पुरखों की अमानत माने जाने वाले संरक्षित पुराने कुएं सरकारी उपेक्षा और कागजी विकास की भेंट चढ़ गई है। भीतरगांव ब्लॉक के विभिन्न गांवों में बने ऐतिहासिक कुएं आज पूरी तरह सूख चुके हैं। शासन द्वारा पिछले कई वर्षों से इनका जीर्णोद्धार कायाकल्प कराकर इन्हें पुनर्जीवित करने का दावा किया गया था, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से कोसों दूर है। हालात यह हैं कि 40-40 फीट गहरे कुओं की तली में पानी की एक बूंद तक नहीं बची है। शासन ने बजट तो जारी किया, लेकिन काम केवल कुओं की बाहरी दीवारों को रंगने और उन्हें खूबसूरत दिखाने तक ही सीमित रहा।