तुर्किये की मुख्य विपक्षी पार्टी के नेता ओजगुर ओजेल को अदालत द्वारा पद से हटाए जाने के विरोध में शनिवार को हजारों समर्थकों ने अंकारा में मार्च निकाला। ओजेल को 21 मई को एक अदालती आदेश के जरिये पद से हटा दिया गया था, जिसे विपक्षी दल ने राजनीतिक साजिश करार दिया है।
समर्थकों को संबोधित करते हुए 51 वर्षीय ओजेल ने इसे राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोआन और जनता के बीच का मामला बताया। अदालत ने 2023 के पार्टी कांग्रेस के उस वोट को रद्द कर दिया है, जिसमें ओजेल को नेता चुना गया था। उनके स्थान पर 77 वर्षीय केमाल किलिचदारोग्लू को फिर से नेता नियुक्त किया गया है। ओजेल ने इसे पार्टी पर कानूनी हमला बताया है। वहीं, सरकार का कहना है कि अदालतें निष्पक्ष हैं। प्रदर्शन के दौरान किलिकडारोग्लू ने पार्टी मुख्यालय में एक अलग बैठक की।
किलिचदारोग्लू के नेतृत्व में पार्टी ने नहीं जीता कोई राष्ट्रीय चुनाव
किलिचदारोग्लू (77 वर्षीय) ने 13 साल तक पार्टी का नेतृत्व करने के बाद पद छोड़ा था। उनके नेतृत्व में सीएचपी कोई राष्ट्रीय चुनाव नहीं जीत सकी थी। वहीं, ओजेल ने पार्टी अध्यक्ष बनने के बाद 2024 के नगर निकाय चुनावों में राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोआन की सत्तारूढ़ पार्टी को बड़ा झटका दिया था।
तुर्किये में 2028 में राष्ट्रपति चुनाव
तुर्किये में अगला राष्ट्रपति चुनाव 2028 में होना है। लेकिन राष्ट्रपति एर्दोआन समय से पहले चुनाव करा सकते हैं। उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी और इस्तांबुल के मेयर एकरेम इमामोग्लू (जो सीएचपी के सदस्य हैं) पिछले साल मार्च से जेल में हैं और उन पर भ्रष्टाचार के मामले चल रहे हैं।
चुनाव से पहले विपक्ष को कमजोर करने की कोशिश
कई राजनीतिक जानकारों का कहना है कि सीएचपी के खिलाफ जारी कानूनी मामले पार्टी को अगले चुनाव से पहले कमजोर करने की कोशिश हैं। हालांकि, सरकार का कहना है कि तुर्किये की अदालतें निष्पक्ष हैं और राजनीतिक दबाव से स्वतंत्र होकर काम करती हैं।
ओजेल के समर्थन में खड़े हैं पार्टी के अधिकांश सदस्य
पार्टी के ज्यादातर सदस्य ओजेल के समर्थन में खड़े हैं। गुरुवार के फैसले के बाद से ओजेल और उनके समर्थक अंकारा स्थित पार्टी मुख्यालय के अंदर मौजूद हैं और नए नेतृत्व को अंदर नहीं आने दिया जा रहा है। दोनों पक्ष रविवार दोपहर इस विवाद का हल निकालने के लिए बैठक करने वाले थे।
एर्दोआन 2003 से पहले प्रधानमंत्री और फिर राष्ट्रपति के रूप में तुर्किये पर शासन कर रहे हैं। 2019 के स्थानीय चुनावों में सीएचपी ने कई बड़े शहरों पर कब्जा कर लिया था, जिससे एर्दोआन को बड़ा झटका लगा था। इस्तांबुल में एकरेम इमामोग्लू एक लोकप्रिय और प्रभावशाली नेता के रूप में उभरे, जिन्हें कई लोग एर्दोआन को चुनौती देने वाला मजबूत चेहरा मानते हैं।