उत्तरकाशी जनपद मुख्यालय से महज तीन किमी की दूरी पर स्थित स्यूणा गांव के लिए आज तक पुल का निर्माण नहीं हो पाया है। इस कारण इन्हें आज भी भागीरथी नदी के ऊपर ट्राली पर आवाजाही करने को मजबूर होना पड़ रहा है। हाथ से खिंची जाने वाली ट्राली पर कभी भी कोई भी बड़ा हादसा हो सकता है। स्यूणा गांव के लोगों की ट्राली पर आवाजाही करनी अब नियति बन गई है। गत वर्ष तक ग्रामीण भागीरथी नदी का जलस्तर कम होने पर अस्थाई पुल का निर्माण कर आवाजाही करते थे। लेकिन अब वह 12 माह ट्राली से आवाजाही कर रहे हैं। स्थिति यह है कि अगर किसी बुजुर्ग और स्कूली बच्चों को नदी को पार करने के लिए आवाजाही करनी है। तो उन्हें वहां पर इंतजार करना पड़ता है कि कोई सक्षम व्यक्ति उनकी मदद करने वहां पर आएगा। वहीं हाथ से खिंची जाने वाली ट्राली पर आय दिन हादसों को खतरा बना रहता है। स्थानीय निवासी प्रवीन तिवारी, धमेंद्र पोखरियाल, रमेश, गणेश आदि का कहना है कि वह पुल निर्माण की मांग को लेकर गंगोत्री हाईवे भी जाम कर चुके हैं। उसके बाद हरकत में आए प्रशासन और लोक निर्माण विभाग ने 118 मीटर पुल के निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया था। लेकिन उसकी प्रक्रिया भी आगे नहीं बढ़ पाई है। किसी के बीमार होने और शादी और अन्य समारोह के समय गांव तक कोई सामान पहुंचाना बड़ी मुश्किल बन जाता है। उनका कहना है कि जनपद मुख्यालय से महज तीन किमी की दूरी पर शासन-प्रशासन और जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों को उनकी समस्या नहीं दिख रही है। अब दोबारा ग्रामीणों को उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा।