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पाकिस्तान में 200 साल पुराने मंदिर पर संकट: गिराने की हो रही कोशिश; विरोध के बाद सील क्यों हुआ रामलीला मंदिर?

Sun, 18 Oct 2026 06:43 PM IST
राकेश कुमार पीटीआई, पेशावर।

सार

पाकिस्तान के डेरा इस्माइल खान में करीब 200 साल पुराने रामलीला मंदिर को गिराकर व्यावसायिक परिसर बनाने की कोशिश के बाद प्रशासन ने उसे सील कर दिया। स्थानीय लोगों, व्यापारियों और हिंदू समुदाय ने मंदिर की सुरक्षा तथा संपत्ति के मालिकाना हक की जांच की मांग की। हिंदू संगठनों ने धार्मिक स्थलों पर कथित अवैध कब्जों की जांच और बेहतर सुरक्षा की अपील की है। इस मामले ने पाकिस्तान में धार्मिक विरासत के संरक्षण और अल्पसंख्यकों के अधिकारों से जुड़े सवाल फिर उठा दिए हैं।
 
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पाकिस्तान में मंदिर गिराने की साजिश - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के डेरा इस्माइल खान शहर में करीब 200 साल पुराने रामलीला मंदिर को सील कर दिया गया है। यह मंदिर शहर के बीच स्थित रहीम बाजार में है। आरोप है कि मंदिर को गिराकर वहां व्यावसायिक परिसर बनाने की तैयारी की जा रही थी। जानकारी मिलने पर स्थानीय निवासी, व्यापारी और हिंदू समुदाय के लोग विरोध में उतर आए। मामला बढ़ने के बाद शनिवार को स्थानीय प्रशासन ने मंदिर को अपने कब्जे में ले लिया। इसके बाद इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ईटीपीबी) ने मंदिर को सील कर दिया।
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विरोध किसने और क्यों किया?
डेरा सिविल सोसाइटी और स्थानीय व्यापारियों के संगठन के अध्यक्ष सोहेल अहमद अजमी ने बताया कि मंदिर को गिराने की कोशिश की जानकारी मिलने पर वह दूसरे स्थानीय लोगों के साथ मौके पर पहुंचे। अजमी के मुताबिक, वहां मौजूद एक व्यक्ति ने दावा किया कि उसे मंदिर गिराने का ठेका मिला है। इसके बाद नागरिक संगठनों और हिंदू समुदाय के प्रतिनिधियों ने बैठक की और मंदिर को बचाने की मांग उठाई। उनका कहना था कि संपत्ति के मालिकाना हक और वहां व्यावसायिक निर्माण की वैधता की जांच होनी चाहिए।

मंदिर की संपत्ति और सरकारी बोर्ड की क्या भूमिका है?
  • मंदिर ऐतिहासिक विरासत का हिस्सा: स्थानीय निवासी और विरासत संरक्षण से जुड़े लोग रामलीला मंदिर को डेरा इस्माइल खान की ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान से जोड़कर देखते हैं। इससे पहले भी यहां व्यावसायिक परिसर बनाने की कोशिश का स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने विरोध किया था।
  • करीब 400 इमारतें विरासत की सूची में: ईटीपीबी ने डेरा इस्माइल खान की लगभग 400 इमारतों को सांस्कृतिक विरासत वाली संपत्तियों के रूप में चिह्नित किया है।
  • क्या करता है ईटीपीबी?: यह पाकिस्तानी सरकारी संस्था 1947 के बंटवारे के बाद भारत चले गए लोगों की छोड़ी गई संपत्तियों का प्रबंधन करती है। इसके अलावा, यह अल्पसंख्यक धार्मिक समुदायों की कुछ संपत्तियों और कई हिंदू-सिख धार्मिक स्थलों की देखरेख भी करती है।
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हिंदू संगठनों ने क्या मांग की?
  • धार्मिक स्थलों की सुरक्षा की मांग: ऑल पाकिस्तान हिंदू राइट्स मूवमेंट के अध्यक्ष हारून सरब डायल ने उम्मीद जताई कि प्रांत में राज्यपाल शासन के दौरान हिंदू धार्मिक स्थलों को विशेष सुरक्षा मिलेगी।
  • पुरानी संपत्तियों की जांच की मांग: डायल ने 2013 से 2026 के बीच धार्मिक संपत्तियों पर कथित अवैध कब्जे और उनकी अवैध बिक्री के मामलों की विस्तृत जांच कराने की मांग की।
  • राज्यपाल शासन क्यों लगा?: पाकिस्तान ने 11 अक्टूबर को खैबर पख्तूनख्वा में राज्यपाल शासन लागू किया था। इसके लिए बिगड़ती कानून-व्यवस्था का हवाला दिया गया और जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी की प्रांतीय सरकार पर आतंकवाद विरोधी प्रयासों में सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया गया।

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर क्या सवाल उठे हैं?
पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग (एचआरसीपी) ने ईटीपीबी के कामकाज में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की है। आयोग ने इस संस्था में सुधार कर इसे अल्पसंख्यक समुदायों का अधिक प्रतिनिधित्व देने की सिफारिश की है। गुरुवार को जारी उसकी रिपोर्ट में कहा गया कि धार्मिक अल्पसंख्यकों को अब भी कई तरह के अधिकारों के उल्लंघन का सामना करना पड़ रहा है।

रिपोर्ट में ईशनिंदा कानूनों के दुरुपयोग, जबरन विवाह और धर्म परिवर्तन, भेदभावपूर्ण व्यवहार तथा रोजगार में भेदभाव जैसे मुद्दे उठाए गए हैं। इसमें हिंदू और ईसाई लड़कियों के अपहरण और जबरन विवाह की घटनाओं को लेकर भी चिंता जताई गई है।  पाकिस्तान के पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के मुताबिक, डेरा इस्माइल खान और आसपास के इलाकों में बिलोट शरीफ का मंदिर परिसर भी मौजूद है, जो सातवीं से 11वीं सदी के शुरुआती दौर का है।
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