समाजवादी पार्टी के चंदौली सांसद वीरेंद्र सिंह ने बुधवार को संसद में सरकार की नीतियों पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि केंद्र सरकार निजीकरण के नाम पर देश की हर महत्वपूर्ण संपत्ति को बेचने पर आमादा है। उन्होंने आरोप लगाया कि एयरपोर्ट और बंदरगाह पहले ही निजी हाथों में सौंपे जा चुके हैं और अब सरकार विधेयक के जरिए परमाणु ऊर्जा जैसे अत्यंत संवेदनशील और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े क्षेत्र को भी अपने चहेते लोगों के हवाले करना चाहती है। सांसद वीरेंद्र सिंह ने सदन में कहा कि सरकार जनता की संपत्ति को निजी तिजोरियों में डाल रही है और संसद से इस पर मुहर लगवाना चाहती है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अब देश की सुरक्षा भी प्राइवेट कंपनियों के हाथों गिरवी रख दी जाएगी? उन्होंने कहा कि प्रस्तावित व्यवस्था में निर्णय निजी कंपनियां लेंगी, जबकि भुगतान सरकार और देश की जनता को करना पड़ेगा, जो पूरी तरह से अनुचित है। उन्होंने कहा कि परमाणु ऊर्जा का विस्तार देश की जरूरत हो सकता है, लेकिन बिना कठोर जवाबदेही और मजबूत निगरानी के इसका निजीकरण स्वीकार्य नहीं है। सांसद ने चिंता जताई कि कार्यपालिका का अत्यधिक नियंत्रण संवैधानिक नियमों और संस्थागत संतुलन को कमजोर कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्र को बाजार की शर्तों और मुनाफे के गणित पर नहीं छोड़ा जा सकता, क्योंकि इसका सीधा संबंध देश की सुरक्षा, पर्यावरण और भावी पीढ़ियों से जुड़ा हुआ है। सपा सांसद ने कहा कि सरकार का यह कदम न केवल सार्वजनिक क्षेत्र को कमजोर करेगा, बल्कि राष्ट्रीय हितों के साथ भी समझौता साबित होगा। उन्होंने संसद के माध्यम से जनता की आवाज उठाते हुए मांग की कि सरकार इस विधेयक पर पुनर्विचार करे और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े क्षेत्रों को निजीकरण से दूर रखे।