सोनभद्र लड़कियों के लिए सबसे हथियार उनका आत्म विश्वास ही है। जिसका आत्मविश्वास ऊंचा होता है, वह किसी से डरती नहीं। यह बातें अमर उजाला की ओर से अनपरा तापीय परियोजना के आवासीय परिसर स्थित डॉ. अंबेडकर सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में आयोजित अपराजिता कार्यक्रम में प्रशिक्षक सुशील यादव ने कही। उन्होंने कहा कि आत्मरक्षा और हमला दोनों ही बिना आत्म विश्वास के नहीं हो सकता। इसलिए पहले अपने अंदर आत्मविश्वास को बढ़ाएं। संकोच त्यागें, क्योंकि यही हमारी सबसे बड़ी कमजोरी और सामने वाले का हथियार है। ऐसा नहीं है कि लड़कियां कमजोर हैं। बस उन्हें अपनी ताकत को पहचानने की जरूरत है। घर से लेकर विद्यालय और बाजार तक किसी का देखना, छूना असहज लगे तो विरोध करें। अगर लगे कि उसका विरोध नहीं कर सकते तो इसे छिपाएं नहीं अपनी मां से जरूर बताएं। सभी के पास हर समय कुछ ऐसे सामान होते हैं, जो मुसीबत के समय हथियार बन जाता है। जैसे विद्यालय आते-जाते समय कोई छेड़े या पकड़ने की कोशिश करे तो बैग, पेन, गोला प्रकार, सेफ्टी पिन का उपयोग करें। इस दौरान उन्होंने तीन तरह के पंच और बैक लॉक बताए। कहा कि जब कोई हमला करे तो बैक लॉक से बचा सकता है और सामने वाले को घायल करना है तो पंच से हमला करें। इसके लिए इसका नियमित अभ्यास करना होगा। सभी लोग नियमित व्यायाम भी करें। कार्यक्रम में विद्यालय की 400 छात्राओं ने प्रशिक्षण लिया। इस दौरान विद्यालय की शिक्षिका नूतन तिवारी, अशोक सिंह, यादवेंद्र पाठक के साथ अन्य शिक्षक उपस्थित रहे।