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पीएम मोदी के उज्बेकिस्तान पहुंचते ही क्यों टेंशन में आया पाकिस्तान?

अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Updated Sat, 29 Aug 2026 09:50 PM IST

ताशकंद की धरती जहां करीब छह दशक पहले भारत ने अपने एक प्रधानमंत्री को खो दिया था, आज उसी ताशकंद से भारत की कूटनीति की एक नई तस्वीर सामने आ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उज्बेकिस्तान पहुंच चुके हैं और एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव ने जिस गर्मजोशी से उनका स्वागत किया, उसने दोनों देशों की दोस्ती का संदेश दिया। लेकिन पीएम मोदी का ये दौरा सिर्फ औपचारिक मुलाकात तक सीमित नहीं है। रक्षा से लेकर आतंकवाद, क्रिटिकल मिनरल्स से लेकर ऊर्जा, डिजिटल कनेक्टिविटी से लेकर कारोबार तक, कई मोर्चों पर भारत और उज्बेकिस्तान के बीच बड़ी बातचीत होनी है। और इसके बाद मोदी बिश्केक जाएंगे, जहां SCO का मंच होगा और दुनिया की नजरें भारत की कूटनीति पर होंगी। यानी ताशकंद से बिश्केक तक, पीएम मोदी का मिशन क्या है? देखिए ये खास रिपोर्ट...

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चार दिवसीय मध्य एशिया दौरे पर उज्बेकिस्तान पहुंच गए हैं। ताशकंद एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव ने प्रधानमंत्री मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया। दोनों नेताओं की मुलाकात में भारत और उज्बेकिस्तान के बीच मजबूत होते रिश्तों की तस्वीर साफ दिखाई दी।

पीएम मोदी अपने दौरे के दौरान राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता करेंगे। इस बातचीत का मकसद दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना है।

भारत और उज्बेकिस्तान के रिश्ते सिर्फ कूटनीतिक नहीं हैं... इनके पीछे सदियों पुराने सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंध भी हैं। यही वजह है कि मोदी का ये दौरा कई मायनों में खास माना जा रहा है।

अब सवाल है कि आखिर ताशकंद में मोदी और मिर्जियोयेव के बीच किन मुद्दों पर मंथन होगा?

दोनों नेता व्यापार और निवेश, रक्षा, ऊर्जा, डिजिटल कनेक्टिविटी, शिक्षा और लोगों के बीच संपर्क जैसे कई अहम क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा करेंगे।

इसके साथ ही क्रिटिकल मिनरल्स, फार्मा, हेल्थकेयर, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और स्पेस जैसे क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा हो सकती है।

यानी बातचीत का एजेंडा सिर्फ दो देशों के मौजूदा रिश्तों तक सीमित नहीं होगा... बल्कि आने वाले वर्षों में भारत और उज्बेकिस्तान की साझेदारी किस दिशा में जाएगी, इसका रोडमैप भी तैयार किया जा सकता है।

भारत के लिए उज्बेकिस्तान की अहमियत सिर्फ आर्थिक साझेदार के तौर पर नहीं है। मध्य एशिया की सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भी ताशकंद भारत का महत्वपूर्ण सहयोगी है।

भारत और उज्बेकिस्तान के बीच रक्षा सहयोग लगातार बढ़ रहा है। दोनों देश आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी सहयोग करते रहे हैं।

ऐसे वक्त में जब अफगानिस्तान की स्थिति, आतंकवाद और क्षेत्रीय अस्थिरता जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं, मध्य एशिया में भारत की मौजूदगी और साझेदारी रणनीतिक तौर पर बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

और यहीं से इस दौरे का एक दूसरा पहलू सामने आता है...

मध्य एशिया आज दुनिया की बड़ी ताकतों के लिए रणनीतिक मैदान बन चुका है। चीन, रूस, अमेरिका, यूरोप और तुर्की सभी इस क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

ऐसे में भारत के लिए उज्बेकिस्तान के साथ मजबूत रिश्ते सिर्फ दोस्ती का सवाल नहीं हैं... बल्कि ये भारत की व्यापक रणनीतिक जरूरत से भी जुड़े हैं।

उज्बेकिस्तान की भौगोलिक स्थिति इसे और खास बनाती है। मध्य एशिया के इस देश की सीमाएं अफगानिस्तान और दूसरे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के करीब हैं। भारत के लिए मध्य एशिया तक पहुंच और वहां अपनी रणनीतिक मौजूदगी मजबूत करने में उज्बेकिस्तान की भूमिका अहम हो सकती है।

अब बात उस पहलू की भी कर लेते हैं जिस पर पाकिस्तान की नजर भी हो सकती है।

भारत के लिए मध्य एशिया तक सीधे और प्रभावी संपर्क की राह आसान नहीं है। पाकिस्तान के कारण भारत की जमीनी कनेक्टिविटी सीमित है। ऐसे में ईरान का चाबहार बंदरगाह और मध्य एशियाई देशों के साथ बढ़ते संबंध भारत के लिए वैकल्पिक रास्ते तैयार करते हैं।

उज्बेकिस्तान के साथ रणनीतिक साझेदारी मजबूत होने से भारत को मध्य एशिया के साथ व्यापार, ऊर्जा और कनेक्टिविटी के नए रास्ते मिल सकते हैं।

यानी ताशकंद में होने वाली बातचीत का असर सिर्फ भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों तक सीमित नहीं माना जा रहा... इसके व्यापक भू-राजनीतिक मायने भी हैं।

प्रधानमंत्री मोदी के ताशकंद पहुंचने से पहले उज्बेकिस्तान के युवा छात्रों ने भी खास अंदाज में उनका स्वागत किया।

पीएम मोदी ने खुद सोशल मीडिया पर छात्रों का एक वीडियो साझा किया। इस वीडियो में ताशकंद के छात्र हिंदी में प्रधानमंत्री का स्वागत करते नजर आए।

छात्रों ने भारत और उज्बेकिस्तान के पुराने संबंधों का जिक्र किया और प्रधानमंत्री मोदी के ताशकंद आने को लेकर अपनी खुशी जाहिर की।

पीएम मोदी ने छात्रों के हिंदी में स्वागत करने की तारीफ की और कहा कि उनका उत्साह खास है। खास बात ये है कि कूटनीति के बड़े मंच से अलग ये तस्वीर दोनों देशों के लोगों के बीच बढ़ते जुड़ाव का संदेश भी देती है।

लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के ताशकंद दौरे का एक ऐतिहासिक पहलू भी है।

11 जनवरी 1966 ताशकंद में ही भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का निधन हुआ था। उनकी मृत्यु आज भी भारतीय इतिहास के सबसे चर्चित और सवालों से जुड़े अध्यायों में शामिल है।

अब करीब छह दशक बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ताशकंद पहुंचे हैं। संयोग देखिए... 2 अक्टूबर को लाल बहादुर शास्त्री की जयंती है और उससे करीब एक महीने पहले पीएम मोदी ताशकंद में मौजूद हैं।

प्रधानमंत्री के शास्त्री मेमोरियल जाने की भी संभावना है। इसके अलावा वह महात्मा गांधी मेमोरियल भी जा सकते हैं।

इसलिए ताशकंद का ये दौरा कूटनीति के साथ-साथ इतिहास और स्मृतियों से भी जुड़ा हुआ है।

भारत और उज्बेकिस्तान के बीच रिश्तों की बात करें तो प्रधानमंत्री मोदी का ये उज्बेकिस्तान का चौथा दौरा है।

पीएम मोदी इससे पहले 2015, 2016 और 2022 में उज्बेकिस्तान जा चुके हैं। राष्ट्रपति मिर्जियोयेव भी भारत का दौरा कर चुके हैं और 2019 के वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट में शामिल हुए थे।

मोदी और मिर्जियोयेव की मुलाकातें भी लगातार होती रही हैं। दोनों नेता 2023 में दुबई में COP28, 2024 में कजान में BRICS और 2025 में चीन के तियानजिन में SCO समिट के दौरान मिले थे।

यानी दोनों नेताओं के बीच संपर्क लगातार बना हुआ है... और अब ताशकंद की मुलाकात इसी रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने का मौका है।

लेकिन प्रधानमंत्री मोदी का मध्य एशिया दौरा सिर्फ ताशकंद तक नहीं है।

उज्बेकिस्तान के दो दिवसीय दौरे के बाद पीएम मोदी 31 अगस्त को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक पहुंचेंगे। वहां वह SCO के शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।

SCO का मंच भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां रूस, चीन और मध्य एशिया के कई प्रमुख देश एक साथ मौजूद होंगे।

ऐसे में ताशकंद में द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूत करने के बाद बिश्केक में बहुपक्षीय कूटनीति का मंच मिलेगा।

यानी एक दौरा... दो पड़ाव... और कई रणनीतिक संदेश।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ये चार दिवसीय दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब मध्य एशिया की रणनीतिक अहमियत तेजी से बढ़ रही है।

ताशकंद में भारत अपनी द्विपक्षीय साझेदारी को मजबूत करेगा... रक्षा और आतंकवाद पर सहयोग बढ़ाने की कोशिश होगी... व्यापार, ऊर्जा और टेक्नोलॉजी में नए रास्ते तलाशे जाएंगे।

इसके बाद बिश्केक में SCO का बड़ा मंच होगा।

इस पूरे दौरे को अगर एक लाइन में समझें तो संदेश साफ है भारत मध्य एशिया में सिर्फ मौजूद नहीं रहना चाहता... बल्कि अपनी रणनीतिक और आर्थिक मौजूदगी को और मजबूत करना चाहता है।

ताशकंद की धरती पर प्रधानमंत्री मोदी का गर्मजोशी से स्वागत हुआ... लेकिन अब असली नजर उन बैठकों पर है, जहां रिश्तों के अगले अध्याय की पटकथा लिखी जाएगी।

शास्त्री जी की यादों से जुड़े ताशकंद से लेकर SCO के मंच वाले बिश्केक तक... प्रधानमंत्री मोदी का ये दौरा इतिहास, कूटनीति और रणनीति तीनों का संगम नजर आ रहा है।
अब देखना होगा कि भारत और उज्बेकिस्तान की बातचीत से कौन से नए समझौते और कौन से नए रणनीतिक रास्ते निकलते हैं।

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