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आदिवासियों के साथ किसानों ने ऊर्जा परियोजनाओं का किया विरोध

Aman Vishwakarma Updated Sat, 13 Jun 2026 06:06 PM IST

किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा के संयोजन में चलाए जा रहे पेड़ है तो प्राण है अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम में किसानों, आदिवासियों और वनवासियों ने प्रस्तावित ऊर्जा परियोजनाओं एवं जंगलों की कटाई के खिलाफ जोरदार आवाज उठाई। कार्यक्रम में वक्ताओं ने जंगल, जल, जमीन और पर्यावरण संरक्षण को लेकर एकजुटता का संदेश दिया। मोर्चा के नेता संदीप मिश्रा ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है और विकास के नाम पर पर्यावरण एवं स्थानीय लोगों के अधिकारों से समझौता नहीं किया जा सकता। जिला संयोजक रामसूरत खरवार ने कहा कि जान दे देंगे, लेकिन जंगल नहीं कटने देंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि विभिन्न निजी ऊर्जा परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर जंगलों और ग्रामीणों की जमीन प्रभावित हो रही है, जिससे पर्यावरणीय संतुलन और स्थानीय जनजीवन पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने मांग किया कि किसी भी परियोजना को लागू करने से पहले प्रभावित ग्रामीणों की सहमति सुनिश्चित की जाए तथा वनाधिकार, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय हितों को प्राथमिकता दी जाए। आदिवासियों ने मोर्चा के लोगों के साथ भाजपा कार्यालय के सामने नारेबाजी किए। इसके बाद कार्यालय मंत्री कैलाश तिवारी को ज्ञापन सौंपा गया। आदिवासियों ने जंगल, जल, जमीन और पर्यावरण की रक्षा के लिए जनजागरण अभियान को और व्यापक स्तर पर चलाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में रामसूरत खरवार, गुलाब चेरो, दिनेश गोंड, मुरहू गोंड, रामेश्वर पनिका, जीतू माझी, बिंदु खरवार, आकाश चौहान, सत्रुधन बिंद, सूरज कनौजिया, सुजीत विश्वकर्मा, विजय चौहान, सत्यम पाण्डेय, शंकर सोनी, संजय बियार, विजय बिंद आदि ग्रामीण उपस्थित रहे।

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