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Britain Entry in Iran-Israel War:Iran के खिलाफ युद्ध में शामिल हुआ ब्रिटेन?

Mon, 23 Mar 2026 02:09 PM IST
Adarsh Jha अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम

क्या पश्चिम एशिया एक बड़े युद्ध की दहलीज पर खड़ा है? क्या अमेरिका और ईरान के टकराव में अब ब्रिटेन भी सीधे उतरने की तैयारी में है? अरब सागर में ब्रिटेन की न्यूक्लियर सबमरीन की तैनाती क्या ये सिर्फ दबाव की रणनीति है या आने वाले हमले का संकेत? डिएगो गार्सिया की ओर दागी गई मिसाइलें क्या ये चेतावनी थी या ताकत का प्रदर्शन? और सबसे बड़ा सवाल क्या अब यह संघर्ष सीमित रहेगा या पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले सकता है?

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच ब्रिटेन की एंट्री ने हालात को और विस्फोटक बना दिया है। अरब सागर में ब्रिटिश पनडुब्बी HMS एनसॉन की तैनाती, अमेरिकी बेस को मंजूरी और ईरान की कड़ी चेतावनी इन सबके बीच मिडिल ईस्ट का संकट अब नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है।

आइए समझते हैं इस पूरे घटनाक्रम को विस्तार से।

अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बढ़ते तनाव के बीच अब ब्रिटेन की सैन्य सक्रियता ने हालात को और ज्यादा गंभीर बना दिया है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्रिटेन की परमाणु ऊर्जा से संचालित पनडुब्बी एचएमएस एनसॉन को अरब सागर में तैनात किया गया है। यह तैनाती ऐसे समय पर हुई है, जब अमेरिका पहले ही ईरान के खिलाफ सख्त सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दे चुका है, जिससे पूरे पश्चिम एशिया में युद्ध जैसे हालात बनते दिख रहे हैं।

ब्रिटिश मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रॉयल नेवी की यह अत्याधुनिक पनडुब्बी लंबी दूरी तक सटीक हमला करने में सक्षम है। एचएमएस एनसॉन में टॉमहॉक ब्लॉक IV लैंड-अटैक क्रूज मिसाइलें तैनात हैं, जो दुश्मन के ठिकानों को बड़ी सटीकता से निशाना बना सकती हैं। इसके अलावा इसमें स्पीयरफिश हेवीवेट टॉरपीडो भी लगे हैं, जो समुद्री युद्ध में बेहद घातक माने जाते हैं। माना जा रहा है कि यह पनडुब्बी उत्तरी अरब सागर के गहरे पानी में मौजूद है, जहां से यह जरूरत पड़ने पर किसी भी सैन्य अभियान में शामिल हो सकती है।

रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि अगर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री की ओर से अनुमति मिलती है, तो इस पनडुब्बी को हमले का आदेश दिया जा सकता है। ऐसी स्थिति में यह सतह के करीब आकर एक साथ कई मिसाइलें दागने में सक्षम है। इस तैनाती से साफ संकेत मिलता है कि ब्रिटेन भी इस पूरे घटनाक्रम में सक्रिय भूमिका निभाने की तैयारी में है।

इसी बीच, ब्रिटेन ने अमेरिका को अपने सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति भी दे दी है। डाउनिंग स्ट्रीट की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि यह फैसला होर्मुज जलडमरूमध्य में अंतरराष्ट्रीय शिपिंग को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से लिया गया है। अमेरिका इन बेस का इस्तेमाल ईरान की उन मिसाइल साइट्स को निशाना बनाने के लिए कर सकता है, जिनसे कथित तौर पर जहाजों पर हमले किए जा रहे हैं।

हालांकि, ब्रिटेन ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह किसी बड़े युद्ध में सीधे तौर पर शामिल नहीं होना चाहता। इसके बावजूद उसकी सैन्य तैयारियां और अमेरिका के साथ बढ़ता सहयोग यह संकेत दे रहा है कि स्थिति तेजी से बदल रही है और किसी भी समय बड़ा टकराव हो सकता है।

वहीं, ईरान ने इस घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने ब्रिटेन को चेतावनी दी है कि वह अमेरिका और इजरायल के साथ मिलकर किसी भी सैन्य कार्रवाई में हिस्सा न ले। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से क्षेत्र में तनाव और भड़क सकता है। अराघची ने यह भी आरोप लगाया कि ब्रिटेन अपने ही नागरिकों की इच्छा के खिलाफ जाकर इस संघर्ष में शामिल हो रहा है।

तनाव को और बढ़ाने वाली एक और घटना हाल ही में सामने आई, जब ईरान ने हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया की ओर दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। यह बेस अमेरिका और ब्रिटेन का एक महत्वपूर्ण संयुक्त सैन्य अड्डा है, जहां से क्षेत्रीय सुरक्षा अभियानों को संचालित किया जाता है। हालांकि, दोनों मिसाइलें अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकीं। एक मिसाइल उड़ान के दौरान ही फेल हो गई, जबकि दूसरी को अमेरिकी नौसेना के इंटरसेप्टर सिस्टम ने निशाना बनाया।

इस घटना ने ईरान की मिसाइल क्षमताओं को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं, क्योंकि डिएगो गार्सिया ईरान से करीब 4,000 किलोमीटर दूर स्थित है। इससे यह संकेत मिलता है कि ईरान के पास लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइल तकनीक मौजूद हो सकती है।

कुल मिलाकर, पश्चिम एशिया में मौजूदा हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं। अमेरिका, ईरान और अब ब्रिटेन की बढ़ती सैन्य मौजूदगी ने इस संकट को और गहरा कर दिया है। अगर कूटनीतिक स्तर पर जल्द कोई समाधान नहीं निकला, तो यह टकराव एक बड़े युद्ध का रूप ले सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ना तय है।

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