राज्य कर विभाग के ज्वाइंट कमिश्नर दिनेश कुमार दूबे ने कहा कि जो व्यापारी माल बेचते हैं उनके लिए 40 लाख और जो सेवाएं देते हैं उनका सालाना कारोबार यदि 20 लाख हो जाता है तो उन्हें जीएसटी में पंजीकृत होना अनिवार्य है। जीएसटी पंजीकरण से आपका कारोबार बेरोकटोक चलता रहता है साथ ही प्रत्येक जीएसटी पंजीकृत व्यापारी को 10 लाख रुपये का निःशुल्क दुर्घटना बीमा मिलता है। वह शुक्रवार को नगर के एक प्रतिष्ठान में व्यापारी संवाद कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होने कहा कि जीएसटी-2.0 में सरकार ने बहुत रियायतें दीं और आम जनता को काफी लाभ मिल रहा है लेकिन दूसरी तरफ जीएसटी संग्रह भी प्रभावित हुआ है। इसके लिए हमारे पास एक ही विकल्प है कि अधिक से अधिक व्यापारी जीएसटी के दायरे में आएं। उन्होने व्यापारियों से सहयोग मांगा और कहा कि आप अपने आस पास पड़ोस में ऐसे व्यापारियों को जीएसटी में पंजीकरण के लिए प्रेरित कर सकते हैं। विभाग को भी सूचना दे सकते हैं। कहा कि अपंजीकृत व्यापारियों से केवल सरकार को ही नहीं बल्कि पंजीकृत व्यापारियों को भी नुकसान होता है। प्रश्न पहर सत्र में व्यापारियों ने अधिकारियों के समक्ष अपनी समस्याएं रखीं। लोगों ने नगदी लेनदेन की सीमा के बारे में पूछा। ईवे बिल बनाना कब अनिवार्य हो जाता है। निल रिटर्न किन परिस्थितियों में भरा जा सकता है। किन परिस्थितियों में विभाग से नोटिस प्राप्त होता है आदि। इस पर असिस्टेंट कमिश्नर संजय कुमार सिंह ने लोगों के जवाब दिए। लोगों को समझाया कि आपकी खरीद और बिक्री में मिस मैच होने पर आपको नोटिस आ सकता है। यह भी बताया कि अब तो एआई के माध्यम से स्वतः नोटिस भेजे जाते हैं जिसमे विभाग का कोई हस्तक्षेप नहीं है। असिस्टेंट कमिश्नर राजेंद्र पटेल व ज्योति सिंह ने भी संबोधित किया। इस मौके पर राज्य कर अधिकारी जितेंद्र कुमार सिंह के अलावा उप्र उद्योग व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष राधेश्याम गुप्ता कमलेश जायसवाल, राकेश कैलासी, अरुण बबलू, राहुल गुप्ता, दिपक गुप्ता, गिरधारी जायसवाल, दिलीप गुप्ता, करुणाशंकर दूबे, संजय जायसवाल, संजय चौरसिया, जय प्रकाश चौरसिया, प्रमोद यादव आदि रहे।