फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

संयुक्त राष्ट्र महासभा: तुर्की ने एक फिर अलापा कश्मीर का राग, भारत पहले भी दे चुका है चेतावनी

Wed, 22 Sep 2021 01:10 PM IST
अजय सिंह वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला

सार

पिछले साल भी एर्दोआन ने सामान्य चर्चा के लिए अपने पहले से रिकॉर्ड किए गए बयान में जम्मू-कश्मीर का जिक्र किया था। भारत ने उस वक्त इसे पूरी तरह अस्वीकार्य बताया था और कहा था कि तुर्की को अन्य राष्ट्रों की संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए और अपनी नीतियों पर गहराई से विचार करना चाहिए। 
Register For Event
विज्ञापन
तुर्की के राष्ट्रपति रेचप तैयर एर्दोगन - फोटो : instagram.com/rterdogan
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

तुर्की ने एक बार फिर कश्मीर का राग अलापा है। संयुक्त राष्ट्र महासभा में तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन नेअपने संबोधन में एक बार फिर कश्मीर का मुद्दा उठाया। पिछले साल भी, एर्दोआन ने सामान्य चर्चा के लिए अपने पहले से रिकॉर्ड किए गए वीडियो बयान में जम्मू-कश्मीर का जिक्र किया था। भारत ने उस वक्त इसे पूरी तरह अस्वीकार्य बताया था और कहा था कि तुर्की को अन्य राष्ट्रों की संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए और अपनी नीतियों पर गहराई से विचार करना चाहिए।

विज्ञापन


एर्दोआन ने मंगलवार को सामान्य चर्चा में अपने संबोधन में कहा, 'हम 74 वर्षों से कश्मीर में चल रही समस्या को पार्टियों के बीच बातचीत के माध्यम से और प्रासंगिक संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों के ढांचे के भीतर हल करने के पक्ष में अपना रुख बनाए रखते हैं।' तुर्की के राष्ट्रपति उच्च स्तरीय सामान्य चर्चा में अपने संबोधन में बार-बार कश्मीर का मुद्दा उठाते रहे हैं। उन्होंने पिछले साल पाकिस्तान की अपनी यात्रा के दौरान भी कश्मीर का मुद्दा उठाया था।

उस समय विदेश मंत्रालय ने कहा था कि एर्दोआन की टिप्पणी न तो इतिहास की समझ और न ही कूटनीति के संचालन को दर्शाती है और इसका तुर्की के साथ भारत के संबंधों पर गहरा असर पड़ेगा।
विज्ञापन


इसने कहा कि भारत ने पाकिस्तान द्वारा स्पष्ट रूप से किए जाने वाले सीमा पार के आतंकवाद को सही ठहराने के तुर्की के बार-बार के प्रयास को खारिज किया है। मंगलवार को अपने संबोधन में तुर्की के राष्ट्रपति ने शिन्जियांग में चीन के अल्संख्यक मुस्लिम उइगुर और म्यांमा के रोहिंग्या अल्पसंख्यकों का भी जिक्र किया।

एर्दोआन ने कहा कि चीन की क्षेत्रीय अखंडता के परिप्रेक्ष्य में, हम मानते हैं कि मुस्लिम उइगुर तुर्कों के मूल अधिकारों के संरक्षण के संबंध में और अधिक प्रयासों को प्रदर्शित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हम रोहिंग्या मुसलमानों की उनकी मातृभूमि में सुरक्षित, स्वैच्छिक, सम्मानजनक वापसी सुनिश्चित करने का भी समर्थन करते हैं, जो बांग्लादेश और म्यांमा में शिविरों में कठिन परिस्थितियों में रह रहे हैं।

भारत ने साइप्रस के मामले पर घेरा
वहीं विदेश मंत्री एस जयशंकर ने साइप्रस के अपने समकक्ष निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स के साथ द्विपक्षीय बैठक की, जिसमें उन्होंने साइप्रस के संबंध में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रासंगिक प्रस्तावों का पालन करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

जयशंकर ने क्रिस्टोडौलाइड्स के साथ अपनी मुलाकात के बारे में बुधवार को ट्वीट किया, 'हम आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाने पर काम कर रहे हैं। मैंने उनकी क्षेत्रीय अंतर्दृष्टि की सराहना की। सभी को साइप्रस के संबंध में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रासंगिक प्रस्तावों का पालन करना चाहिए।'

तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन में कश्मीर का जिक्र किया था, जिसके कुछ घंटे बाद जयशंकर ने यह ट्वीट किया।

साइप्रस में लंबे समय से चल रहे संघर्ष की शुरुआत 1974 में यूनान सरकार के समर्थन से हुए सैन्य तख्तापलट से हुई थी। इसके बाद तुर्की ने यूनान के उत्तरी हिस्से पर आक्रमण कर दिया था। भारत संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों के तहत इस मामले के शांतिपूर्ण समाधान की वकालत करता रहा है।
विज्ञापन



 

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें