तहसील मुख्यालय पर आदिवासी, बनवासी और दलित समुदायों ने वन विभाग की मनमानी के खिलाफ़ बुधवार 48 घंटे की भूख हड़ताल का एलान किया। वक्ताओं ने कहा कि वनाधिकार कानून के तहत दाखिल दावों को मान्यता देकर पुश्तैनी जमीन का मालिकाना हक़ दिया जाए। वक्ताओं ने खेती और बसावट कर रहे परंपरागत वन निवासियों को बेदखली से रोकने, गोंड आदिवासी समाज को अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र जारी करने, जाति प्रमाण पत्र को लेकर दर्ज मुकदमों को वापस लेने, लोकतांत्रिक आवाज़ों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं पर फर्जी मुकदमे बंद किये जाने, दिनेश कोल के साथ मारपीट करने वाले वनकर्मियों पर मुकदमा दर्ज किये जाने की मांग की। राम प्यारे राम ने कहा कि वन विभाग और भू माफियाओं का गठजोड़ आदिवासियों को उनकी पुश्तैनी जमीन से बेदखल कर रहा है और जो आवाज़ उठाता है। कहा कि उसे फर्जी मुकदमों में फंसाकर जेल भेजने की साजिश रची जाती है। रामकृत कोल ने कहा कि गोंड समाज को जाति प्रमाण पत्र न मिलने से शिक्षा और रोजगार में कठिनाई हो रही है। इस मौके पर पतालू गोंड, संगीता देवी, लालमणि देवी, ईश्वर दयाल सहित कई वक्ताओं ने भाग लिया। अध्यक्षता खेग्रामस जिला कौंसिल सदस्य रामेश्वर प्रसाद ने की और संचालन भाकपा माले राज्य कमेटी सदस्य सुरेश कोल ने किया।