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Tarique Rahmans Swearing-in Ceremony: क्या पीएम मोदी ढाका जाएंगे?

अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Updated Sun, 15 Feb 2026 04:46 AM IST

बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव दर्ज हो गया है। आम चुनाव के नतीजों ने सत्ता परिवर्तन की तस्वीर साफ कर दी है और अब नई सरकार के गठन की तैयारियां तेज हो गई हैं। बीएनपी की जीत के बाद सबसे ज्यादा चर्चा जिस मुद्दे पर हो रही है, वह है तारिक रहमान का शपथ ग्रहण समारोह और उसमें भारत के प्रधानमंत्री को संभावित निमंत्रण।

करीब दो दशक बाद बीएनपी सत्ता में वापसी कर रही है। पार्टी अध्यक्ष तारिक रहमान के प्रधानमंत्री पद की शपथ को लेकर ढाका के राजनीतिक गलियारों में हलचल है। सवाल यह है कि क्या इस ऐतिहासिक क्षण में भारत के प्रधानमंत्री को आधिकारिक तौर पर आमंत्रित किया जाएगा?

नई सरकार का रास्ता साफ

पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान की अगुवाई में बीएनपी ने चुनाव में बड़ी जीत दर्ज की है। 2024 में शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद देश राजनीतिक अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा था। अंतरिम व्यवस्थाओं, विरोध प्रदर्शनों और कूटनीतिक चर्चाओं के बीच यह चुनाव बेहद अहम माना जा रहा था।

अब परिणामों के साथ सत्ता का रास्ता साफ हो गया है। ढाका में सरकार गठन की कवायद शुरू हो चुकी है और शपथ ग्रहण समारोह को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने की तैयारी की जा रही है।

क्या पीएम मोदी को जाएगा निमंत्रण?

बीएनपी नेता एएनएम एहसानुल हक मिलन ने संकेत दिए हैं कि शपथ ग्रहण समारोह में दुनिया के प्रमुख नेताओं को बुलाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों के नेताओं को आमंत्रित करना सामान्य शिष्टाचार का हिस्सा है और उम्मीद है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी निमंत्रण भेजा जाएगा। हालांकि अभी तक आधिकारिक अतिथि सूची जारी नहीं हुई है।

मिलन ने यह भी दोहराया कि बीएनपी की विदेश नीति का मूल मंत्र रहेगा “सबके साथ दोस्ती, किसी से दुश्मनी नहीं।” यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत-बांग्लादेश संबंधों को लेकर कई सवाल खड़े हैं, खासकर शेख हसीना के भारत में रहने और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर उठी चिंताओं के बीच।

जीत के बाद मोदी की बधाई

बीएनपी की जीत के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दक्षिण एशिया के शुरुआती नेताओं में रहे जिन्होंने तारिक रहमान को बधाई संदेश भेजा। उन्होंने इसे बांग्लादेश की जनता के भरोसे का प्रतीक बताया। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच फोन पर बातचीत भी हुई, जिसे सकारात्मक बताया गया।

इस संवाद को नई ढाका सरकार और नई दिल्ली के बीच रिश्तों को संतुलित रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। जानकारों का मानना है कि अगर शपथ ग्रहण समारोह में मोदी को आमंत्रित किया जाता है और वे शामिल होते हैं, तो यह दोनों देशों के संबंधों में एक सकारात्मक संकेत होगा।

शेख हसीना का प्रत्यर्पण बना बड़ा मुद्दा

नई सरकार के सामने सबसे संवेदनशील मुद्दों में से एक शेख हसीना का प्रत्यर्पण है। बीएनपी नेता सलाहुद्दीन अहमद ने कहा है कि उनकी पार्टी औपचारिक रूप से भारत से मांग करेगी कि शेख हसीना को ढाका भेजा जाए ताकि उन पर मुकदमा चलाया जा सके।

यह मामला दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों के बीच उठाया जाएगा। ऐसे में कूटनीतिक स्तर पर बातचीत और कानूनी प्रक्रियाएं अहम भूमिका निभा सकती हैं। भारत के लिए भी यह एक जटिल मसला होगा, क्योंकि यह सिर्फ कानूनी नहीं बल्कि राजनीतिक और रणनीतिक आयामों से भी जुड़ा है।

‘राष्ट्रीय हित पहले’ का संदेश

बीएनपी नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि नई सरकार की विदेश नीति का केंद्र बिंदु राष्ट्रीय हित होगा। पार्टी नेताओं ने कहा है कि सभी देशों के साथ रिश्ते बराबरी, आपसी सम्मान और रणनीतिक स्वायत्तता के आधार पर रखे जाएंगे।

भारत सहित पड़ोसी देशों के साथ सहयोग बढ़ाने का संकेत दिया गया है। साथ ही यह भी कहा गया है कि बांग्लादेश अपनी संप्रभुता और हितों से समझौता नहीं करेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण एशिया की राजनीति में बांग्लादेश की भूमिका महत्वपूर्ण है। चीन, भारत और पश्चिमी देशों के बीच संतुलन साधना नई सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी।

आगे की राह

अब सबकी नजर शपथ ग्रहण समारोह की तारीख और अतिथि सूची पर टिकी है। क्या नरेंद्र मोदी इस समारोह में शिरकत करेंगे? क्या शेख हसीना का प्रत्यर्पण कूटनीतिक तनाव बढ़ाएगा?

इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में मिलेंगे। फिलहाल इतना तय है कि बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के साथ एक नया राजनीतिक अध्याय शुरू हो रहा है जिस पर न सिर्फ ढाका, बल्कि नई दिल्ली और पूरा दक्षिण एशिया नजर रखे हुए है।

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