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VIDEO: रीलेबलिंग से चल रहा नकली और सरकारी दवाओं का अवैध कारोबार, बनाते थे फर्जी बिल

Dhirendra Singh Updated Mon, 13 Jul 2026 04:59 PM IST

नकली-सरकारी दवाओं का सिंडिकेट कई राज्यों तक है। गिरोह के सदस्य नामी कंपनियों और सरकारी दवाओं की रीलेबलिंग कर बिना बिल के अवैध कारोबार करते थे। इसमें निरस्त हो चुके लाइसेंस से भी फर्जी बिल बनाते थे। एसटीएफ भी जांच कर रही है। गाजियाबाद से भी आरोपी पकड़े हैं। इन सभी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जा रही है। इसके लिए थाना कोतवाली में तहरीर दे दी है। एसटीएफ ने कई आरोपी पकड़ लिए हैं। विभोर मेडिकल एजेंसी ने नामी कंपनी की टैबलेट चाइमोरल फोर्टे (चोट में सूजन कम करने), टैबलेट शेल्कल (कैल्शियम और विटामिन डी) ने अंशिका फार्मा से भारी मात्रा में दवाएं खरीदी कर कोलकाता में पाल ब्रदर्स को बेच दिया। संचालक संजीव कुमार गुप्ता के प्रतिष्ठान के स्टॉक रजिस्टर में अंशिका फार्मा को बेची गई दवाओं का रिकॉर्ड मिले, लेकिन बिल फर्जी पाए गए। इसमें दवाएं गोरखपुर की गुप्ता मेडिकल एजेंसी और आगरा के हर्षित ट्रेडर्स से खरीदी दर्शाईं गईं। इन दोनों फर्म के संचालकों ने इसकी मनाही की। वरदान मेडिकल एजेंसी के यहां एंटीबायोटिक जोस्टम-ओ टैबलेट का स्टॉक मिला। इस पर ईएसआई सप्लाई नॉट फॉर सेल लिखा था। जांच में चाइमोरल फोर्टे का एक नमूना अधोमानक और पेट रोग की एसिलोक दवा नकली मिली। इसके संचालक अंकुर अग्रवाल ने स्वीकार किया कि ये सभी नकली दवाएं विभोर मेडिकल एजेंसी के संजीव कुमार गुप्ता से बेहद कम कीमत पर खरीदी थीं। इसका बिल भी नहीं दिया। इससे विभोर मेडिकल एजेंसी, वरदान मेडिकल एजेंसी, हर्षित ट्रेडर्स, गुप्ता मेडिकल एजेंसी और कोलकाता के पाल ब्रदर्स संगठित गिरोह का खुलासा हुआ। एफएसडीए की आयुक्त डॉ. रोशन जैकब का कहना है कि नकली-सरकारी दवाओं के अवैध कारोबार का सिंडिकेट पकड़ा है। इन सभी के खिलाफ एफआईआर कराई जा रही है। जांच अभी चल रही है, इसमें कई और भी शामिल हैं।

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