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UN: 'हजार घाव देकर भारत को कमजोर करना इनकी नीति', यूएन में भारतीय राजदूत ने पाकिस्तान को दिखाई उसकी असलियत

Wed, 27 May 2026 08:07 AM IST
Jyoti Bhaskar आईएएनएस, संयुक्त राष्ट्र।

सार

भारत सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ दृढ़ता से कार्रवाई करेगा। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी हरीश ने देश के सख्त रुख को दोहराते हुए पाकिस्तान को परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद किसी भी रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा। संयुक्त राष्ट्र के मंच पर पाकिस्तान को बेनकाब करते हुए भारत ने और क्या कुछ कहा? जानिए इस खबर में
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संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी हरीश - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी राजदूत पी हरीश ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक के दौरान पाकिस्तान को जमकर सुनाया। पाकिस्तान को आतंकवाद के मुद्दे पर घेरते हुए भारतीय राजदूत ने कहा कि पाकिस्तान, सीमापार आतंकवाद को वित्तपोषित कर बढ़ावा दे रहा है और यह संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और शांतिपूर्ण सहअस्तित्व का साफ उल्लंघन है। 

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यूएनएससी में खुली डिबेट के दौरान अपने जवाब में पी. हरीश ने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा कि इस्लामाबाद को ये बात माननी पड़ेगी कि हर एक्शन के परिणाम होते हैं और भारत के पास पूरा अधिकार है कि वह पड़ोसी देश की तरफ से हो रहे हमलों का मुंहतोड़ जवाब दे।

भारतीय राजदूत ने पाकिस्तान को सीमापार आतंकवाद के साथ ही उसकी भारत को हजार घाव देकर उसे कमजोर करने की नीति पर भी निशाना साधा। पी. हरीश ने कहा कि पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ कई बार बिना किसी उकसावे के हमले किए हैं। पाकिस्तान आतंकवाद, धार्मिक कट्टरवाद और हिंसक चरमपंत को बढ़ावा दे रहा है और अपने गठन के बाद से ही भारत के खिलाफ बेबुनियाद बयानबाजी कर रहा है। 
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सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने मंगलवार को सुरक्षा परिषद में कहा, भारत को सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करने और खुद का बचाव करने का पूरा अधिकार है। हरीश पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि आसिम इफ्तिखार अहमद के भारत विरोधी बयान का जवाब दे रहे थे। अहमद ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों को बनाए रखने पर बहस के दौरान यह बयान दिया था।

भारत विरोधी बयानबाजी पर पाकिस्तान को आड़े हाथ लिया
हरीश ने अहमद के दावों पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान द्वारा सीमा पार आतंकवाद का उपयोग उसके खोखले बयानों को उजागर करता है। पाकिस्तान की आतंकवाद, धार्मिक उग्रवाद और भारत विरोधी बयानबाजी, 1947 में अस्तित्व में आने के बाद से ही लगातार जारी है।

कश्मीर पर पाकिस्तान का दावा
गौरतलब है कि हरीश के बयान से पहले आसिम इफ्तिखार अहमद ने दावा किया था कि कश्मीर पर सुरक्षा परिषद (UNSC) के प्रस्तावों से मुद्दा हल नहीं हुआ है। उन्होंने बेशर्मी से भारत पर इसका दोषारोपण भी कर दिया। अहमद ने कहा कि लगभग आठ दशकों से जम्मू और कश्मीर विवाद अनसुलझा है और ऐसा कश्मीरी लोगों को आत्मनिर्णय का अधिकार देने वाले प्रस्तावों के बावजूद हो रहा है।

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भारत का जवाब और पाकिस्तान का उल्लंघन
इस बिंदु पर भारत का रुख स्पष्ट करते हुए हरीश ने स्पष्ट किया, कश्मीर भारत का एक अभिन्न अंग बन गया है। यह उसके पूर्ण, कानूनी और अपरिवर्तनीय विलय के परिणामस्वरूप हुआ है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने कई युद्ध छेड़कर और सीमा पार आतंकवाद को प्रायोजित करके संप्रभुता का उल्लंघन किया है। सुरक्षा परिषद का 21 अप्रैल, 1948 का प्रस्ताव 47 पाकिस्तान को कश्मीर से अपने सैनिकों को वापस बुलाने के लिए कहता है। पाकिस्तान ने इस मांग का पालन नहीं किया है। भारत ने पाकिस्तान के कश्मीर के प्रति जुनून को गंभीरता से नहीं लिया।

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