मथुरा। बजट को लेकर मध्यम वर्गीय परिवारों की महिलाओं ने उम्मीद से जताई थी। उनकी उम्मीद के मुताबिक बजट नहीं रहा। मंहगाई के समय में कम आय वाले परिवारों के सामने ठीक से जीवन यापन करने की समस्या सामने आ खड़ी हुई है। स्वयं सहायता समूह की संचालिका सोनियां माथुर ने बताया कि इस बार बजट से बहुत उम्मीदें थी। बच्चों की शिक्षा और घरेलू बजट के बारे में कुछ ही ध्यान नहीं दिया गया। मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए बहुत अधिक राहत भरा नहीं है। सरकार को कतार में लगे अंतिम व्यक्ति का ध्यान रखना चाहिए। वहीं अनीता ज्ञाग्निक और अनुराधा सिंघल ने बताया कि अधिकांश परिवारों का जीवन यापन 15 हजार की आय से पूरा नहीं हो पा रहा है। परिवार को चलाने के लिए रसोई, शिक्षा, स्वास्थ्य बेहद महत्वपूर्ण है। इसका इंतजाम करना ही है। मध्यमवर्गीय परिवारों के पास बचत के नाम पर कुछ भी नहीं है।