहले वीटो अधिकार वाले स्थायी सदस्यों और अस्थायी सदस्यों का अनुपात 5:6 था, जिसे बाद में बदलकर 5:10 कर दिया गया। इससे वीटो का अधिकार रखने वाले देशों को अपेक्षाकृत अधिक फायदा मिला।
पी. हरीश ने कहा, कोई भी सुधार जिसके साथ वीटो अधिकार वाले स्थायी सदस्यों की श्रेणी का विस्तार नहीं किया जाता, वह इस अनुपात को और बिगाड़ देगा और इस प्रकार मौजूदा असंतुलन और असमानताओं को कायम रखेगा। इसलिए, वीटो अधिकार वाले स्थायी सदस्यों की श्रेणी का विस्तार सुरक्षा परिषद के वास्तविक सुधार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
हरीश ने कहा, सुधारों के मार्ग को सुव्यवस्थित और त्वरित करने के लिए सुधारों के दायरे को मौजूदा ढांचे तक सीमित रखना महत्वपूर्ण है। भारत दशकों से सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग कर रहा है, जिसमें इसके स्थायी और अस्थायी दोनों वर्गों का विस्तार शामिल है। भारत का कहना है कि 1945 में स्थापित 15 देशों की यह परिषद 21वीं सदी के लिए उपयुक्त नहीं है और समकालीन भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित नहीं करती है।
n भारत ने जोर दिया है कि वह परिषद में स्थायी सीट का हकदार है। अतीत में ऐसे उदाहरण सामने आए हैं जहां निर्वाचित सदस्यों ने केवल अपने संकीर्ण स्वार्थों को पूरा करने के लिए अपने प्रभावी वीटो का प्रयोग करके बाधाएं उत्पन्न की हैं।
वीटो पर लगाम की मांगों पर किया इशारा
हरीश ने वीटो पर लगाम की मांगों की ओर भी इशारा किया और 2022 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में पारित एक प्रस्ताव का जिक्र किया। इसका उद्देश्य 193 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र निकाय की एक औपचारिक बैठक बुलाकर सुरक्षा परिषद के किसी स्थायी सदस्य द्वारा अपने वीटो का प्रयोग करने के 10 दिनों के भीतर उस पर बहस करना था। हालांकि, यह एक प्रभावी निवारक साबित नहीं हुआ है। यहां 20 मसौदा प्रस्तावों पर 24 बार वीटो का प्रयोग किया गया है। इनमें से 7 प्रस्तावों पर गत वर्ष वीटो हुए।
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आंबेडकर जयंती पर यूएन में विशेष कार्यक्रम
यूएन में भारत के स्थायी मिशन द्वारा डॉ. भीमराव आंबेडकर की 135वीं जयंती पर एक विशेष कार्यक्रम में राजदूत पी. हरीश ने कहा, राजनीतिक विखंडन और निरंतर संघर्षों से भरे इस अशांत समय में आंबेडकर द्वारा सांविधानिक नैतिकता को बढ़ावा देने का आह्वान प्रासंगिक है। इससे बहुपक्षवाद को मजबूती में मदद मिलेगी।
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