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नेपाल त्रासदी: बाढ़ ने मचाई भीषण तबाही, 150+ लोगों की मौत; 750 से ज्यादा अभी भी लापता, यूपी-बिहार में अलर्ट

Thu, 27 Aug 2026 05:46 AM IST
Devesh Tripathi वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला

सार

नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ ने कई जिलों में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। तेज बहाव के कारण पुल, सड़कें और जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोग संपर्क से बाहर हैं। नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए भारतीय दूतावास और विभिन्न राज्य सरकारों ने सहायता तंत्र सक्रिय किया है।
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नेपाल से तिब्बत तक तबाही का मंजर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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नेपाल में तिब्बत से अचानक आई भीषण बाढ़ ने कई कस्बों और गांवों में भारी तबाही मचाई। नेपाल पुलिस के अनुसार, बाढ़ में 157 लोगों की मौत हो गई है और 750 से अधिक लोग अब भी लापता हैं। लापता लोगों में 133 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। बाढ़ से कई महत्वपूर्ण पुल बह गए और करीब एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं।
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नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद को बताया कि स्थानीय समयानुसार सुबह 8:37 बजे तिब्बत क्षेत्र में भूकंप आया था। इसके तीन मिनट बाद अचानक बाढ़ की सूचना मिली। इससे आशंका है कि भूकंप के झटकों से ग्लेशियर से अचानक पानी निकलने की घटना हुई, जिससे बाढ़ आई।

नेपाल में बाढ़ से यूपी-बिहार में अलर्ट
नेपाल में आई अचानक बाढ़ ने उत्तर प्रदेश के महाराजगंज और कुशीनगर समेत बिहार के लिए भी खतरे की घंटी बजा दी है। बाढ़ का पानी त्रिशूली नदी तक पहुंचने और वहां जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर दर्ज होने के बाद बिहार और यूपी सरकार ने गंडक और नारायणी नदी से जुड़े जिलों में अलर्ट जारी कर दिया है।
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विदेश मंत्रालय लगातार नेपाल सरकार के संपर्क में है। बिहार के पश्चिम चंपारण, गोपालगंज और मुजफ्फरपुर समेत गंडक के तटवर्ती इलाकों में प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है। लोगों से नदी से दूर रहने, निचले इलाकों को खाली करने के लिए कहा गया है। राज्य के बाढ़ निगरानी तंत्र के मुताबिक पूर्वी चंपारण के डुमरियाघाट में गंडक नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर दर्ज किया गया, जबकि रेवा घाट पर नदी चेतावनी स्तर पार कर चुकी है।

एनडीआरएफ की 20 टीमें की गईं तैनात
नेपाल से आने वाले अतिरिक्त पानी को देखते हुए अगले कुछ घंटों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जल संसाधन विभाग को तटबंधों पर चौबीसों घंटे निगरानी के लिए कहा गया है। स्थिति का आकलन करने के बाद, पश्चिमी चंपारण और मुजफ्फरपुर में तैनाती के लिए एनडीआरएफ की दो टीमें भेजी गई हैं। बिहार में कुल नौ टीमें तैनात हैं।

उत्तर प्रदेश में भी राज्य सरकार स्थिति पर कड़ी नजर रख रही है। कुशीनगर जिले में एनडीआरएफ की एक अतिरिक्त टीम तैनात की गई है, जिसके गंडक नदी के करीब होने के कारण प्रभावित होने की संभावना है। बाढ़ की चेतावनी और बचाव कार्यों (FWR) के लिए यूपी में कुल 11 टीमें तैनात हैं।

नेपाल में कैसे बाढ़ ने मचाई तबाही?
अधिकारियों के अनुसार, भोटे कोशी नदी में आई बाढ़ से तिब्बत की सीमा से लगे रसुवा और धादिंग जिले प्रभावित हुए हैं। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, चट्टान खिसकने और नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बहने वाली ल्हेंदे नदी में पानी बढ़ने के कारण रसुवा जिले के सीमावर्ती शहर टिमुरे में भोटे कोशी नदी के रास्ते बाढ़ का पानी त्रिशूली नदी में पहुंचा।

इसके बाद बाढ़ नदी के रास्ते नुवाकोट, चितवन, गोरखा, तनहूं और नवलपरासी पूर्व जैसे अन्य जिलों तक फैल गई। ये इलाके काठमांडू से करीब 70 किलोमीटर से लेकर लगभग 200 किलोमीटर तक की दूरी पर हैं। नेपाल सरकार ने बताया कि करीब 750 लोग लापता हैं। वहीं, चीन के सरकारी समाचार चैनल सीजीटीएन के अनुसार, सीमा के चीनी हिस्से में तीन लोगों की मौत हुई है और 265 लोग लापता हैं।

प्रभावित इलाकों के वीडियो में कीचड़, चट्टानों और मलबे के साथ तेज बहाव का पानी दिखाई दे रहा है। लोग बाढ़ से बचने के लिए भागते नजर आए। पानी इमारतों और वाहनों की ओर तेजी से बढ़ रहा था। अधिकारियों के अनुसार, प्रभावित इलाकों से करीब 100 लोगों को बचाया गया है। इनमें से 30 लोगों का काठमांडू के त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल में इलाज चल रहा है।

भारत ने पड़ोसी देश की मदद के लिए आगे बढ़ाया हाथ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के पीएम बालेंद्र शाह से बात की और स्थिति से निपटने के लिए हर संभव मानवीय सहायता का आश्वासन दिया। भारत ने पड़ोसी देश के लिए राहत सामग्री की पहली खेप भेज दी है। काठमांडो स्थित भारतीय दूतावास ने बाढ़ से प्रभावित भारतीय नागरिकों की सहायता और जानकारी के लिए आपातकालीन नंबर जारी किए हैं। दूतावास ने एक्स पर बताया कि लोग +977 985 131 6807 या +977 970 910 7500 पर संपर्क कर सकते हैं।

130 से ज्यादा भारतीय नागरिक लापता
नेपाल के मध्य जिलों में अचानक आई बाढ़ से भारी तबाही के बाद 130 से अधिक भारतीय नागरिक लापता हैं। इनमें कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए कई श्रद्धालु भी शामिल हैं। नेपाल में बाढ़ से प्रभावित इलाकों में बड़ी संख्या में अन्य भारतीय भी फंसे हुए हैं। पड़ोसी देश के अधिकारियों के अनुसार, बाढ़ से प्रभावित भारतीयों और उनके परिजनों की मदद के लिए काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास के अलावा तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, केरल, राजस्थान और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों ने हेल्पलाइन शुरू की हैं।

सम्राट टूर्स एंड ट्रैवल एजेंसी के अनुसार, लापता भारतीयों में कम से कम 59 कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए श्रद्धालु हैं। नेपाल में भारी बाढ़ के कारण संचार व्यवस्था बाधित होने से प्रभावित भारतीय नागरिकों के बारे में फिलहाल बहुत कम जानकारी मिल सकी है।

तमिलनाडु के कितने पर्यटक अभी भी लापता?
राज्य के अधिकारियों के अनुसार, तमिलनाडु के 57 पर्यटकों में से 37 का अभी पता नहीं चल पाया है, जबकि 20 अन्य के बारे में जानकारी मिल गई है। बताया जा रहा है कि ये पर्यटक हिमालय में एक मंदिर की ओर जा रहे थे। कोयंबटूर स्थित गैर-लाभकारी संस्था ईशा फाउंडेशन ने दावा किया कि उसके 77 सदस्य, जो एक आव्रजन केंद्र में मौजूद थे, लापता हैं।

संस्था के संस्थापक सद्गुरु ने कहा, ''आव्रजन कार्यालय में मौजूद लोगों के बारे में किसी के ठिकाने की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है।'' उन्होंने बताया कि 495 लोग सुरक्षित लौट चुके हैं। नेपाल सरकार ने बाद में कहा कि उस विशेष आव्रजन केंद्र का पूरा स्टाफ संपर्क से बाहर है।

पश्चिम बंगाल के कितने पर्यटक लापता?
बुधवार को नेपाल में अचानक आई बाढ़ के बाद पश्चिम बंगाल के कई लोगों का पता नहीं चल पाया है। इनमें कोलकाता से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गया 32 सदस्यीय दल भी शामिल है। एक अधिकारी ने बताया कि दल में 30 पर्यटक और दो टूर मैनेजर हैं। दल 21 अगस्त को कोलकाता से रवाना हुआ था और अगले दिन नेपाल पहुंचा था।

अधिकारी के अनुसार, दल बुधवार सुबह तिब्बत में प्रवेश करने के लिए रसुवागढ़ी पहुंचा था। इसके सदस्य सुबह करीब 8:30 बजे आव्रजन कार्यालय में मौजूद थे, तभी नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में अचानक बाढ़ आ गई। अधिकारी ने पीटीआई से कहा, ''बाढ़ आने के बाद से 32 सदस्यों में से किसी से भी संपर्क नहीं हो पाया है।''

उन्होंने बताया कि कोलकाता के अलावा हुगली के चंदननगर और उत्तर 24 परगना के बारासात के निवासी भी नेपाल में फंसे या लापता लोगों में शामिल हो सकते हैं। पश्चिम बंगाल सरकार ने नेपाल में प्रभावित लोगों के परिजनों को जानकारी देने के लिए कोलकाता स्थित राज्य पुलिस मुख्यालय में हेल्पलाइन शुरू की है। परिजन (033) 24793311 या 9147890181 पर संपर्क कर सकते हैं।

उत्तर प्रदेश के कितने लोगों के नेपाल में फंसे होने की आशंका?
उत्तर प्रदेश के कई लोगों के नेपाल में फंसे होने की आशंका है। किसान नेता राकेश टिकैत भी अपने सहयोगियों के साथ सड़क मार्ग से नेपाल गए थे और पोखरा में फंस गए। भारतीय किसान यूनियन के नेता ने वीडियो संदेश में कहा, ''हम कल विमान से काठमांडो पहुंचेंगे और वहां से विमान से दिल्ली जाएंगे। इस स्थिति के कारण हमें अपने वाहन वहीं छोड़ने होंगे क्योंकि सड़क मार्ग से यात्रा करना संभव नहीं होगा।''

राहत आयुक्त कार्यालय ने नेपाल में बाढ़ से प्रभावित उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए परामर्श जारी किया है। इसमें कहा गया है कि अगर राज्य का कोई व्यक्ति नेपाल में फंसा है या उसे किसी तरह की सहायता की जरूरत है तो उसके परिजन तुरंत राज्य की हेल्पलाइन 1070 पर संपर्क करें।

महाराष्ट्र और केरल समेत और किन राज्यों के लोग फंसे?
  • अधिकारियों के अनुसार, महाराष्ट्र के सात पर्यटक नेपाल में अचानक आई बाढ़ के बीच फंसे हुए हैं। बुधवार रात मिली ताजा जानकारी के मुताबिक, इनमें से चार सुरक्षित हैं। अधिकारियों ने बताया कि बाकी तीन लोगों से संपर्क करने की कोशिश की जा रही है।
  • केरल के अधिकारियों ने बताया कि नेपाल की यात्रा पर गया 36 लोगों का एक दल सुरक्षित है और भीषण बाढ़ से प्रभावित इलाकों से दूर है। केरल ने नेपाल में बाढ़ से प्रभावित राज्य के लोगों को आपात सहायता देने के लिए राज्य सरकार की एजेंसी नॉर्का-रूट्स के जरिए हेल्पडेस्क शुरू किया है। नॉर्का-रूट्स राज्य सरकार के प्रवासी केरल मामलों के विभाग की फील्ड एजेंसी है।
  • सिक्किम सरकार ने उन लोगों की मदद के लिए हेल्पलाइन शुरू की है, जिनके परिवार के सदस्य या रिश्तेदार नेपाल में फंसे हो सकते हैं या बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने भी बाढ़ से प्रभावित भारतीय नागरिकों की सहायता और जानकारी के लिए आपातकालीन नंबर जारी किए हैं। लोग +977 985 131 6807 या +977 970 910 7500 पर संपर्क कर सकते हैं।
  • ओडिशा सरकार ने नेपाल में अचानक आई भीषण बाढ़ के कारण फंसे या परेशानी में हो सकने वाले राज्य के लोगों की मदद के लिए नई दिल्ली में नियंत्रण कक्ष बनाया है और हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। सरकार के बयान के अनुसार, हेल्पलाइन नंबर +91-7428135044, +91-8527580245 और 011-23012807 हैं।
  • वही, उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने उन लोगों की सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं, जिनके परिवार के सदस्य नेपाल में फंसे या बाढ़ से प्रभावित हो सकते हैं। अधिकारियों के अनुसार, एसईओसी के नंबर 0135-2710334, 2710335, 2664314, 2664315, 2664316 और 8218867005 के अलावा टोल फ्री नंबर 1070 पर भी संपर्क किया जा सकता है।
  • छत्तीसगढ़ सरकार ने नेपाल में अचानक आई बाढ़ के कारण फंसे हो सकने वाले राज्य के नागरिकों की सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। अधिकारियों के अनुसार, छत्तीसगढ़ के लोग सहायता और जानकारी के लिए आपदा प्रबंधन हेल्पलाइन 1070 या +91-771-2223471 पर संपर्क कर सकते हैं।

राहत और बचाव कार्य में जुटी नेपाली सेना
नेपाल सेना ने अचानक आई बाढ़ के बाद खोज और बचाव अभियान के लिए 12 हेलीकॉप्टर लगाए। सेना के अनुसार, रसुवा जिले के स्याफ्रुबेसी से छह, मेलुंग से दो और धुंचे से चार लोगों को बचाया गया।

नेपाल सेना ने त्रिशूली स्थित मिलिट्री ट्रेनिंग सेंटर नंबर एक में एक उपचार केंद्र भी बनाया है। यहां सेना के चिकित्सा कर्मी प्रभावित लोगों को आपात चिकित्सा सुविधा दे रहे हैं। सेना ने आपात चिकित्सा बचाव दल से लैस एमआई-17 हेलीकॉप्टर को त्रिशूली के जिला अस्पताल की ओर भी भेजा।

तिब्बत में भी चल रहा राहत और बचाव कार्य
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बुधवार को भीषण अचानक आई बाढ़ के बाद लापता लोगों की तलाश और बचाव के लिए हर संभव प्रयास करने का आदेश दिया। पीपुल्स आर्म्ड पुलिस की शिगात्से टुकड़ी के कुल 145 अधिकारी और जवान प्रभावित सीमा बंदरगाह पर भेजे गए हैं। वे आपात स्थिति से निपटने के अभियान में मदद कर रहे हैं।

शी ने खतरे वाले इलाकों से लोगों को निकालने और घायलों को समय पर चिकित्सा सुविधा देने का निर्देश दिया, ताकि जनहानि को कम किया जा सके। उन्होंने निगरानी और शुरुआती चेतावनी व्यवस्था मजबूत करने, वैज्ञानिक तरीके से बचाव अभियान चलाने और दूसरी आपदाओं से बचाव पर भी जोर दिया।
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सरकारी समाचार पत्र ग्लोबल टाइम्स के अनुसार, स्थानीय प्रशासन ने आपदा प्रभावित क्षेत्र में कर्मियों को भेजा है। वहां संचार व्यवस्था बाधित हो गई है।
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