फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जलासेन घाट का विकास करना एक आवश्यक कदम है; VIDEO

अमन विश्वकर्मा Updated Fri, 16 Jan 2026 11:18 PM IST

स्वामी जीतेंद्रानंद ने कहा कि काशी के मणिकर्णिका तीर्थ के संदर्भ में कुछ मूर्तियों के तोड़े जाने का समाचार प्राप्त हुआ। संतों ने विषद विवेचना करके यह निर्णय लिया कि मणिकर्णिका घाट पर ये घटना नहीं हुई है। ये जहां चिता जलती है वो जलासेन घाट है। मणिकर्णिका तीर्थ है। जलासेन घाट है। जहां 18वीं शताब्दी से मुर्दे जलाए जा रहे हैं। ज्यों-ज्यों इसकी प्रसिद्धि बढ़ी, त्यों-तों देश के विभिन्न स्थानों से लोग अपने शव ले आकर के यहां पर जलाने का कार्य प्रारंभ कर दिए। इसमें भी आपत्ति नहीं है। विस्तार तो होना ही चाहिए। स्वाभाविक है अगर काशी के किसी तीर्थ को नुकसान पहुंचा है तो उस तीर्थ का पुन निर्माण शास्त्र विधि से कराया जाना चाहिए। ऐसा प्रशासन से अनुरोध है और प्रशासन ने इसे स्वीकार भी किया है। इस क्षेत्र का विकास एक आवश्यक कदम है। काशी विश्वनाथ मंदिर के विकास के समय भी इसी प्रकार कुछ प्रश्न खड़े किए गए थे, जो अशास्त्रीय थे। आज भी खड़े किए जा रहे हैं, जिसका अखिल भारतीय संत समिति समर्थन नहीं करती है और उत्तर प्रदेश सरकार के साथ प्रशासन के साथ तन्मयता के साथ खड़ी है। हमारा मानना है कि काशी के तीर्थ क्षेत्रों का विकास घाटों का समुचित विकास होना ही चाहिए।

Latest

विज्ञापन

Recommended

विज्ञापन
Next
एप में पढ़ें