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सदियों पुराना है कुंभ में पंडालों पर लगने वाले झंडों का इतिहास

वीडियो डेस्क, अमर उजाला डॉट कॉम Updated Sun, 20 Jan 2019 09:30 AM IST

त्रेता युग में भगवान राम ने लंका विजय के बाद प्रयाग के जिस तीर्थपुरोहित को अपने रघुकुल का पुरोहित माना था, उसके वंश के लोग आज भी मौजूद हैं जो कविवरा, बट्टूपुर जिला अयोध्या के रहने वाले थे, उनकी वंश परंपरा में आज भी मिश्रकुल के तीर्थपुरोहित प्रयाग में विराजमान हैं जो रघुवंशी तीर्थपुरोहित क्षत्रियों के तीर्थ गुरु हैं। प्रयाग में संगम तीरे लगे आकर्षक झंडे ही तीर्थपुरोहितों यानि पंडों के शिविर की पहचान बताते हैं। 

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