संकटमोचन संगीत समारोह जब शुरू होता है तो भक्तों संग हनुमत प्रभु भी संगीत को सुनकर मगन होते हैं। इसलिए वह आमदिनों की अपेक्षा रात में करीब चार घंटे ही विश्राम करते हैं। जबकि सुर, लय व ताल के साधक प्रभु को श्रद्धाभाव से संगीत सुनाते हैं। भक्त भी प्रभु के जयकारे लगाते और आनंदित होते हैं।