फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अमेरिका में श्वेतों के साथ भी होता है नस्लभेद! एक प्रोफेसर ने भेदभाव के खिलाफ कॉलेज पर किया मुकदमा

Wed, 31 Mar 2021 02:51 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन

सार

अपनी याचिका में लॉवेल ने कहा है कि ये जानकार उन्हें गहरा भावनात्मक सदमा पहुंचा है कि उनकी सैलरी आज 91,923 डॉलर है, जबकि उन दो अश्वेत प्रोफेसरों का वेतन 1,37,157 और 1,42,600 डॉलर है....
Register For Event
विज्ञापन
अमेरिका में विरोध प्रदर्शन करते लोग। - फोटो : PTI (फाइल फोटो)
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अमेरिका के न्यू जर्सी राज्य में एक श्वेत प्रोफेसर ने अपने कॉलेज पर मुकदमा ठोक दिया है। प्रोफेसर का आरोप है कि उनसे नस्लीय आधार पर भेदभाव किया गया। अपने इल्जाम के पक्ष में उन्होंने दलील दी है कि कॉलेज के दो अश्वेत प्रोफेसरों को उससे 49 फीसदी अधिक तनख्वाह दी जा रही है, जबकि शैक्षिक योग्यता में वे दोनों उससे कमतर हैं।

विज्ञापन


मुकदमा दायर कराने वाले प्रोफेसर का नाम विलियम लॉवेल है। वे कैमेडन कॉलेज में केमिस्ट्री पढ़ाते हैँ। लॉवेल 66 साल के हैं। मुकदमा उन्होंने पिछले शुक्रवार को दर्ज कराया। उसकी खबर मंगलवार को मीडिया में आई। उनका दावा है कि जब उन्होंने न्यू जर्सी के ऑपेन रिकॉर्ड्स लॉ (दस्तावेजों की पारदर्शिता सुनिश्चित करने वाले कानून) के तहत आंकड़े हासिल किए, तो उन्हें ‘नस्लीय आधार पर भारी गैर-बराबरी’ की जानकारी मिली। तभी उन्हें अपने और दो अश्वेत प्रोफेसरों की सैलरी में अंतर के बारे में पता चला।

अपनी याचिका में लॉवेल ने कहा है कि ये जानकार उन्हें गहरा भावनात्मक सदमा पहुंचा। उन्हें शर्मिंदगी और अपमान महूसस हुआ। तब उन्होंने कैमडेन काउंटी कॉलेज के अधिकारियों के सामने अपनी शिकायत दर्ज कराई। लेकिन उनकी तनख्वाह उन दो अश्वेत प्रोफेसरों के बराबर करने की उनकी गुजारिश को कॉलेज ने ठुकरा दिया। कॉलेज अधिकारियों ने लॉवेल की शिकायत की आगे जांच कराने से भी इनकार कर दिया। लॉवेल ने ध्यान दिलाया है कि उनकी सैलरी आज 91,923 डॉलर है, जबकि उन दो प्रोफेसरों का वेतन 1,37,157 और 1,42,600 डॉलर है।
विज्ञापन


ये तीनों प्रोफेसर उस कॉलेज में लंबे समय से पढ़ा रहे हैं, जबकि उनकी योग्यता समान है। हालांकि लॉवेल ने दावा किया है कि उनके पास तीन अतिरिक्त प्रोफेशनल डिग्रियां भी हैं, जबकि उन दो में से एक अश्वेत प्रोफेसर के पास सिर्फ दो और एक के पास एक ऐसी डिग्री है। लॉवेल ने अपनी तीनों प्रोफेशनल डिग्रियों का जिक्र अपने लिंक्डइन प्रोफाइल पर भी कर रखा है। वैसे ये मालूम नहीं हो सका है कि इस कॉलेज में बाकी प्रोफेसरों की सैलरी का स्तर क्या है।    

अमेरिका में आम शिकायत अश्वेत और दूसरे अल्पसंख्यक समुदायों के साथ रंगभेदी व्यवहार की रही है। इन समुदायों की शिकायत है कि उन्हें नस्लीय आधार पर भेदभाव झेलना पड़ता है। ऐसी शिकायतें अमेरिकी विश्वविद्यालयों में भी रही हैँ। कई विश्वविद्यालयों ने हाल के वर्षों में ऐसी शिकायतों को दूर करने के लिए अतिरिक्त कदम भी उठाए हैँ।

पिछले अक्टूबर में यूनिवर्सिटी ऑफ केंटकी ने नए छात्रों को नस्ल के आधार पर अलग-अलग गुटों में बांट कर उनकी ट्रेनिंग करने का प्रोग्राम शुरू किया था। उनमें से श्वेत छात्रों की ट्रेनिंग के दौरान उनका परिचय उन नस्लभेदी भावनाओं और पूर्वाग्रहों से कराने की कोशिश की गई, जिससे श्वेत छात्र ग्रस्त रहते हैं।

हालांकि इस ट्रेनिंग की गोपनीय रखने की कोशिश की गई थी, लेकिन इस बारे में खबरें मीडिया में लीक हो गईं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक श्वेत छात्रों की भाषा, व्यवहार और नजरिए में कई नस्लभेदी संकेत देखे गए, जबकि वे छात्र इस बात से परिचित नहीं थे।

लेकिन कोई श्वेत लिंगभेद का शिकार बताए, ये असामान्य है। इसीलिए प्रो. लॉवेल का मामला मीडिया में चर्चित हुआ है। लॉवेल ने कैमडेन कॉलेज में 1995 में पढ़ाना शुरू किया था। वे गणित, विज्ञान और स्वास्थ्य विज्ञान संबंधी विभागों के डीन रह चुके हैं। उनकी छवि एक अच्छे प्रोफेसर की रही है। छात्रों के मूल्यांकन में उन्हें पांच से 4.8 रेटिंग मिली हुई है।

इसके बावजूद वे इस कॉलेज में खुद को भेदभाव का शिकार मानते हैं, ये बात हैरतअंगेज मानी गई है। उनकी ऐसी कोई शिकायत पहले से यहां के किसी रिकॉर्ड में पहले दर्ज नहीं है। लेकिन अब ये मामला अदालत पहुंच गया है। पर्यवेक्षकों का कहना है कि इसकी सुनवाई और फैसलों में काफी दिलचस्पी ली जाएगी।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें