नेपाल समेत 18 देश ग्रेलिस्ट में बरकरार
दूसरी ओर एफएटीएफ ने नेपाल, अल्जीरिया, अंगोला, बुल्गारिया, कैमरून, कोट डी आइवोर, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, केन्या, लाओस, मोनाको, नामीबिया, दक्षिण सूडान, सीरिया, वेनेज़ुएला, वियतनाम सहित 18 देशों की प्रगति की समीक्षा की। इसमें नेपाल को फरवरी 2025 में ग्रेलिस्ट में रखा गया था। देश ने एफएटीएफ और एशिया पैसिफिक ग्रुप (एपीजी) के साथ मिलकर अपने एएमएल/सीएफटी सिस्टम को मजबूत करने का वादा किया है।
हालांकि एफएटीएफ ने कहा कि नेपाल को मनी लॉन्ड्रिंग/टेरर फाइनेंसिंग जोखिमों की बेहतर पहचान, बैंकों, सहकारी समितियों, रियल एस्टेट और कैसीनो पर सख्त निगरानी, अवैध हवाला संचालकों पर कार्रवाई, अपराध से अर्जित संपत्तियों की जब्ती, और कानूनी सुधारों पर तेजी से काम करना होगा। यदि नेपाल दो वर्षों के भीतर सुधार नहीं करता, तो उसे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है।
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इसके साथ ही बुर्किना फासो, मोजाम्बिक, नाइजीरिया और दक्षिण अफ्रीका को प्रगति के आधार पर ग्रेलिस्ट से हटा दिया गया है। वहीं, बोलीविया, हैती, लेबनान, ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स (यूके) और यमन ने अपनी रिपोर्ट पेश करने को टाल दिया है। एफएटीएफ ने कहा कि ग्रेलिस्ट वाले देशों से एन्हांस्ड ड्यू डिलिजेंस (अतिरिक्त जांच) की मांग नहीं की गई है, लेकिन उनसे उम्मीद की जाती है कि वे अपने एक्शन प्लान को तय समय में पूरा करें।
क्या है ब्लैकलिस्ट और ग्रेलिस्ट
गौरतलब है कि ब्लैकलिस्ट में ऐसे देश होते है जो मनी लॉन्ड्रिंग और आतंक वित्तपोषण से निपटने में बेहद कमजोर हैं और अंतरराष्ट्रीय प्रणाली के लिए गंभीर खतरा हैं। इनके खिलाफ सख्त प्रतिबंध और वित्तीय बहिष्कार लागू किए जाते हैं। वहीं ग्रेलिस्ट में ऐसे देश होते है जो अभी सुधार की प्रक्रिया में हैं, लेकिन जोखिम बने हुए हैं। अगर सुधार नहीं हुआ, तो इन्हें ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है।