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Video: बगावत करने वाले विधायक को बचाया, अपनी बात रखने पर हमारे खिलाफ कर दी एकतरफा कार्रवाई

अरविंद कुमार Updated Mon, 06 Jul 2026 11:54 PM IST

पिथौरागढ़। कांग्रेस के परिवर्तन संकल्प सम्मेलन में हुए बवाल के बाद निष्कासित पूर्व दायित्वधारी, पूर्व महिला जिलाध्यक्ष और पूर्व पीसीसी सदस्य का दर्द छलका। उन्होंने कहा कि बगावत कर निकाय चुनाव में पार्टी की नाक नीची करने वाले विधायक के खिलाफ न तो पहले और ना आज कार्रवाई हुई। हमेशा पार्टी का झंडा ऊंचा करने वालों के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की गई है जो गलत और बेहद गंभीर है। बीते दिनों परिवर्तन संकल्प सम्मेलन में हुए विवाद का कारण बताते हुए पार्टी ने महिला जिलाध्यक्ष भावना नगरकोटी को पद से हटाते हुए कार्यकारिणी भंग कर दी थी। वहीं उनके साथ ही पूर्व दायित्वधारी महेंद्र लुंठी और पीसीसी सदस्य दीपक लुंठी को नोटिस देकर जबाव मांगा गया। तीनों के जवाब से संतुष्ट न होकर बीते रविवार को प्रदेश महामंत्री राजेंद्र सिंह भंडारी ने तीनों को छह साल के लिए निष्काशित करने का फरमान जारी कर दिया। इससे आहत तीनों निष्कासितों ने सोमवार को पत्रकार वार्ता कर इस फैसले को गलत बताते हुए अपना दर्द बयां किया और शीर्ष नेतृत्व के साथ ही विधायक पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि विधायक ने कैबिनेट मंत्री स्व. प्रकाश पंत के निधन के बाद हुए उपचुनाव में मैदान में उतरने से मना कर पार्टी को दिक्कत में डाल दिया। निकाय चुनाव में अपनी चहेती को टिकट न मिलने से बगावत कर वह पार्टी प्रत्याशी को हराने में सहायक हुए। तब उन्होंने पार्टी से कोई लेना-देना न होने की सार्वजनिक तौर पर बात कही थी। सम्मेलन में विधायक पहुंचे तो महिला जिलाध्यक्ष ने इन्हीं बातों को सामने रखा। तब भी विधायक अनुशासन हीनता दिखाते हुए सम्मेलन से दादागिरी करते हुए निकल गए। प्रदेश अध्यक्ष, जिलाध्यक्ष और प्रदेश महामंत्री ने इसका कारण हमें बताते हुए हमारे खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की है जबकि विधायक को छोड़ दिया गया। तीनों ने कहा कि वह इस एकतरफा फैसले को नहीं मानेंगे। प्रदेश प्रभारी के साथ ही केंद्रीय नेतृत्व से मिलकर उनके समक्ष अपनी बातों को रखेंगे। केंद्रीय नेतृत्व जो भी फैसला लेगा वही उन्हें मान्य होगा। -------------------- जिलाध्यक्ष ने दी थी बोलने की खुली छूट पिथौरागढ़। पूर्व महिला जिलाध्यक्ष भावना नगरकोटी ने कांग्रेस जिलाध्यक्ष पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि सम्मेलन की तैयारी के लिए लंबे समय से उनका साथ दे रही थी। सम्मेलन से पूर्व जिलाध्यक्ष के साथ चर्चा हुई। तब मैंने उनसे साफ तौर पर कहा कि हमें अपनी बात और दर्द साझा करने का पूरा मौका मिलना चाहिए। तब जिलाध्यक्ष से साफ तौर पर कहा कि सम्मेलन में आप अपनी हर बात रख सकती हैं। जब मैंने विधायक से सवाल पूछे तो जिलाध्यक्ष ने अपनी नाक बचाने के लिए मुझे रोका। बवाल का जिम्मेदार भी मुझे ही ठहराया गया। प्रदेश अध्यक्ष ने भी निष्ठावान कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर बागी विधायक की हां में हां मिलाने का काम किया है।

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