विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सूरीनाम दौरे के दौरान भारत की आर्थिक सहायता से बने पैशन फ्रूट प्रोसेसिंग प्लांट को वहां की सरकार को सौंपा। उन्होंने कहा कि भारत सूरीनाम की प्रगति और समृद्धि में हमेशा भरोसेमंद साझेदार रहेगा। यह दौरा कैरिबियाई देशों के साथ भारत के रणनीतिक और विकास सहयोग को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर सूरीनाम की यात्रा पर है। यहां उन्होंने गुरुवार को कहा कि सूरीनाम की तरक्की और खुशहाली की यात्रा में भारत हमेशा एक भरोसेमंद साथी रहेगा। उन्होंने यह बात सूरीनाम की राजधानी पारामारिबो में कही। यहां उन्होंने भारतीय आर्थिक मदद से बने एक 'पैशन फ्रूट प्रोसेसिंग प्लांट' को सूरीनाम सरकार को सौंपा। जयशंकर 2 से 10 मई तक कैरिबियाई देशों की यात्रा पर हैं। इस यात्रा के दौरान वे जमैका के बाद सूरीनाम पहुंचे हैं और इसके बाद वे त्रिनिदाद और टोबैगो जाएंगे।
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प्लांट सौंपने के दौरान जयशंकर ने कहा कि आने वाले समय में जैसे-जैसे सूरीनाम आगे बढ़ेगा, भारत उसके साथ मजबूती से खड़ा रहेगा। उन्होंने साफ किया कि भारत अपने अनुभव साझा करने और सहयोग करने के लिए हमेशा तैयार है। भारत उसी तरह काम करेगा जैसा सूरीनाम की सरकार अपनी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और प्रगति के लिए सही समझेगी। इस मौके पर सूरीनाम के विदेश मंत्री मेल्विन बौवा और कृषि मंत्री माइक नूरसलीम भी मौजूद थे। जयशंकर ने कहा कि ऐसे प्रोजेक्ट्स यह संदेश देते हैं कि भारत, सूरीनाम और ग्लोबल साउथ का सच्चा साथी है।
विदेश मंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत 'वसुधैव कुटुंबकम' यानी पूरी दुनिया एक परिवार है, इस सोच पर चलता है। भारत इसे केवल शब्दों में नहीं बल्कि अपने कामों और प्रोजेक्ट्स के जरिए साबित करता है। उन्होंने कहा कि दोस्ती ऐसी होनी चाहिए जो आम लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाए। भारत और सूरीनाम का सहयोग हमेशा मानव-केंद्रित रहा है। पिछले कुछ वर्षों के रिश्तों को देखें तो इसका सीधा असर आम नागरिकों के जीवन पर पड़ा है। यह नया प्रोजेक्ट आत्मनिर्भरता और विकास की दिशा में भारत की प्रतिबद्धता को दिखाता है।
अपनी यात्रा के दौरान जयशंकर ने सूरीनाम की नेशनल असेंबली के अध्यक्ष माइकल अश्विन अधिन से भी मुलाकात की। दोनों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को लेकर बहुत अच्छी और सार्थक चर्चा हुई। उन्होंने दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच संसदीय आदान-प्रदान के महत्व को भी स्वीकार किया। जयशंकर ने सोशल मीडिया पर बताया कि यह मुलाकात आपसी रिश्तों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की साझा इच्छा का प्रतीक है। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य कैरिबियाई देशों के साथ भारत के रणनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों को और ज्यादा मजबूत करना है।