चहनिया क्षेत्र के लक्ष्मणगढ़ स्थित श्रीलक्षुब्रम्ह बाबा मंदिर परिसर में श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ महोत्सव का आज चौथा दिन था जहां सैकड़ों की संख्या में भक्तो ने पहुंचकर श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण किया एवं लक्षुब्रम्ह बाबा का दर्शन पूजन किया। लक्षुब्रम्ह बाबा मंदिर परिसर में श्रीमद् भागवत कथा करते हुए गया पीठाधीश्वर वेंकटेश प्रपन्नाचार्य ने किया आज कल कुछ लोग ऐसे हो गये कि वह धर्म पर भी टीका टिप्पणी करने लगे। उनकी बात न सुनकर हमें धर्म की रक्षा करनी है और धर्म की रक्षा तभी होगी जब हम धर्म के प्रति समर्पित होंगे। श्री वेंकटेश प्रपन्नाचार्य जी महाराज ने कहा रामजी ने कहा बालि कहो तो मैं तुम्हें छोड़ दु लेकिन बालि ने कहा कहा हे प्रभु अब मुझे जीने की इच्छा नहीं। मैं सबकुछ कर लिया जो करना चाहता था अब हमारी इच्छा है आपको अंत: करण में रखूं। इसलिए आप अपना कार्य करें। शुकदेव जी महाराज कहते हैं इन्द्रीओ से कथा नहीं सुनी जा सकती हैं इसके लिए मन को शांत किया जाता है। हमारा कर्म ऐसा हो कि हमे भगवान को न पकड़ना पड़े बल्कि भगवान हमें पकड़ ले।भक्ती दो प्रकार की होती है पहला सत्यो भक्ति दुसरा क्रमों भक्ति। दोनों प्रकार की भक्ति को ऐसे समझा जा सकता है जैसे कोई मां अपने बेटे का हाथ पकड़कर जाती है है तो हाथ नहीं छुटता वहीं अगर बेटा मां का हाथ पकड़कर जाता है तो हाथ कभी भी छूट जाता है इसलिए ऐसी भक्ति करो। कथा में राजेन्द्र मिश्रा, गणेश सिंह, संजय सिंह, राजेन्द्र पाण्डेय, विंध्याचल तिवारी, ध्रुव मिश्रा प्रिंस ,चमन पाण्डेय सहित सैंकड़ों भक्त मौजूद रहे।